मॉं मेरे हिस्से आयेगी। – अर्चना खण्डेलवाल

अरे! विभा जीजी आप आ गई , कमल खुशी से बोलते हुए उनके पैर छूने लगा और उनका सामान उठाकर अंदर ले गया, विभा ने मुंह बनाया, अभी तक कमल में अक्ल नहीं आई, ये नहीं शादी का घर है, जरा ढंग के कपड़े पहन लेता, गंवार का गंवार ही रहेगा, पढ़ लिख लेता तो थोड़ी अक्ल आ जाती, लग ही नहीं रहा है, अपने सगे भाई की शादी का काम निपटा रहा है।

 बिल्कुल नौकर जैसा लग रहा है, जरा भी स्मार्टनेस नहीं है, पढ़ी-लिखी प्रोफेसर विभा ने अपनी मॉं से कहा तो वो गुस्सा हो  गई,  हां तू भी उसका मजाक बना ले, एक तो वो सबके लिए भागदौड़ कर काम करता है और तू है कि उसको ही दोष दे रही है वो तेरे पढ़े-लिखे दोनों भाई तो अभी तक भी नहीं आये, आकर मिल तो लेते, आखिर बहन इतनी दूर से आई है।

तभी कमल फिर हाथ में ठंडा शर्बत लिये हाजिर हो जाता है, विभा जीजी ये शर्बत पी लो, आप गर्मी में आई हो, मैं इतने आपके लिए खाना लगवा देता हूं, और वो गिलास पकड़ाकर दौड़कर चला गया।

 विभा की नजरे अपने से छोटे भाई को ढूंढ रही थी, जिसकी शादी हो रही थी और जो पेशे से डॉक्टर था। थोड़ी देर बाद  दीपक आता है, उसे देखकर विभा की आंखें चमक जाती है और वो उसे ढ़ेरो आशीर्वाद देती है,

तुम तो इस खानदान के असली दीपक हो, तुमने तो मॉं -पिताजी का नाम रोशन कर दिया है, तुम एक दिन बहुत ऊंचे जाओगे, तभी कमल फिर से आ जाता है, छोटे तू भी शर्बत पी ले गर्मी लग रही होगी।

मंझले भैया आप बस जीवन भर सबको शर्बत ही पिलाते रहना और इसी में आपकी ज़िन्दगी कट जायेगी, और दोनों भाई-बहन उस पर हंसने लगे।

कमल ने कुछ नहीं कहा, वो अपने से छोटे भाई की शादी की तैयारियां में व्यस्त हो रहा था, अभी कितने सारे काम बाकी है, सब काम का भार उस पर ही है, सबसे बड़े राकेश भैया इंजीनियर हैं जो सुबह से कमरे में बंद होकर जरूरी मीटिंग कर रहे हैं और उन्हें कमरे में ही चाय, नाश्ता और खाना पकड़ाने की जिम्मेदारी कमल पर ही है, वही उनकी पत्नी शीला सुबह पार्लर जाकर आई है

और अब मेंहदी लगवा रही है, वो भी कमल को दौड़ा रही है, कभी लहंगा प्रेस वाले के यहां से लाना है तो कभी गजरा लाना है ताकि वो शाम को  महिला संगीत में अच्छे से तैयार हो सकें, वैसे  मेंहदी की रस्म कल हो गई थी,पर शीला आज सुबह ही मायके से वापस आई थी, कहने को ससुराल शादी में आई थी, पर वो आते ही मायके चली गई, ससुराल के काम काज से उसे कोई लेना-देना नहीं था।

विभा भी कॉलेज में प्रोफेसर हैं तो उसके यहां परीक्षाएं चल रही थी, बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी लेकर आई थी, वैसे भी शादियां आजकल दो दिन की ही होती है ये तो पहले का जमाना था, जब बहन बेटियां पन्द्रह दिन पहले शादियों में आती थी।

रात को संगीत के लिए सब तैयार हो गये, कमल ने भी नये कपड़े पहन लिये, अरे! कमल मेरी नई चप्पल टूट गई है और अब मैं फंक्शन में कैसे जाऊंगी? तू पहले इसे ठीक करवाकर ले आ विभा ने कमल को चप्पल देते हुए कहा, अभी रात को मोची कहां मिलेगा?

 ये कमल सोच ही रहा था फिर दिमाग लगाया, वो मोची तो स्टेशन की पटरी के उस पार बनी झोपड़ी में रहता है, कई बार उसे वहीं से आते-जाते देखा है, तो वो बाइक लेकर वही चला गया और चप्पल ठीक करवाकर ले आया।

महिला संगीत में पहुंचा ही था कि राकेश ने कहा तुझे तेरी भाभी बुला रही है।

वो उनके पास दौड़कर गया, तो वो बोली ये मेरी चचेरी बहन है, इसका बच्चा छोटा है ये खाना नहीं खा पा रही है, तुम इसके बच्चे को संभाल लो ताकि ये शादी में अच्छे से मजे कर पायें।

कमल ने बड़ी देर तक उसे संभाला, तभी वहां दो महिलाएं जो पड़ोसन थी वो मजाक करने लगी, कमल तेरी शादी तो हुई नहीं और बच्चा भी हो गया, और हंसने लगी, कमल झेंप गया।

बेचारा सब भाई-बहनों में कम पढ़ा-लिखा है और काम धंधा भी खास नहीं करता है, भाई बहन के पीछे नौकर बनकर घूमता रहता है, जाने इसकी कब शादी होगी?  इससे छोटे भाई की भी कल शादी हो जायेगी।

दुलारी भाभी का नालायक बेटा घर पर ही पड़ा रहता है, जैसे नौकर हो, उन सभी की बातें दुलारी जी आते वक्त सुन लेती है, उन्हें अपने मंझले बेटे पर दया आती है और वो ज्यादा पढ़ा-लिखा भी नहीं है, बस इसीलिए वो चिंतित रहती है, उनके चार बच्चे हैं, कमल को छोड़ बाकी सब अच्छे से पढ़-लिखकर कमा रहे हैं, सबकी शादियां भी हो गई है और दीपक की भी हो जायेगी।

सबके घर परिवार बस रहे हैं और कमल की अभी नौकरी और धंधे का भी पता नहीं है, कमल यूं तो घर के सभी काम दौड़कर कर लेता था पर वो ऐसा कोई काम नहीं करता था, जिससे वो कमा सकें। सभी भाई -बहन उसे टोकते रहते थे, ताना देते रहते थे ये दुलारी जी को सहन नहीं होता था, वो मन ही मन कुढ़ती रहती थी, सोचती थी इसका ब्याह करवा दे पर इस बेकार और बेरोजगार को कौन अपनी बेटी देगा?

दुलारी जी के पति भी ये कहते -कहते इस दुनिया से चले गए पर कमल कभी किसी काम धंधे में लग नहीं पाया और अब वो और दुलारी जी घर में रहते हैं और वो पति की पेंशन से अपना और कमल का पेट पालती है। अब सब भाई-बहन को कमल अखरने लगा था।

वो उसे ताना देते रहते थे कि कब तक बैठकर खायेगा? कब कमायेगा और जीवन में कुछ करेगा?

सब अपने जीवन में बस गये थे, दीपक भी शादी करके अपनी पत्नी संग शहर चला गया था और गांव के उस बड़े से घर में कोई आना नहीं चाहता था।

 राकेश और विभा की भी अपनी ही दुनिया थी।

विभा जीजी, इस बार राखी पर गांव आ जाइयें, बड़े महीनों से आपसे मिलने का मन कर रहा है, पर विभा नहीं जाती है क्योंकि उसे पता था मंझला भाई कुछ कमाता तो है नहीं तो राखी पर ज्यादा कुछ नहीं दे पायेगा और वो दोनों भाईयों के पास चली जाती है ।

 जो वहीं शहर में रहते हैं, वो वहां अचानक से जाती है पर देखती है दोनों के घरों में ताला लगा हुआ है, फोन करने पर मालूम हुआ कि दोनों भाई परिवार सहित घूमने गये थे, लंबी छुट्टियां पड़ रही थी, तो उन्होंने कार्यक्रम बना लिया, वो जिन भाइयों पर जान देती थी, उनकी पढ़ाई का विभा को भी घमंड़ था वो ही भाई राखी को भुल गये और कमल ने चार दिन पहले फोन कर दिया, विभा तुरन्त बस पकड़कर गांव चली गई।

 आज उसे कमल गंवारू नहीं लग रहा था क्योंकि वो उसके आगे-पीछे हो रहा था, उसने विभा से राखी बंधवाई और उसे एक कुर्ती दी , जिसे देखकर उसे आश्चर्य हुआ, जीजी आप ऐसे ही कपड़े पहनते हो तो आपके लिए शहर गया था तब लाया था, कुर्ती साधारण थी, पर आज विभा को वो भी बहुत कीमती लग रही थी।

आज कमल का प्यार और मासूमियत उ्से गंवार नहीं लग रही थी, आज उसकी बातों और हंसी में उसे अपनेपन का अहसास हो रहा था। दुलारी जी भी अपने बेटे के प्रति बेटी का व्यवहार देखकर बहुत खुश हो रही थी और उन्होंने उसके लिए लड़की तलाशने को कहा, तभी खबर आई कि गांव में पंडित जी की अचानक मृत्यु हो गई है तो उनकी बेटी लक्ष्मी अकेली रह गई हैं।

दुलारी जी वहां गई, सारे क्रियाकर्म होने के बाद उन्होंने लक्ष्मी को अपने कमल के लिए पत्नी  चुन लिया, दोनों बेटों को खबर पहुंचा दी पर वो नहीं आयें फिर मंदिर में ही उनके फेरे करवा दिए। विभा खुश हो रही थी आखिर उसके भाई का भी घर बस गया।

दो-चार दिन बाद लक्ष्मी ने कमल से कहा, हमारी शादी अचानक से हो गई थी, तो मैं आपके बारे में ज्यादा जान नहीं पाई, आप काम क्या करते हैं? ये सुनकर कमल सकपका गया और बोल नहीं पाया।

तब दुलारी जी ने सारी बातें बताई तो लक्ष्मी  को अपने पति के गुणों को सुनकर अच्छा लगा, पर उसने ये भी समझाया कि पति चाहें कितना भी कमाकर लायें, पत्नी को उसमें खुशी होती है, ससुराल वालों की कमाई के पकवानों से पत्नी को पति की कमाई से बनाई गई दो रोटी भी अच्छी लगती है, उन्हें खाकर वो गर्व महसूस करती है।

अपनी पत्नी की बातें सुनकर कमल को महसूस हुआ कि उसे भी अब कमाना चाहिएं, तो उसने जगह-जगह काम मांगना शुरू किया पर कहीं भी उसे काम नहीं मिला, फिर पत्नी ने सलाह दी और  कुछ जेवर और पैसे उसको मिले थे और उसका घर जहां वो अपने पिताजी के साथ रहती थी वो भी खाली पड़ा था, जो आगे-पीछे उसका ही था, उसने वहां एक राशन की दुकान खोल ली।

अब राशन की दुकान चलने लगी और लक्ष्मी भी कमल के साथ ही वहां काम करने लगी, अब अच्छी कमाई होने लगी, दोनों भाइयों ने सुना तो वो भी गांव आ गये,और साथ में विभा भी आ गई थी। भाई की इतनी खुशहाली देखकर उन्हें भी अचरज हुआ, लक्ष्मी सिर्फ नाम की ही लक्ष्मी नहीं थी, उसके आने से घर में सुख समृद्धि भी आ गई थी।

उसने दोनों भाईयों के परिवार का  और विभा का अच्छे से स्वागत किया और खाना बनाया, दुलारी जी अपनी बहू के गुणगान करते थक नहीं रही थी।

दोनों भाई किसी ओर काम से भी आये थे, पहले तो उन्हें लगता था कि कमल की शादी नहीं होगी, तो मॉं के जाने के बाद हम घर का आपस में बंटवारा कर लेंगे पर अब कमल का घर भी बस गया था तो उन्हें डर था कि वो घर अब अकेला कमल हथिया लेगा क्योंकि वो वही पर रहता है।

एक दिन सब बैठे थे तो उन्होंने दुलारी जी से कहा, मॉं इतना बड़ा घर है और आप तीन लोग ही हो, पहले तो हम सब मिलकर इस घर में रहते थे, पर अब ये बड़ा सा घर खाली पड़ा है, हम इसका बंटवारा कर लेते हैं ताकि सबको अपना हिस्सा मिल जायेगा, कमल को तो घर की जरूरत नहीं है क्योंकि उसके ससुर जी उसके लिए घर छोड़ गये है तो ये घर हम दोनों भाईयों में बांट दीजिए।

दुलारी जी और विभा ये सुनकर हैरान रह जाते हैं और उन्हें राकेश और दीपक से ऐसी उम्मीद भी नहीं थी, वो सीधे-सीधे भाई का हिस्सा हजम कर रहे थे, ये सुनकर कमल शांति से बोलता है, ठीक है आप घर का बंटवारा कर दीजिए पर दो नहीं तीन हिस्से होंगे।

दोनों भाई सकते में आ जाते हैं आखिर कमल ने अपना हिस्सा भी मांग लिया।

तीन हिस्से क्यूं? तुझे तो अपने ससुर जी का घर मिल गया है, पर तेरी भूख खत्म नहीं हो रही है, राकेश ने चिल्लाकर कहा।

मैं विभा जीजी की बात कर रहा हूं, उन्हें भी जायदाद और घर में हिस्सा मिलना चाहिए, मैं ज्यादा पढ़ा लिखा तो नहीं हूं, पर इतना कानून तो जानता हूं कि आजकल बेटियों का भी बराबर का हिस्सा होता है, आप मुझे बंटवारे में से एक रूपया मत दीजिए पर जीजी को उनके हक का हिस्सा मिलना चाहिए और मॉं को मैं अपने पास रखूंगा, मॉं मेरे हिस्से में ही आयेगी, मुझे मॉं के बिना रहने की आदत नहीं है, उनका प्यार उनकी डांट की लत जो पड़ चुकी है, मैं मॉं की दिल से सेवा करूंगा।

कमल के मुंह से ये बात सुनकर विभा की आंखें भर आती है, उसे अपराध बोध होने लगता है कि आखिर वो जिस भाई को कुछ नहीं समझती थी, वो ही उसकी चिंता कर रहा है, मॉं का इतना ख्याल रख रहा है, दोनों भाईयों का भी चेहरा लटक जाता है।

उनके पास एक शब्द कहने को नहीं होता है, वो जिस भाई का हक छीन रहे थे, वो भाई तो खुद अपना हक बहन को देने को तैयार हैं। दोनों को अपराध बोध

होता है कि आखिर वो क्या अनर्थ करने जा रहे थे।

राकेश  रूंधते गले से बोला, कमल तू तो मुझसे भी बड़ा ज्ञानी निकला, मुझे अपनी पढ़ाई -लिखाई पर घमंड था पर मुझमें लालच आ गया, पर तू तो सबको प्रेम और भाईचारे का पाठ पढ़ा रहा है, जीवन में किताबी ज्ञान से ज्यादा व्यवहारिक ज्ञान ज्यादा जरूरी है और तू तो इसमें माहिर निकला, हम जायदाद को लेकर लड़ रहे हैं , हमने मॉं का जरा भी ख्याल नहीं किया बस अपनी ही सोचते रहें।

तभी दीपक भी आंसू बहाते हुए बोला, मैंने कभी आपका सम्मान नहीं किया, आप मुझसे बड़े हैं पर आप पढ़ लिख नहीं पायें तो मैं भी आपको गंवार समझता रहा, डॉक्टर हूं इतना कमाता हूं, फिर भी लालच आ गया, आपका हक भी मारने चला था।

मुझे माफ कर दीजिए, आपके पास तो कुछ भी नहीं है और ये घर भी हम आपसे छीनने चले थे। दोनों भाई कमल के गले लगकर रोने लगे, विभा के भी आंसू बहते जा रहे थे।

भाई,  मुझे भी माफ कर दें, मैंने हमेशा तीनों भाइयों के बीच भेदभाव किया है, मैंने इनकी पढाई और पैसे की कदर की पर तेरे प्यार और अपनेपन की हमेशा हंसी उड़ाई, पर तू तो सबसे ज्यादा पढ़ा-लिखा है, तू तो सबका दिल पढ़ लेता है, भावनाएं पढ़ लेता है, मॉं की ममता को पढ़ लेता है, तुझमें तो पिताजी के सारे गुण है, आज तूने अपनेपन से पूरे परिवार को एक कर दिया है, इस घर में तू ही रहेगा, हमें किसी को कुछ नहीं चाहिए, हम सब तेरा प्यार और अपनापन पाने के लिए यहां इस घर में आते रहेंगे, दोनों भाइयों ने भी हामी भरी। दुलारी जी अपने बिखरते परिवार को फिर से एक देखकर बहुत खुश थी।

धन्यवाद

लेखिका

अर्चना खण्डेलवाल ✍️

#अपराध बोध

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