मैं किस्मत वाली हूं – मंजू ओमर 

तू कितनी किस्मत वाली है वैशाली, परिवार में कोई भी नहीं है न सास ने ससुर देवर जेठानी ननद अपना आराम से तू और विकास मौज मस्ती में रहते हैं । वैशाली की सहेली भूमि ने कहा। हां सास ससुर है भी तो वो अपने घर में रहते हैं यहां तुम्हारे पास नहीं । अच्छा किया तुमने विकास को मना कर दिया था अपनी मम्मी को यहां लाने से है ना ।

हां यार मजा तो बहुत आता है लेकिन विकास कभी कभी बहुत उदास हो जाता है और मैंने तो उसकी आंखों में कभी कभी आंसू भी देखे हैं अपने मम्मी पापा को याद करते हुए।जब भी पूछती हूं क्या हुआ तो टाल जाता है कहता है कुछ नहीं।

        अक्सर हमारी सोसायटी में किसी न किसी के मम्मी पापा आते रहते हैं ।पोता पोतियों को लेकर बाहर घुमाते रहते हैं । विकास बहुत देर तक उनको देखता रहता है और फिर उदास हो जाता है। एक दिन तो फ्लैट के गार्ड ने विकास से पूछ लिया  साहब जी आपके घर में आपके मम्मी पापा नहीं है क्या कभी यहां पर देखा नहीं है।

तो उस दिन विकास बहुत उदास रहे दिनभर, और रात खाना भी नहीं खाया। लेकिन इन सबके लिए मजबूर तो मैंने ही किया है न विकास को । मैंने ही शर्त रखी थी कि शादी मैं तुमसे तभी करूंगी जब तुम ये वादा  करोंगे कि मम्मी पापा यहां नहीं आएंगे ।

विकास नहीं मान रहा था कि मैं अकेला बेटा हूं उस घर का , अकेला सहारा हूं और ऐसे कैसे छोड़ दूं उनको। लेकिन मैं अडी रही अपने बात पर । आखिर में विकास को मेरी बात माननी ही पड़ी क्योंकि वो मुझसे बहुत प्यार करता है ।

              मोहन और रमा जी का इकलौता बेटा है विकास। बड़े लाड़ प्यार से पाला था । कभी किसी चीज की कोई कमी नहीं होने दी थी माता पिता ने । इसलिए थोड़ा जिद्दी हो गया था विकास जो कह देता था करके ही मानता था। अच्छा पढ़ा लिखा दिया था उसे मोहन जी ने।और इस समय वो मुम्बई में एक बड़ी कंपनी में इंजीनियर था ।

बेटा वहां मुम्बई में रहता था और मोहन और रमा जी अपने गृहनगर में रहते थे।28 का हो गया था विकास तो रमा जी ने उसकी शादी करने की सोची और लड़कियां देखना शुरू कर दिया। लेकिन विकास अपने आफिस में साथ काम करने वाली वैशाली को पसंद करता था।

इधर रमा जी जब भी किसी लड़की की बात विकास से करती तो वो टाल जाता।उसकी हर वक्त के काल मटोल से रमा जी परेशान हो गई थी।वो कोई फैसला नहीं ले पा रही थी । शादी व्याह का मामला है जब तक बेटा हां न करें कैसे किसी लड़की को पसंद करें ।

              और यहां विकास और वैशाली का प्रेम परवान चढ़ने लगा था। विकास धीरे धीरे वैशाली के प्रेम में इतना पागल हो गया था कि वो उसके बिना रहने की सोच भी नहीं सकता था। वैशाली की हर बात मानने को तैयार हो जाता था। वैशाली की एक दोस्त थी रीना जिसकी अभी डेढ़ साल पहले शादी हुई है ।

आज उसके घर जाने का मौका लगा वैशाली को। रीना का संयुक्त परिवार था जिसमें सास ससुर ,देवर , जेठानी और दो नन्द  थी । जिसमें एक ननद की शादी हो गई थी और अभी एक की होनी बाकी थी। दोनों सहेलियां आपस में बातें कर रही थी कि रीना की सास आकर रीना से बोली रीना तुमने अपने हिस्से का काम खत्म कर लिया कि नहीं,और हां गोलू को मुझे दो और जाकर चार कप चाय बनाओ ।

पापा कब से चाय का इंतजार कर रहे हैं।और रीना की सास वैशाली से बात करने लगी। रीना के यहां से जब वैशाली लौटी तो पूरे रात भर वो सोचती रही कि कितने बड़े परिवार में रीना फंसी हुई है ।सास ससुर , ननद ,देवर , जेठानी ना बाबा ना मैं तो ऐसे नहीं रह सकती । रीना तो अलग से कुछ बात भी नहीं कर सकती , कोई न कोई बीच बीच में आता ही रहता है।

             वैशाली वैसे भी बहुत आजाद और खुले विचारों वाली लड़की थी ।उसे ये सास ससुर, ननद ,देवर , जेठानी नहीं चाहिए।उसे ये कुनबा बिल्कुल भी पसंद नहीं था।

वो सोचने लगी अच्छा है वो विकास से प्रेम करती है तो उसके परिवार में कोई भी नहीं है मैं तो किस्मत वाली हूं और मैं शादी से पहले विकास से मैं पक्का वादा कर लूंगी कि मैं तुम्हारे मम्मी पापा के साथ नहीं रह सकती ।इधर विकास वैशाली के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है

तो वैशाली टाल जाती है अभी नहीं अभी नहीं करके। तीन महीने निकल गए विकास को प्रपोज किए हुए तो विकास ने एक दिन वैशाली से पूछ लिया कि तुम शादी के लिए तैयार नहीं हो क्या, क्या तुम मुझसे प्रेम नहीं करती । वैशाली ने जवाब दिया मैं प्रेम तो तुमसे करती हूं

लेकिन मेरी एक शर्त है। अच्छा बताओ क्या शर्त से विकास बोला वैशाली ने कहा देखो मैं तुम्हारे मम्मी पापा के साथ नहीं रह सकती।ये सास ससुर का लफड़ा मुझे नहीं चाहिए। दिनभर टोका-टाकी,ये न करो ,वो न करों।और तुम्हारे मम्मी पापा बीमार हो तो सेवा करो मैं ये सब नहीं कर पाऊंगी।

विकास जो वैशाली के प्रेम में पागल हो चुका था बोल दिया ठीक है यार न रहना मम्मी के साथ वो तो वैसे भी हमारे साथ नहीं रहते ।हम लोग तो यहां अकेले ही रहते हैं । हां कभी कभार आए तो , नहीं मुझे वो भी नहीं चाहिए।अब विकास मजबूर था सो हां कर दी ।

       वैशाली और विकास की शादी हो गई। विकास भी वैशाली के प्यार में इतना पागल हो गया था कि मम्मी उसकी खबर ही न लेता था।इस बीच वैशाली प्रेगनेंट हो गई । शुरू के तो कुछ महीने निकल गए लेकिन जब धीरे धीरे समय नजदीक आने लगा तो किसी का सहारा चाहिए देखभाल करने को। विकास ने कहा कि मम्मी को बुला लेते हैं लेकिन वैशाली नहीं मानी

और मायके चली गई डिलिवरी के लिए।नौ महीने बाद वैशाली ने बेटे को जन्म दिया। विकास के मम्मी पापा पोते को देखने के लिए बेताब थे। लेकिन बेटे बहू का ऐसा रवैया देखकर विकास के पास जाने की हिम्मत न पड रही थी।और विकास ने मम्मी से कह रखा था कि वैशाली को पसंद नहीं है कि तुम लोग यहां आओ।रमा जी मन मसोस कर रह जाती थी।एक ही

बेटा है और ऐसी लड़की से शादी कर लिया है कि वो हम लोगों को देखना भी नहीं चाहती । तकदीर में यही लिखा है ये सोचकर मन को समझा लेती थी।

             धीरे-धीरे विकास का बेटा विक्की चार महीने का हो गया था और विकास की मम्मी ने अभी तक पोते का मुंह नहीं देखा था।और तभी एक हादसा हो गया । विकास और वैशाली कार से कहीं जा रहे थे कि कार एक्सीडेंट हो गया । जिसमें वैशाली के सिर में चोटे आई और विकास का पैर फैक्चर हो गया ।

और विकास के बच्चे विक्की की मौत हो गई । सभी को अस्पताल पहुंचाया गया । वैशाली बेहोश थी। एक्सीडेंट की खबर सुनकर रमा जी अपने को रोक नहीं पाई और पति के संग आ गई ।दो दिन बाद वैशाली को होश आया तब तक उसको पता नहीं था कि उसका बेटा अब नहीं रहा।उधर वैशाली की मां को ब्रेन हेमरेज हो गया था तो वो भी नहीं आ सकती थी वैशाली के पास।

        वैशाली के होश आने पर जब स्थिति कुछ नार्मल हुई तो उसे बताया गया कि उसका बेटा विक्की नहीं रहा। वैशाली चिखने चिल्लाने लगी उसे संभालना मुश्किल हो रहा था। फिर सांस रमा जी ने बड़े प्यार से वैशाली के सिर पर हाथ फेरा। वैशाली चौक गई।शांत हो जा बेटा अब ईश्वर को यही मंजूर था

हम क्या कर सकते है‌ यही अफसोस है कि हम लोग उसको एक बार देख भी न पाए। लेकिन तुम दोनों ठीक हो ईश्वर को बहुत बहुत धन्यवाद है संभालो अपने आपको । भगवान तुम्हारी गोद फिर से भरेगा चिंता न करो।निराश न हों।

          अस्पताल से छुट्टी होकर घर आने पर रमा जी ने बहुत प्यार से संभाल लिया वैशाली को।हर समय दिलासा  देती रहती। उसके खाने पीने का बहुत अच्छे से ध्यान रखा , कोई काम न करने देती।वैशाली धीरे धीरे ठीक हो रही थी और साथ ही हृदय परिवर्तन भी हो रहा था।

एक महीने रहने के बाद रमा जी आज बेटे से कह रही थी वापस जाने को बेटा मेरा और पापा का टिकट बनवा दो।तूम लोग ठीक हो गए हो अब हम लोगों को जाना चाहिए।तभी वैशाली बोली नहीं मम्मी अभी और रूकिए अभी नहीं जाइए।मै तो बहुत किस्मत वाली हूं जो मुझे आप जैसी मां के रूप में सास मिली है। जितनी अच्छे से आपने मेरी देखभाल की शायद मेरी मम्मी भी न कर पाती ।

मेरी धारणा सास के लिए जो थी आपने गलत साबित कर दी । अभी आप और रूकिए।और आगे भी आते जाते रहिएगा।तुम भी आना बेटा घर अब हमारे पास,तुम दोनों के सिवाय हमारा और कौन है।तुम दोनों ने तो मुझसे मुंह ही मोड़ लिया था। नहीं मां अब ऐसा नहीं होगा,अब हम लोग भी आएंगे आपके पास आप अकेले नहीं हैं हम लोग हैं साथ।मैं बहुत किस्मत वाली हूं जो मुझे आप मिली है । मुझे दो दो मां का प्यार मिला है।

मंजू ओमर 

झांसी उत्तर प्रदेश 

8 जनवरी

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