नवीन वर्ष की शुभ कामनाएं उम्मीद करती हूं कि इस वर्ष भी आप सभी मेरी कहानियों को प्रेम देंगे और कोई त्रुटि हो तो क्षमा करेंगे।
किशोरी लाल तीन भाइयों का इकलौता भाई था।मां शमा और पिता गुलज़ारी लाल ऐसा परिवार था।गुलज़ारी लाल की परचून की दुकान थी और किशोरी भी बाप की दुकान ही संभालता था बहनों को उनके घर का कर मां ने किशोरी के लिए भी लड़की देखी।मीना नाम की लड़की को पसंद किया गया और उनकी शादी हो गई।पहले साल में एक बेटी अदिति दूसरे साल में रीना और फिर तीसरी भी बेटी हुई नीला जिसके जनम की खबर से शमा उखड़ गई बोली हम नहीं लाएंगे इस मनहूस को पड़ा रहने दे इसे मायके में लड़की दे दे अनाथ आलय में तीन साल से हर बार मेरे बच्चे पर बोझ डाल रही हैं।सच में ६ महीने किशोरी मीना को लेने ना गया ।मीना रोज हल्कन होती कि अगर मुझे छोड़ दिया तो तीन लड़कियों के साथ मै कहा जाऊंगी।
दुख में वो कमजोर हो रही थी।६ महीने बाद अचानक सुबह दरवाजा बजा तो किशोरी खड़ा था।किशोरी को देख घरवाले खुश हो गए।सास ससुर भाई भाभी सब आवभगत में लग गए।किशोरी मीना के पास आ बोला तेरे बिना ना रह पाऊंगा इसलिए आया पर अम्मा ने तीसरी बेटी लाने से मना कर दी है।मीना बोली ऐसा ना कहो अपनी बच्ची है ।बच्ची की नीली नीली आंखे देख किशोरी ने उसे गोद में उठा लिया।तभी मीना की भाभी जया आई बोली भाईजी ये लड़की बाप के लिए बड़ी किस्मत वाली है।ऐसा हमारे गुरुजी बोले है ये दस साल की होगी तो आपका काया पलट कर देगी।नीला नाम रखा है इसका सबके समझाने पर और खुद गुरुजी से मिलने पर किशोरी जरा सहमत हुआ और मीना और तीनों बेटियों सहित घर आ गया।घर आते ही शमा ने शोर मचा दिया क्यों ले आया ये मनहूस पोटली को दे आता किसी को ।
मां मेरी बात तो सुनो फिर किशोरी ने गुरुजी वाली बात दोहरा दी अरे कुछ ना होता लड़की चिपकाने के लिए बोल दिया होगा ।शमा ने कभी नीला को गोद नहीं लिया पर जो आता वो उसे प्यार करता वो इतनी सुंदर थी नीली नीली आंखे साल बीते बच्चे बड़े होने लगे स्कूल जाने लगे खर्चे बढ़ रहे थे।बीच बाजार एक मकान और दुकान थी जिस पर केस चल रहा था । गुलज़ारी लाल के चचेरे भाई ने केस किया हुआ था।15 साल हो गए थे कोर्ट कचहरी करते इस बार की हियरिंग में था कि हम केस हार जाएंगे ।क्योंकि चचेरा भाई थोड़ा मोटी आसामी था पर दुकान के कागद पत्र सब गुलज़ारी के पिता के नाम पर थे।
आज नीला 10 बरस की हो रही थी और आज कोर्ट की तारीख थी सुबह से घर में गहमा गहमी थी सास शमा का मुंह का पटटा शुरू था तीन बोझ इतनी सी ये दुकान केस में इतना पैसा लग रहा है हार जाओगे जी ना ही जाओ।नहीं देखते हैं आज आखिरी पेशी है दोनो बाप बेटा कचहरी गए।शमा दुकान पर बैठी मीना ने घर का काम निपटा बच्चियों को स्कूल भेज दिया।नीला बोली भी मां आज मेरा जन्म दिन है ना।हा बेटा पर अभी तू जा शाम को तेरे लिए हलवा बनाउगी ।नीला चली गई 4 बजे गली में बड़ा शोर था किशोरी मिठाई ले कर आया बोला मां हम केस जीत गए मीना बोली जानते हो आज क्या है।क्या है शमा बोली नीला का दसवां जन्म दिन मीना ने जवाब दिया।किशोरी अंदर आया आज उसने नीला को पहली बार प्यार किया और लड्डू खिलाया ।
कुछ समय में वो बड़े घर और दुकान में शिफ्ट हो गए।दिन फिर गए उनके घर में लक्ष्मी पानी भरने लगी।लड़कियां बड़ी हो गई बड़ी बेटी अदिति की शादी जोधपुर में हुई उसके पति महेश फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में थे।उससे छोटी के लिए लड़का देखा जो दिल्ली में किसी कंपनी में लगा था पर वो मांगलिक निकला और अपनी नीला भी मांगलिक थी तो सबके सलाह मशवरे पर नीला का विवाह पक्का हो गया।लड़का अभी अभी नौकरी पर लगा था सिर्फ एक कमरे का घर था पर लड़का सुशील होने के कारण किशोरी चाहता था ये रिश्ता हो जाए फिर नीला को भी नलिन पसंद आया और रिश्ता हो गया।
नीला शादी हो कर आई और यहां के दिन पलटने लगे दो साल में नीला और नलिन ने अपना खुद का बड़ा घर खरीद लिया।नलिन को और बड़ी कंपनी में नौकरी लग गई जो मिलता वो नलिन की मां को कहता तेरी बहु किस्मत वाली है तुम्हे फर्श से अर्श पर पहुंचा दिया कहा तुम दूसरों से उधार ले कर अपनी जिंदगी चलते थे आज कहा इतना अच्छा घर सब सुख सुविधा।नलिन की मां तो कुछ नहीं बोलती थी पर नलिन और उसके पापा रामनाथ हमेशा यही बात कहते थे बड़ी किस्मत वाली बहु मिली है हमे ।उधर नीला की शादी होते ही मायके से लक्ष्मी रूठ गई किशोरी की दुकान में आग लग गई और उस पर करोड़ों का कर्ज हो गया वो चुकाने के लिए घर बेचना पड़ा और जो थोड़ा बहुत पैसा बचा उससे उन्होंने रीना की शादी पक्की कर दी अब वो फिर अपने पुराने घर में आ गए थे और वही दुकान कर ली।
बाजार की दुकान बेच और इंश्योरेंस का पैसा मिलने से कर्जा चूक गया।नीला ने अपने पिता को कहा भी आपको हमे बताना चाहिए था और उसने रीना की शादी में सहायता भी की।समय गुजरा किशोरी के माता पिता का देहांत पहले ही हो गया था।एक दिन मीना सोई तो वो भी ना उठी घर का नौकर और उसकी पत्नी सब सामान उठा कर ले जाने लगे।इसी बीच किशोरी की तबियत खराब रहने लगी बड़ा दामाद आया वहां का सब बिकवा किशोरी को जोधपुर ले आया।
सब पैसा अपने पास रख कर वो किशोरी का ध्यान नहीं रखते फिर कुछ समय बाद उसे वृद्धाश्रम में भर्ती कर दिया जहां किशोरी नहीं रहना चाहता था।किशोरी ने बेटी अदिति से कहा मैं कुछ दिन रीना के घर जाना चाहता हूं उसके सास ससुर भी दूर रहते हैं।अदिति भी देख रही थी कि उसके पिता की अवस्था यहां अच्छी नहीं है उसने कुछ पैसे छुपा कर किशोरी की दिए और किशोरी रीना के पास आ गया।शुरू में तो दामाद हितेश बड़ा स्नेह करता पर जब उसे पता चला कि किशोरी के पास फूटी कौड़ी नहीं है तो उसका व्यवहार बदल गया।किशोरी भी अपनी जरूरतों के लिए रीना से पैसा मांगता। रीना ने अदिति से बात की और बोली इन्हें दिल्ली रवाना कर दो नीला के पास।
नीला का पति नलिन खुद गाड़ी ले कर किशोरी को लेने आया ।नीला ने एक कमरा किशोरी के लिए तैयार करवा दिया था उसे डॉक्टर को दिखाया सेवियर डायबिटीज़ थी और हार्ट इश्यूज वहां किशोरी का इलाज हुआ तभी किशोरी के अकाउंट में उसकी पॉलिसी के 12 लाख रुपए आने वाले है।ये बात पहले बड़े दामाद को पता चली उसने छोटे वाले को फोन किया और पूछा पिता जी कहा है उसने कहा अरे वो पैसे मांगते थे फिर कुछ बीमार हुए तो मैने तो उन्हें दिल्ली भेज दिया कंगालों को कौन संभाले।अरे यार तुमने ये क्या किया? क्यों क्या हुआ रीना का पति निखिल बोला अरे बुड्ढे की १२ लाख की इंश्योरेंस पॉलिसी मैच्योर हुई है १२ लाख मिलेंगे अब वो तीसरे को भी हिस्सा देना पड़ेगा।
चल ३ महीने बाद पैसे आने है उससे पहले हम चल कर उन्हें ले आते हैं बाद का बाद में देखेंगे ये बात रीना और अदिति को ना बताना।अगले हफ्ते वो चारों दिल्ली पहुंच गए।इन्होंने देखा कि किशोरी लाल की हालत मे बहुत सुधार है।किशोरी लाल ने उन्हें देखा तो पूछा यहां अचानक कैसे? नीला बोली अरे। पापा दीदी जीजाजी कितने सालों बाद आए हैं।बड़े जीजाजी तो तभी आए थे जब मेरा एक कमरे का घर था छोटे जीजाजी तो आए ही आज पहली बार है।नीला ने उनकी खुप आवभगत कि महेश नलिन से बोला तुमने बहुत तरक्की कर ली घर भी बहुत शानदार है।
नलिन बोला जी सब कुछ मेरी लक्ष्मी की वजह से है उसकी सोच के कारण और मेरा साथ देने की वजह से आज हम यहां है और मेरे अनमोल तोहफे सारा और नायरा भी तो मुझे नीला ने ही दिए।आप लोग पापा से मिलने आए हैं नहीं उन्हें ले जाने महेश बोला ।कहा नीला बोली पापा का यहां ट्रीटमेंट चल रहा है अब उनकी तबीयत में काफी सुधार है शुगर इतनी बढ़ गई थी कि गागरिन हो गया था प्लीज़ उन्हें यही रहने दे। महेश बोला नहीं मैं और निखिल उनका ध्यान रखेंगे।
अदिति और रीना भी हैरान थी जो एक पल भी किशोरी लाल को घर में नहीं रहने देना चाहते थे आज उन्हें ले जाने के लिए लड़ रहे थे।तभी किशोरी लाल वहां आए बोले बेटा तुम परेशान मत हो तुम्हारे लिए मै तीन महीने तक अमूल्य हूं जब तक १२ लाख नहीं आते मेरा मित्र उसी दफ्तर में है उसी ने तो मेरी पॉलिसी खोली थी उसने मुझे कल सब बता दिया था मेरे अकाउंट में पैसे सीधे आएंगे और तुम्हारे अकाउंट में तुम्हारा हिस्सा पहुंच जाएगा मै अपनी बेटी जो सच में बड़ी किस्मतवाली और दिलवाली है उसी के पास रहूंगा।पापा नीला किशोरी के गले लग गई और बोली मुझे बस आप चाहिए और कुछ नहीं। देखो कुछ सीखो इनसे वो चारों शर्मिंदा हो कर निकल गए और आज किशोरी अपनी पत्नी मीना को याद कर रहे थे सच में तेरी बेटी किस्मतवाली थी मुझे तब भी भंवर से निकाला था और आज भी मुझे सम्मान पूर्वक जीवन दे रही है।उसने साफ कह दिया ये पैसा आपका है इसका कोई भागीदार नहीं है आप इसे अपनी इच्छा से खर्च कीजिए और यही बात उसने अपनी बहनों से भी कही कि पिताजी का सम्मान हमारा सम्मान है उन्हें मरते दम तक सिर उठा कर जीने दे।
उधर नलिन भी यही सोच रहा था कि मेरे एक कमरे के घर और आज इस महल जैसे घर का सफर मैने तय किया सिर्फ और सिर्फ नीला के कारण उसने गरीबी में भी मेरा साथ दिया ट्यूशन पढ़ा कर कभी मायके वालो से एक पैसा नहीं मांगा हमेशा मुझे सम्मान दिया प्यार दिया वो सच में मेरी किस्मत है और बड़ी ही किस्मत वाली है।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी