पछतावे के आंसू – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

दुलारी काकी हमारे यहां नई शादी करके आई थी उसी समय से काम कर रही है…होश संभाला तभी से दुलारी काकी को दो बेटियों शीला और सरला के साथ देखा है.. दस साल की शीला और सात साल की सरला स्कूल से आते हीं हमारे यहां पहुंच जाती… भूखी प्यासी… दादी उनके लिए रोटी चावल ढक कर रख देती थी..

. क्योंकि रात की एक एक रोटी और लाल चाय के साथ खा कर स्कूल जाती थी.. दुलारी काकी के पति ईंट भट्टा पर काम करते थे… पीने में सारा पैसा खतम कर देते… दुलारी काकी फिर से मां बनने वाली थी… किसी पहुंचे हुए साधु ने कहा था इस बार बेटा हीं होगा.. उनके पति हरखू भी दुलारी काकी का ख्याल रखने लगे थे बेटा की आस में…

              नौ महीने बाद दुलारी काकी बेटे की मां बन गई… बच्चे को देखते मेरे मुंह से निकल गया शीला और सरला कितनी गोरी है और ये काला कलूटा… दुलारी काकी ने तुरंत कहा बबी घीव (घी) के लड्डू टेढ़ा भी अच्छा होता है… बुढ़ापे की लाठी है… मरने पर यही आग देगा तो मुक्ति मिलेगी…

            और फिर दोनों बहनों की पढ़ाई दुलारी काकी ने बंद करवा दी क्योंकि दीपक को कौन संभालता.. हरखू रोज आधा लीटर का दूध का पैकेट लेकर आता की दुलारी पियेगी तो हीं बच्चे को दूध पिलाएगी.. दुलारी की इज्जत और मान बेटा पैदा करने के बाद हरखू की नजरों में बढ़ गई थी पर दोनो बेटियां उपेक्षित हो गईं थीं.. उनकी पढ़ाई उनका बचपन दीपक की परवरिश के लिए दुलारी काकी ने कुर्बान कर दिया था..

              वक्त गुजर रहा था.. दीपक एक साल का हो गया था… दुलारी काकी एडवांस पैसे लेकर धूमधाम से उसका जन्मदिन मनाया.…बेचारी सी दोनो बेटियां पुराने कपड़ों में खड़ी थी… दीपक जरा सा रोता तो दुलारी काकी शीला और सरला के बाल पकड़ कर चांटे लगाती.. बबुआ रो रहा है करमजली क्या कर रही है..

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दोनो बिलबिला जाती.. मां और दादी दोनों समझाती दुलारी को… बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार शोभनीय नहीं है… पर बेटे के नशे में चूर दुलारी को कोई अंतर नहीं पड़ता.. धीरे धीरे दुलारी काकी अपने हिस्से का काम मसलन पोंछा झाड़ू दोनो बेटियों को सौंप देती.. डस्टिंग तो पहले से हीं करवाती थी… शीला और सरला के बाल में जूं पड़ गए थे..

मां मेडिकर मंगवा के दी लगाने को….. शीला सरला जब हमें तैयार होकर स्कूल जाते देखती तो उनके चेहरे का भाव देख मुझे बहुत बुरा लगता…

             शीला सत्रह साल की हो गई थी और सरला चौदह की… दीपक दीपक का नाम प्राइवेट स्कूल में लिखा गया था… ड्रेस पहनकर स्कूल जाता बस से… दुलारी काकी और उनके पति निहाल हो जाते बेटे को देखकर… शीला और सरला दो जगह और झाड़ू पोंछा और बर्तन धोने का काम करने लगी थी…

       दीपक अपने सहपाठियों के पेंसिल कभी कुछ चुरा कर घर ले कर आने लगा… दो तीन बार वार्निंग मिली फिर पेरेंट्स को बुलाया गया.. दोनो ने माफी मांगी और ऐसी गलती दुबारा नहीं होगी इसका आश्वासन दिया.. पांचवीं क्लास में दीपक को स्कूल से निकाल दिया गया… मां और बहनों के बाल पकड़ कर रौब दिखाने की बुरी आदत थी उसे..

एक टीचर के डांटने पर गुस्से में अचानक उनका बाल पकड़ लिया… मां बाप के प्यार दुलार ने दीपक को बहुत बिगाड़ दिया था… पहले तो अच्छे से दीपक की धुलाई हुई फिर स्कूल से निकाल दिया गया… दुलारी काकी और हरखू ने दीपक को लेकर अफसर बनने का जो सपना देखा था उसे बिखरते दिखाई दे रहा था.. पर उन दोनों ने बहुत प्रयास के बाद सरकारी स्कूल में नामांकन कराया….

                                    समय गुजरता रहा शीला की शादी हो गई… लड़का रिक्शा चलाता था.. उसकी पहली पत्नी मर गई थी… दुलारी और हरखू की जिंदगी में दीपक के अलावा शीला और सरला के लिए कोई जगह नहीं थी.. बस किसी तरह शादी करके अपना भार उतारना था… शीला का पति अपने ससुर की तरह हीं पियक्कड़ था… पीके आता और मार पीट करता… इधर दीपक एक नंबर का आवारा और बदचलन हो गया था… जुआ और दारू के लिए पैसा नहीं देने पर दुलारी को दो चार हाथ लगा देता…

बहुत जतन से घर के बगल में एक कट्ठा जमीन का टुकड़ा दीपक के दादा ने हरखू के लिए पैतृक संपति के नाम पर छोड़ा था उसे भी दुलारी को बेचने की नौबत आ गई… दो बार दीपक को पुलिस पकड़ कर ले गई…

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         और एक मनहूस सुबह शीला के पति जहरीली शराब पीकर जो सोया फिर उठा नहीं… तेरहवीं के बाद शीला आई तो उसको देखकर पत्थर दिल के आंखों से भी आंसू निकल जाए.. दुलारी काकी और हरखू के आंखों से #पश्चाताप के आंसू #निकल रहे थे..जिस बेटे के लिए बेटियों के साथ ऐसा बुरा बर्ताव किया वही बेटा आज….. शीला के शरीर पर जगह जगह चोटों के निशान उफ्फ इतनी छोटी सी उम्र में पहाड़ जैसा गम…. दुलारी और हरखू ने प्रतिज्ञा किया कि अब शीला और सरला को जितना हो सकता है अपने पैरों पर खड़ी होने में सहयोग करेंगे..

               अब शीला और सरला दोनों प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गई सिलाई और नर्सिंग योजना के तहत हॉस्टल में रहकर सिलाई और नर्सिंग की ट्रेनिंग ले रही है… दीपक को फिर पुलिस पकड़ कर ले गई है… और इस बार दुलारी काकी और हरखू उसे छुड़ाने  नहीं जा रहे हैं…. यही पश्चाताप शायद उन्हें अपनी बेटियों के करीब ले आए… और कुछ अपने गुनाहों को पश्चाताप के आंसुओं से धो डालें…

 

#स्वलिखित सर्वाधिकार सुरक्षित #

  Veena singh

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