नफरत की दीवार – खुशी : Moral Stories in Hindi

नफरत एक ऐसा शब्द है जब वो किसी भी रिश्ते में आ जाए तो उसे खाक कर देता है।रोहित ,अंजलि और कृतिका तीनों मौसेरे भाई बहन थे।

रोहित अकेला होने की वजह से सबका लाडला भी था और थोड़ा जिद्दी  भी था जो जिद करता वो पूरी हो जाती। इस बात से अंजलि बहुत चिढ़ती थी

कि सब उसी को प्यार करते हैं।अंजलि और कृतिका रोहित को हर साल राखी बांधती थीं। बचपन से लेकर बडे होने तक हर साल वो राखी बंधवाने आता था।

पर जैसे ही रोहित की शादी तय हुई उस साल वो राखी के त्योहार पर नहीं आ पाया।अंजलि ने उस दिन बहुत शोर मचाया और रोहित को भी बहुत कोसा ।

रोहित अगले दिन आया और माफी मांग ली।फिर ऐसी छोटी बड़ी बातें होती गई और अंजलि के मन में गांठ बनती चली गई।कृतिका उसे समझती और कहती कि भूल जाओ

रिश्तों में ऊंच नीच मजाक चलता है ।पर अंजलि ने बातों को भूलना नहीं सीखा वो इलास्टिक की तरह चीज़ों को खींचती गई।और रिश्तों में दरार आती चली गई।

कृतिका की शादी हो गई और रोहित अंजलि की भी सब अपने अपने घर में खुश थे।पर कहते हैं ना आदमी का स्वभाव नहीं बदलता यही अंजलि के साथ भी हुआ।

अंजलि की शादी आगरा में हुई और रोहित और कृतिका एक शहर में ही थे तो कभी कभी मिलना हो जाता था अंजलि इस बात से भी चिढ़ती थी

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कि क्यों कृतिका रोहित से संबंध रखती हैं।धीरे धीरे अंजलि का यह व्यवहार बढ़ता चला गया।वो हर आदमी को खरी खोटी सुनाती किसी को कुछ भी बोलती

इस वजह से लोग उससे दूर हो रहे थे।कृतिका उसे समझ।ती तो वो उससे ही लड़ने बैठ जाती।कृतिका ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की कई बार बिना गलती के भी उससे माफी मांगी की संबंध खराब ना हो।

पर कहते हैं ना कि हर चीज की एक लिमिट होती है।कृतिका के बार बार झुकने को अंजलि उसका मतलब और स्वार्थ समझ बैठी

और एक दिन कृतिका को तो उल्टा सीधा सुनाया साथ ही साथ उसके पति आदर्श के लिए भी उल्टा सीधा बोलती चली गई आज कृतिका की सहनशक्ति जवाब दे गई ।

और उसने सोच लिया कि अब मैं अंजलि से संबंध नहीं रखूंगी।पर कृतिका एक साफ दिल महिला थी उसने फिर भी अंजलि को फोन किया पर अंजलि ने ना ही उसका फोन उठाया ना ही जवाब दिया।

अपनी अन।और गुस्से में उसने एक नफरत की दीवार खींच ली ।जो शायद अब चाह कर भी नहीं टूट सकती थी।

हमारी गलत फ़हमिया और मानसिक सोच अच्छे रिश्ते बिगाड़ देती हैं।आज झूठी अन्ना के कारण अंजलि आज अकेली है।

दोस्तों ये ज़िंदगी बहुत छोटी है जो इस तरह रूठने मानने में बर्बाद नहीं करनी चाहिए प्यार से रहो प्यार से रहो क्योंकि ये ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा।

स्वरचित कहानी 

आपकी सखी 

खुशी

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