बस अंशुमन, बहुत हो गया तुम्हारा , कितने समय से मैं कुछ बोल नहीं रहा हुं इसका मतलब यह नहीं हैं कि मैं पागल हुं , मुझे भी सब समझ में आता हैं मगर इतने महिनों से चुप इसलिए हुं कि रिश्ते खराब नहीं करना चाहता था मगर अब तुमने और तुम्हारी पत्नी ने बोलने की सारी हदें पार कर ली हैं , अब ओर नहीं सुना जाता !!
निशा अपना सामान पैक करो , हम लोग आज ही इस घर से कहीं दूर चले जाएंगे ताकि किसी को ऐसा ना लगे कि हम उनकी कमाई पर पल रहे हैं गुस्से में बोला अविनाश !!
निशा आंखों में आंसू लिए अपने कमरे में चली गई और अपना और अपने पति अविनाश और अपने दोनों बच्चों का सामान पैक करने लगी !!
घर का माहौल पिछले एक साल से बिगड़ा हुआ था !!
घर के दो बेटे अविनाश और अंशुमन और उनकी पत्नियां निशा और सुमन में अक्सर कुछ ना कुछ कहा -सुनी होने लगी थी कारण था अंशुमन का अविनाश से ज्यादा घर में पैसा देना !!
सुमन अपने पति अंशुमन से शादी के तुरंत बाद ही कहने लगी थी कि बड़े भैया की कमाई ज्यादा नहीं हैं , अगर आप इसी तरह घर में पैसे लुटाते रहे तो हम दोनों ऐशो आराम की जिंदगी कैसे जिएंगे ??
बड़ा भाई अविनाश जिसने कि अपनी सारी जमा पुंजी अंशुमन की पढ़ाई और उसकी शादी कराने में लगा दी थी , वही भाई अब बार बार बड़े भाई को नीचा दिखा रहा था और कह रहा था कि वह इस घर के खर्चे में मदद नही करेगा और उसकी पत्नी सुमन जो कि मायके से तगड़ा माल लेकर आई थी वह भी निशा को हर बार ताने मारते रहती !!
अविनाश और निशा उनकी मां मालती जी के बारे में सोचकर हमेशा चुप रह जाते मगर आज तो अंशुमन और उसकी पत्नी ने हद कर दी थी जिसके चलते अविनाश को यह ठोस कदम उठाना पड़ रहा था !!
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अंशुमन और सुमन के मन में अविनाश और निशा के प्रति नफरत की दीवार खड़ी हो गई थी यह बात मालती जी बहुत महिनों से जानती थी और उन्होंने अंशुमन और सुमन को समझाने की भरसक कोशिश भी की थी मगर वे नाकामयाब रही थी !!
मालती जी अविनाश के कमरे में आकर बोली – बेटा यदि इस घर में तेरे बाबुजी की यादें ना होती तो मैं भी तुम्हारे साथ ही चल देती मगर यहां की हर चीज मुझे उनके होने का एहसास दिलाती है !!
मेरा आर्शीवाद तुम चारो के साथ हैं बेटा , तुम खुब तरक्की करना !!
अविनाश और निशा रुंआसे होकर अपने बच्चों के साथ घर छोड़कर चले गए !!
अविनाश और निशा फोन पर मालती जी का हालचाल पूछते रहते !! आज करीबन दो महिने बाद अविनाश का प्रमोशन हो गया था और उसे अमेरीका में जॉब करने का ऑफर मिला था , जिसमें उसका और उसके परिवार का खाना पीना और रहना कंपनी की तरफ से था !!
अविनाश भी अंशुमन को दिखा देना चाहता था कि वह भी उसकी तरह बहुत पैसा कमा सकता था इसलिए ना चाहते हुए भी उसने यह ऑफर एक्सेप्ट कर लिया था !!
मालती जी को छोड़कर विदेश जाने का उसे दुःख था मगर मरता क्या ना करता , अपने आप को उसे साबित भी तो करना था !!
यहां अंशुमन और सुमन अपनी मर्जी से जिंदगी जीने लगे थे , आए दिन बाहर घूमने जाते और खुब पैसे उड़ाते !!
मालती जी को तो घर की काम वाली बनाकर रख दिया था उन्होंने !!
अविनाश विदेश से मां को बराबर फोन करता रहता मगर मालती जी घर के हालातों के बारे में उसे कुछ ना बताती क्योंकि वह जानती थी अविनाश यह सब सहन नहीं कर पाएगा और सब छोड़कर सीधा यहां चला आएगा और उसे अभी वहां जाकर एक साल ही तो हुआ था !!
आज मालती जी बाथरूम में गिर गई जिसकी वजह से उन्हें कोहनी में चोट आ गई , डॉक्टर के पास पहुंची तो पता चला उन्हें पलास्तर बंधवाना पड़ेगा जो करीबन एक महिने का रहेगा !!
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घर आकर उन्होंने सुमन को सब बताया तो सुमन बोली मम्मी मैं और अंशुमन परसो कश्मीर जा रहे हैं , हमारे कुछ दोस्त भी हैं हमारे साथ , यदि आप हाथ में प्लास्तर बंधवाकर बैठ जाएंगी तो घर का काम कौन करेगा ?? इसलिए प्लास्तर बंधवाने की सोचना भी मत !!
मालती जी का हाथ दर्द के मारे फटा जा रहा था इसलिए वह दूसरे दिन डॉक्टर के पास जाकर कच्चा प्लास्तर बंधवाकर आई और बोली मैं थोडे दिनो बाद वापस आती हुं !!
हाथ से काम ना होने पर भी सुमन उनकी रसोई में कुछ मदद नहीं कर रही थी वह तो अपनी शोपिंग और पैकिंग में व्यस्थ थी और बेटा अंशुमन वह तो जैसे पत्नी का गुलाम बनकर रह गया था !!
मालती जी अविनाश और निशा को याद कर बहुत बार रो पड़ती मगर वह उन्हें अपने हालात बताकर परेशान नही करना चाहती थी !!
एक दिन बाद अंशुमन और सुमन कश्मीर के लिए रवाना हो गए !!
मालती जी रसोई में अपने लिए खाना बनाने गई तो देखा रसोई में डिब्बों में राशन का सारा सामान भी खत्म हो गया हैं उन्होंने बेटे अंशुमन को फोन किया और कहा बेटा , तु मुझे पैसे भी नहीं देकर गया हैं और रसोई में तो कुछ खाने को राशन भी नहीं हैं !!
अंशुमन गुस्से में बोला – तुम ठहरी अकेली जान , अब तुम क्या चाहती हो तुम्हारे लिए अलग से खाने का राशन भरवाकर जाते , कुछ भी खाकर दिन गुजार लो , ग्यारह दिन में हम वापस आने वाले हैं !!
मालती जी बिचारी अब क्या खाती जब रसोई में कुछ बनाने जितना राशन भी नहीं था !! यूं ही भूखी – प्यासी सो गई , दूसरे दिन बगल वाले किराना स्टोर से राशन का सामान खरीदने गई तो दुकानदार बोला मांजी आपके बेटे बहु ने आपको उधार देने से मना कहा हैं फिर भी आप पर तरस खाकर आज के दिन का राशन दे देता हुं लेकिन आइंदा ना दे पाऊंगा !!
मालती जी ने वापस अंशुमन को फोन किया तो अंशुमन ने फोन उठाकर चिल्लाकर कहा अब क्या आफत आ गई मां ??
मालती जी कुछ कहती उससे पहले ही सुमन की आवाज आई फोन स्विच ऑफ करके रख दीजिए वर्ना यह बुढ़िया हमें यहां भी इंजाय नहीं करने देगी !!
अंशुमन बोला मम्मी प्लीस आइंदा फोन मत करना वर्ना मुझसे बुरा कोई ना होगा !!
मालती जी बिचारी ने आज तो किराने वाले के दिए राशन से खाना बना लिया था मगर कल क्या करेगी यही सोच रही थी कि उन्हें एक बुढ़िया रास्ते में पेन बेचती दिखाई दी !!
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मालती जी ने उससे पूछा तो उसने बताया एक दुकानदार उन्हें पेन बेचने देता हैं और बदले में रोज पैसे देता हैं !! मालती जी उस बुढिया के साथ पेन की दुकान पर पहुंची और बेचने के लिए पेन ले आई !!
उन्होंने अपने चेहरे को ढंक लिया ताकि कोई उन्हें पहचान ना पाए और ट्रॉफिक सिग्नल पर आती जाती गाडियों वालों को पेन बेचने लगी !!
उन्हें उससे जो भी पैसे मिलते उससे वह अपना पेट भरने लगी !!
मालती जी को यह काम करना अच्छा लग रहा था क्योंकि इससे उन्हें बेटे बहू के सामने अपने लिए गिड़गिड़ाना तो नहीं पड़ेगा बस उन्हें इसी बात का डर था कि कोई उन्हें पहचान ना ले वर्ना बेटे बहू उन्हें बहुत डांट लगाएंगे !!
आज पुरे ग्यारह दिन बाद अंशुमन और सुमन कश्मीर से वापस आने वाले थे !!
मालती जी सुबह अपने काम पर निकल गई ताकि उनके आने से पहले वापस घर आ जाए !!
वे सिग्नल पर पेन बेच रही थी कि एक बड़ी सी कार आकर वहां रुकी जिसमें उनका बेटा अविनाश बैठा हुआ था !!
मां तो मां होती है , चेहरा ढके होने के बावजूद अविनाश मालती जी को पहचान गया और बोला मां यह क्या कर रही हो आप ?? इस उम्र में यह काम ??
मालती जी ने चेहरे से कपड़ा हटाया और फुट- फुटकर रोने लगी !!
अविनाश ने मां को कार में बिठाया और बोला कितने दिनों से आपको फोन कर रहा हुं , आप फोन ही नहीं उठा रही थी इसलिए सीधे विदेश से आपको मिलने के लिए आ गया मगर आज मुझे अपने आप पर बहुत गुस्सा आ रहा हैं कि मैंने तुम्हें क्यों इस नर्क में रहने छोड़ दिया ?? क्यों मैंने अंशुमन पर भरोसा कर लिया कि वह तुम्हारा ख्याल रखेगा ??
मालती जी ने अविनाश को पुरी बात बताई कि इतने महिनों में उन्होंने क्या क्या सहा ??
अविनाश मालती जी को लेकर सीधे अंशुमन से मिलने पहुंचा !!
अंशुमन और सुमन कुछ देर पहले ही घूम घामकर घर आए थे !!
अविनाश गुस्से में बोला तुम दोनों ने मां के साथ बहुत गलत व्यवहार किया हैं , यह घर जो कि पापा ने बड़े प्यार से बनाया था , इस घर से तुम दोनों को अभी की अभी निकलना होगा , पापा के जाने के बाद यह घर मां का हैं और तुम लोगों ने तो मां को अपने ही घर में दुःखी कर दिया !!
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अंशुमन बोला सीधे सीधे क्यों नहीं कहता कि तेरी इस घर पर नजर हैं इसलिए तु हमें निकालकर खुद यहां रहना चाहता हैं !!
मालती जी बोली चुप कर नालायक , बहुत बोल लिया तुने और बहुत सुन लिया मैंने !!
यह अविनाश नहीं मैं चाहती हुं कि तुम दोनों कहीं ओर जाकर अपना गुजारा करो , मैं तुम लोगों के साथ अब बिल्कुल भी नहीं रह पाऊंगी !!
सुमन तुरंत गिड़गिड़ाते हुए बोली मांजी , यह क्या कह रही हैं आप ??
हमारा क्या होगा ??
मालती जी बोली बहु , यह तो तुम्हें मुझे इतनी पीड़ा देने से पहले सोचना चाहिए था !!
अविनाश बोला हम दोनों भाईयों के नफरत की दिवार में बिचारी मां ने बहुत कुछ सहन किया मगर बस ओर नहीं !!
मां यह घर किराए पर चढ़ा देना और तुम मेरे साथ रहोगी वर्ना अंशुमन सोचेगा मैं यह घर हड़पना चाहता था और अंशुमन एक बात ओर सुन ले इस घर का किराया मां रखेगी मैं नहीं
क्योंकि इस घर पर बस मां का हक हैं !!
अंशुमन और सुमन के लिए अब इस घर के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो गए थे और मालती जी यह घर किराए पर देकर अविनाश के साथ विदेश चली गई जहां बड़ी बहु निशा ने उन्हें खुब मान सम्मान दिया !!
दोस्तों , बुढापे के लिए हमेशा अपने पास पैसे रखें ताकि इस अवस्था में बेटे बहु पर आश्रित ना होना पड़े !!
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धन्यवाद
आपकी सहेली
स्वाती जैंन