चारु का बचपन बहुत ही खुशहाल था।पिताजी प्रणय बिजली विभाग में थे तो मां विनीता प्राध्यापिका घर में दादी शीला और 2 भाई बहन शिक्षा और विकास ।मां सुबह 8:00 बजे जाती और 1 बजे घर ।चारु कॉलेज के फाइनल ईयर में थी।बहन 12 वीं में और भाई 10 वी में था ।
विनीता के स्कूल में उसकी एक सहेली थी वंदना उसने उससे एक दिन बातों बातों में कहा अरे कोई अच्छी लड़की हो तो बताना ।विनीता बोली किसके लिए तेरे बेटे की तो उमर नहीं है अभी और बेटी की शादी कर चुकी हो तुम।अरे मेरे लिए नहीं मेरी ननद का देवर है खाते पीते लोग है
दुकानें है लड़का बाप का कारोबार संभालता है इतना हैंडसम है दो बहने है अपने घर की हो चुकी है।मां बाप और लड़का घर में नौकर चाकर सब बढ़िया है बेटी राज़ करेगी कोई हो तो बताना जरूर विनीता बोली।वंदना की बात वनिता के दिल में घर कर गई दूसरी क्यों अपनी चारू है ना इसी का रिश्ता कर देते हैं
उस घर में शाम को जब प्रणय ऑफिस से आये तो विनीता ने अपने दिल की बात उनसे और सास शीला से की शीला खुश थी पर प्रणय बोले अभी वो पढ़ रही है उसे कुछ बन लेने दो उसके बाद सोचेंगे अरे इतना अच्छा रिश्ता है फिर कहा मिलेगा एक बार मिल लेते है
समझ आया तो ठीक नहीं तो ना सही।प्रणय बिल्कुल नहीं चाहते थे पर मां और बीवी के दबाव में तैयार हो गए।वंदना अगले रविवार सबको ले कर आई ।लड़के का नाम विवान था बहुत हैंडसम जो देखे पलक झपकाना भूल जाए उन लोगों को रिश्ता पसंद आया।लड़के वाले बोले रिश्ता तय कर शादी की तारीख निकाली प्रणय बोले बेटा पहले ये अपने एग्जाम देगी फिर शादी करेंगे।
विवान पहली बार बोला इतना पैसा है घर में इसे कौन सी नौकरी करनी है।नौकरी तो जरूरत मंद लोग करते हैं हमारे यहां कोई कमी नहीं है। प्रणय बोले पढ़ाई लिखाई अपने काम आती हैं किसी और के नहीं इसलिए शादी 6 महीने बाद रखी गई।प्रणय चाहते थे कि चारु मास्टर्स करे पर चारु पर भी उस समय विवान के ख्यालो में खोई हुई थी
बस ग्रैजुएशन के एग्जाम दे वो शादी की तैयारी में लग गई।जिसने भी दूल्हे को देखा वो उसकी किस्मत पर रश्क कर रहा था इसी कारण चारु सातवे आसमान पर थी।पर शायद चारु का खुश होने का ये आखिरी दिन था ।शादी हो कर ससुराल आने पर चारु रात भर विवान का इंतजार करती रही पर वो नहीं आया
सुबह वो आया तो उसने पूछा आप कहा थे रात भर मै आपका इंतजार कर रही थी।हमारा कोई स्टैंडर्ड है गवार नहीं है फ्रेंड्स के साथ था।विवान सो गया सुबह उसने बाहर आ कर देखा घर में शांति थी कोई आवाज़ नहीं बिल्कुल सुनसान जैसे कोई रहता ही नहीं है वो हॉल में आकर बैठ गई फिर कुछ देर में उसे नौकरानी दिखाई दी वो उसी से बोली पानी मिलेगा
हांजी अभी लाई वो चाय पानी दोनो लेकर आई। चारु ने पूछा घर में कोई नहीं है क्या? घर में तो कोई होता ही नहीं है जी साहब और विवान बाबा क्यों उनकी मम्मी और बहनें ।मम्मी कौन मम्मी अच्छा वो माया मैडम उनकी और साहब की अलहदगी हो गई है वो अलग रहती है अभी कागज पर पति पत्नी है इसलिए कभी कभी बच्चों के लिए आ जाती हैं।
विवान बाबा अपना देखते है और साहब अपना ।और दीदी कहा गई बड़ी दीदी अपने ससुराल गई है और छोटी भी थोड़ी देर में सब आजाएगी ।आप तैयार हो जाइए अरे दीदी एक बात आप माया मैडम या किसी को ये बात मत बताना कि मैने आपको साहब और मेमसाब की अलहदगी के बारे में बताया है।
चारु अपने कमरे में आई कपड़े निकाल कर वो नहाने चली गई।नहा कर वो बाहर आई तैयार हुई तो उसकी ननद ने दरवाजे पर नोक किया अरे रेडी हो गई आप चलो लंच करे सब इंतजार कर रहे हैं।विवान उठो देखो बाहर चलो।चारु ने बाहर आ कर देखा सब नॉर्मल बिहेव कर रहे थे जैसे एक परिवार होता है सिर्फ विवान थोड़ा अकड़ा हुआ लग रहा था
वो हर बात में जता रहा था कि उनका स्टैंडर्ड हाई है और चारु का कम ।आखिर चारु को परेशान देख उसकी ननद प्रिया ने पूछा क्या हुआ कुछ नहीं दीदी ऐसे ही नहीं बताओ चेहरे से परेशान लग रही हो।विवान की बातों का बुरा मत मानना वो ऐसा ही है मजाक करने वाला।नहीं दीदी वो सुबह मुझे घर में कोई नहीं दिखा प्यास लगी तो बाहर आई तब एक नौकरानी आई थी वो बोल रही थी कि आंटी और अंकल अलग हो चुके हैं।सब अपना अपना देखते है।
प्रिया बोली किसी ने मजाक किया होगा कौन सी लड़की है दिखाओ मुझे अभी दिखाई दी क्या।नहीं मैने चाय पीने के बाद उसे नहीं देखा । ऐसे किसी की बातों पर भरोसा नहीं करते लोग झूठ बोलते है।समझी अपने घर में ऐसी वैसी कोई बात मत करना।
चारु बोली ठीक है दीदी फिर सब ठीक ही रहा चारु और विवान घूमने गए वहां चारु ने शॉपिंग की बात की । विवान बोला मेरे पास पैसे नहीं है।तुम्हे जो करना है करो वो सारा दिन फोन पर लगा रहता।सारी शॉपिंग चारु ने अपने पैसों से की जो शादी में आये थे और उसके पापा ने दिये थे
और सबको देते वक्त विवान ने ये दिखाया कि सबके लिए वो ही सामान खरीद कर लाया है। सब मेहमान चले गए बड़ी ननद अमेरिका छोटी देहरादून ।माया अपने घर और परिवार में विवान ,चारु और उसके पिता विवान कोई काम नहीं करता था कभी कोई काम शुरू किया तो चार दिन गया
फिर घर में सारा दिन फोन पर होता।कभी दरवाजे पर कोई मांगने वाला कभी कोई ।चारु ने यह बात अपने घर बताई कि उसकी सास ससुर अलग रहते है विवान कोई काम नहीं करता तकाजे वाले सिर पर रहते हैं।प्रणय ने विवान से और उसके पिता से बात की वो बोले जी हमारा तलाक थोड़ी हुआ है।
दोनो अपनी पसंद से रहते हैं बच्चों को जरूरत होती हैं तो साथ आ जाते है। रही काम की बात तो इतनी दुकानें है उनका किराया आता है तो काम करने की क्या जरूरत ।और तकजेदारो का क्या जी कोई नहीं है बेटी को गलतफहमी हुई है।इतना कारोबार है उधारी तो चलती हैं। प्रणय समझ चुके थे
कि बेटी के साथ धोखा हुआ है उन्होंने चारु को कहा तुम मास्टर्स करो और अपने पैरों पर खड़ी हो मैं तुम्हे तलाक दिलवा दूसरी शादी करवाऊंगा।नहीं पापा मै तलाक नहीं लूंगी आपके और भाई बहनों के लिए और मुसीबत नहीं खड़ी कर सकती जो मेरी किस्मत ।
समय बीता चारु कॉलेज में लग गई बच्चे हो गए पर वो आदमी नहीं सुधरा सब बिक गया सिर्फ घर रह गया था।चारु जो कमाती घर बच्चों राशन बिल और विवान के खर्चों में चला जाता।एक बार उसकी बहन के घर में फंक्शन था सब अच्छे से तैयार हुए गहने कपड़े चारु बिल्कुल सिम्पल थी
सिर्फ गले में पतली सी चेन थी बच्चे भी सादा कपड़ों में बहन बोली दी कैसे आई हो कुछ तो मुझे देखो भाभी को देखो ।मेरी ऐसी किस्मत कहा जो मैं ये सब करूँ मै इसलिए आना नहीं चाहती थी। शिक्षा बोली सॉरी दीदी मै आपका दिल दुख। ना नहीं चाहती थीं आओ सबको देख चारु को लग रहा था
कहा वो इतनी खूबसूरत थी अच्छी थी पर इस आदमी ने उसकी जिंदगी क्या कर दी।उसे अपने बच्चों के बारे मे तो सोचना ही होगा।तभी उसका भाई विकास उसके पास आया बोला दीदी लखनऊ में कॉलेज प्रोफेसर की नौकरी निकली है आप वहां अप्लाई कर दो मेरी जान पहचान है दीदी निकल जाओ यहां से जीजाजी नहीं सुधरेंगे
कल मेरे बैंक आये थे उधार मांगने नहीं दिया तो गलिया देने लगे और एक दो बार मैने उन्हें किसी औरत के साथ भी देखा है पीते है आपको मारते है घर आप चलाती हो और उनकी दादा गिरी सहती हो दी बच्चों के भविष्य के लिए चली जाओ। चारु ने इंटरव्यू दिया और उसका सिलेक्शन हो गया 15 दिन थे ज्वाइन होने में।चारु बच्चों को नानी के यहां छोड़ घर आई
तो देखा विवान घर में है बेडरूम की तरफ बढ़ी तो अंदर से आवाज़ आ रही थी।चारु शॉक में हॉल में बैठ गई आधे घंटे बाद दरवाजा खुला एक औरत बाहर आई और पीछे पीछे विवान।ये कौन है चारु बोली ये मेरी बीवी तुम जैसी घटिया औरत के साथ कौन रह सकता है ये मेरे स्टैंडर्ड की है
अब ये यही रहेगी अपना कूड़ा उठाओ और अपनी औलादो के कमरे में जाओ। चारु अपने कमरे में गई अपना बच्चों का सामान पैक किया और निकल गई।सबको मना कर के गई कि कभी उसका पता विवान को ना दे। तलाक का नोटिस दे कर चारु चली गई।
विवान के खर्चे पूरे नहीं हो रहे थे उसकी नई पत्नी भी ऐश पूरी ना होने पर छोड़ कर चली गई।उधर लखनऊ में चारु ने नई जिंदगी शुरू की और बच्चों को पढ़ाया लिखाया आज बच्चे अच्छी नौकरी पर थे मां का सम्मान करते थे।विवान का घर भी बिक गया था एक छोटे से कमरे में रहता शराब पीता अय्याशी करता उधारी करता उसने चारु का पता करने की बहुत
कोशिश की पर वो उसे नहीं मिला और एक सुबह वो अपने कमरे में मरा पड़ा मिला किसी ने कहा उधार वालो ने मार दिया किसी ने कहा पी कर मर गया।विकास ने कफ़न दफ़न का पैसा दे कर सब समेटा और उधारी भी चुका दी।क्योंकि वो नहीं चाहता था कि कभी भी भविष्य में इस आदमी के किसी गुनाह का साया भी उसकी बहन या उसके बच्चों पर ना पड़े।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी