सुनीता कॉलेज की सीढ़ियों से उतरती हुयी कैंटीन की और बढ़ चली , आज उसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय लेना था . कैंटीन में नवीन पहले से ही सुनीता का इंतजार कर रहा था . नवीन ने सुनीता के लिए कुर्सी खींचकर उसे बैठने को कहा . सुनीता बैठ गयी और एक लम्बी सांस भरकर बोली , ‘नवीन मैं तैयार हूँ तुम्हारे साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए ‘ .
नवीन और सुनीता एक ही मैनेजमेंट कॉलेज में पढ़ते थे , सुनीता पहले सेमेस्टर में और नवीन आखिरी सेमेस्टर में थे . फर्स्ट ईयर की वेलकम पार्टी में दोनों ने एक दूसरे को पहली बार देखा था और पहली ही नज़र में दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे थे . धीरे धीरे उनकी मोहब्बत के चर्चे कॉलेज में आम हो गए थे , ये बात उनके परिवार वालों से भी ज्यादा दिन छुपी न रह सकी. घर का अकेला बेटा होने के कारण नवीन के घरवालों को उसकी शादी की जल्दी थी . नवीन के परिवार को सुनीता पसंद थी , लेकिन सुनीता के पिताजी इस रिश्ते के लिए तैयार न थे ,
सुनीता के पिताजी ने सुनीता से कहा कि ‘ जब तक तुम कॉलेज पूरा करके अपने पैरों पर नहीं खड़ी हो जाती और अपना अच्छा बुरा समझने लायक नहीं बन जाती , तब तक हम तुम्हारी शादी नहीं करेंगें, अगर नवीन इंतज़ार कर सकता है तो ठीक है वरना नवीन से कह दो कि वह कही और शादी कर ले . सुनीता के पिता ने सुनीता को समझाते हुए कह कि अभी तुम केवल 20 साल की हो ये समय तुम्हारी शादी करने का नहीं बल्कि हमने जो तुम्हारे करियर के लिए सपने देखे हैं उन्हें पूरा करने का है I
सुनीता ने नवीन को अपने पिता द्वारा कही गयी बात बताई लेकिन नवीन के घर वाले तो उसकी शादी के लिए बहुत बेसब्र ही रहे थे क्योंकि नवीन का कैम्पस सिलेक्शन हो गया था ,उसे अच्छी नौकरी मिल गयी थी . नवीन ने कहा कि सुनीता मेरे लिए बहुत से रिश्ते आ रहे हैं और मेरे घरवाले मेरी शादी जल्दी कराना कराना चाहते हैं , इसलिए मेरी बात मान लो हम शादी कर लेते हैं, शादी के बाद तुम अपना कोर्स पूरा कर लेना , तुम्हारा करियर बनाने में मैं तुम्हारा साथ दूंगा I
सुनीता को नवीन के प्यार और वादे पर पूरा विश्वास था , उसने अपने घरवालों के खिलाफ जाकर नवीन से शादी के लिए हाँ कर दी I आज कैंटीन में सुनीता अपने माता पिता के सपनों और परवरिश को पीछे छोड़कर नवीन के साथ एक नई दुनिया बसने के लिए आगे चल पड़ी थी I
सुनीता और नवीन ने कोर्टमैरिज कर ली , छह महीने कैसे निकल गए पता ही नहीं चला , छह महीने बाद सुनीता कि खुमारी तब टूटी जब उसे उलटियां आना शुरू हो गयीं और डॉक्टर ने बताया कि वह माँ बनने वाली है I सुनीता ने नवीन से कहा कि अभी तो उसका कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है वह बच्चे की जिम्मेदारी कैसे संभाल पायेगी , नवीन ने कहा की माँ पिताजी ख़ुशी से फूले नहीं समा रहे हैं कि उनका वंश चलाने वाला आ रहा है और तुम्हे कोर्स की पड़ी है , कोर्स तो बाद में भी हो जायेगा I सुनीता ने अपने करियर के सपने को तक पर रखकर पुरे दिल से बच्चे के स्वागत की तैयारी कर ली I नौ महीने बाद सुनीता ने एक प्यारी से बच्ची को जन्म दिया I
बच्ची के जन्म की खबर सुनकर सुनीता के माता पिता से भी न रहा गया और वो पुरानी कड़वाहट भुलाकर सुनीता से मिलने आ पहुंचे I उन्होंने नवीन और उसके माता पिता को बधाई दी I नवीन की माँ ने कहा कि हमने तो पोते की उम्मीद लगा रखी थी पर कोई बात नहीं पहला बच्चा है, दूसरा जरूर हमारा वंश चलाने वाला आएगा I
सुनीता के पिता को यह बात अच्छी ना लगी लेकिन बेटी के ससुरालवालों से तर्क वितर्क करना उन्होंने सही ना समझा , बात आई गई हो गयी I
सुनीता की बेटी परी अब चार महीने की हो गयी और एक दिन अचानक सुनीता को फिर से पता चला की वह प्रेग्नेंट है I सुनीता ने नवीन से कहा की उसे यह बच्चा नहीं चाहिए , परी अभी बहुत छोटी है पर नवीन ने सुनीता को बहलाते हुए कहा की भगवन की मर्जी है , हो सकता है की वो हमारा परिवार पूरा करना चाहते हों और हमारे वंश को आगे बढ़ाने वाले को भेज रहे हों I नवीन और उसके परिवारवालों की जिद के आगे सुनीता की एक ना चली I
आखिर कुछ महीनों के बाद सुनीता की डिलीवरी का समय आ गया I सुनीता के सास ससुर ने बेटा होने के लिए तरह तरह की पूजा और टोटके करवाए लेकिन होता वही है जो ऊपरवाले ने लिख रखा होता है
सुनीता ने फिर से एक बेटी को जन्म दिया , जल्दी -जल्दी माँ बनने के कारण वो बहुत कमजोर हो गयी थी , जब उसे होश आया तो उसने देखा की हॉस्पिटल में उसके माता पिता उसके साथ बैठे हैं, सुनीता ने जब नवीन के बारे में पूँछा तो पता चला की वो किसी बिज़नेस मीटिंग के लिए शहर से बाहर चला गया है I
सुनीता को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज मिल गया , जब नवीन वापस आया तो सुनीता ने नवीन के व्यव्हार में बहुत बदलाव महसूस किया I बात-बात पर सुनीता पर चिल्लाना , बच्चों की देखरेख में कोई मदद ना करना , यहाँ तक की अब वह अपनी सह कर्मचारी रीता से सुनीता के सामने ही घंटों बातें करता रहता और अगर सुनीता कुछ कहती तो उसे यह कहते हुए झिड़क देता की तुम एक हाउसवाइफ हो तुम क्या जानो बिज़नेस की बातें I
आखिर एक दिन जब सुनीता से बर्दाश्त ना हुआ तो उसने नवीन से पूंछ ही लिया की नवीन तुम इतना कैसे बदल गए हो , पहले मेरे प्यार के लिए कुछ भी करते थे और अब मुझसे ढंग से एक बात भी नहीं करते I नवीन भी जैसे भरा बैठा था और इसी दिन का इंतज़ार कर रहा था , उसने सुनीता से कहा की मेरे घरवाले तुम्हे इस घर की बहु बनाकर लाये की तुम हमारे वंश को बढ़ाने वाले को बेटे को जन्म दोगी लेकिन तुमने तो मेरे सर पर दो दो बेटियां मढ़ दीं I अब तुम्हारे साथ साथ बेटियों की जिम्मेदारियां और हो गयी हैं और मेरा सहारा बनने वाला कोई नहीं होगा I
सुनीता ने कहा ऐसा क्यों कहते हो नवीन हम अपनी बेटियों को पढ़ाएंगे लिखाएँगे इस लायक बनाएंगे की वो आपका सहारा बन सकें I वो आपकी जिम्मेदारियों में हाथ बंटाएंगी I नवीन ने सुनीता पर कटाक्ष करते हुए कहा- ‘ हाँ जैसे तुम बड़ा पढ़लिख कर अपने पिताजी का सहारा बनी हो जाओ वही जाकर उनकी जिम्मेदारियों में हाथ बंटाओ I
सुनीता की दुनिया जैसे रुक गयी उसकी आँखों के सामने अपने पिता के कहे शब्द गूंजने लगे की पहले अपने पैरों पर खड़ी हो जाओ फिर शादी करो . सुनीता की आँखों से आंसू बहने लगे उसने नवीन से कहा कि “तुम मेरे साथ ऐसा व्यव्हार करोगे मैंने सपने में भी नहीं सोचा था ” I उसने कहा कि मैंने तुम्हारे लिए अपना घर परिवार , करियर सब छोड़ दिया और तुम मुझे एक बेटा ना होने की वजह से अपने पिता के पास वापस जाने को कह रहे हो
वहीँ अपनी नातिनों को खिलौने देने आये सुनीता के पिता जी ने पीछे खड़े होकर सब सुन लिया था , उन्होंने आगे आकर सुनीता से कहा तू चल बेटी मैंने सब सुन लिया है इसीलिए मैं कहता था कि पहले आत्मनिर्भर बन जा ताकि आगे चलकर ऐसे दोगले लोग तुझे घर का बेकार सामान समझकर घर से निकालने की धमकी ना दे सकें . अगर आज तू अपने पैरों पर खड़ी होती तो ये ये नवीन जो तुम्हे जिम्मेदारी समझ रहा है वो तुम्हारे आगे पीछे घूमता I
सुनीता के पास कोई जवाब नहीं था सिर्फ आंसू भरी आँखे थी जो अपनी बेटियों के लिए सपना बुन रही थीं कि जब तक उसकी बेटियां आत्मनिर्भर नहीं हो जाती तब तक वह उन्हें किसी और के हाथों नहीं सौंपेगी . क्योंकि इस दुनिया में लोगों के बदलते रंग से बचने का एक ही तरीका है कि खुद को तरक्की के रंग में रंग लो I
सुनीता ने अपने पिता कि ओर देखा और आंसू पोंछते हुए कहा कि पिताजी मुझे मेरे किये कि सजा मिल गयी है और सबक भी पर अब मैं इसे सुधारना चाहती हूँ, अब मैं दुनिया को दिखाऊँगी कि बेटियां जिम्मेदारी नहीं हैं बल्कि अपने परिवार का सबसे बड़ा सहारा हैं .
Nishi Singh
New Delhi
देर से हि सही सुनीता आँखे खुलं गयी इसी बात कि ख़ुशी हैं 👌👌😊🙏