खूबसूरत मन – लतिका श्रीवास्तव 

चंदा तुम अकेली यहां क्यों बैठी हो बाकी सब घूमने गई हैं तुम क्यों नहीं गईं विशाखा ने कमरे में अकेली बैठी लड़की को देख कर आश्चर्य से पूछा तो चंदा ने सिर  नीचे रखी पुस्तक में और झुका लिया।

क्या हुआ चंदा मुझसे बताओ विशाखा ने उसके पास बैठते हुए स्नेह से कहा तो चंदा के सिसकने का स्वर सुनाई पड़ने लगा।

कोई मेरे साथ नहीं बैठता सब मुझसे दूर भागते हैं अस्फूट शब्दों में चंदा के दिल की अनकही व्यथा पिघल उठी।

लेकिन क्यों विशाखा ने अचरज जताया।

क्योंकि मैं अच्छी नहीं दिखती।देखिए ना मेरी एक आंख दबी हुई है और दांत बाहर निकले हुए हैं ऊपर से काली भी तो हूं चंदा ने मुंह उठाते हुए कहा तो एक क्षण को विशाखा भी उसका चेहरा देख रुक सी गई।

कॉलेज का हॉस्टल था।विशाखा नई हॉस्टल वार्डन बन कर आई थी।पूरे छात्रावास का निरीक्षण कर रही थी तभी उसे यह लड़की अपने कमरे में अकेली बैठी दिखी।

ये इतनी सारी किताबें कौन पढ़ता है अचानक उसकी नजर स्टडी टेबल के ऊपर बने रैक पर पड़ी जहां ढेरों साहित्यिक किताबें करीने से सजी रखी थीं तो उसने विषयांतर किया।

मैं पढ़ती हूं दीदी ।ये सब मेरी किताबें हैं चंदा के स्वर में अचानक उत्साह आ गया।

क्या तुम्हारा विषय हिंदी साहित्य है विशाखा पूछ बैठी।

नहीं दीदी मै तो गणित की छात्रा हूं ।मुझे किताबें पढ़ने का बहुत शौक है मेरी मां मेरे लिए बचपन से ही हर जन्मदिन पर किताबों का पूरा सेट गिफ्ट करती थीं  चंदा ने हंसकर कहा।

चंदा के बात करने का तरीका इतना मीठा और शालीन था कि विशाखा को उसके साथ बातें करने में समय का पता ही नहीं चला।ढेरों किताबें उसने पढ़ी थी उसकी बातों से जाहिर हो रहा था।

तब तो तुमको किसी और की जरूरत भी नहीं है ये असली दोस्त हैं तो तुम्हारे पास विशाखा ने किताबों की ओर इशारा करते हुए हंसकर कहा तो चंदा भी मुस्कुरा उठी।

अब उसके चेहरे  से उसके मन की खूबसूरती परिलक्षित होने लगी थी विशाखा को ।

विशाखा ने बाकी सभी लड़कियों को समझाने की और चंदा से दोस्ती करवाने की बहुतेरी कोशिश की लेकिन सबने मुंह बिचका दिया।

दीदी हम लोग चंदा को सुधारने की बहुत कोशिश करते हैं लेकिन वह भी तो नहीं मानती एक दिन श्वेता ने जो उसकी रूममेट थी आकर कहा तो विशाखा ने आश्चर्य से पूछा सुधारने की?? क्या सुधारने की??

उसकी शकल और क्या।ये देखिए कितने तरह की क्रीम लाए है उसके लिए।और दांत के डॉक्टर का पता भी लेकिन उसका वही पुराना राग है ईश्वर ने जैसा बना कर भेजा है वही असली है इस पर बनावट का मुलम्मा नहीं चढ़ाऊंगी जो है वही रहने दो दूसरी लड़की साधना ने भी शिकायती अंदाज में कहा।

हम लोग तो पार्लर भी जाते हैं इसमें बुराई क्या है!! देखिए तभी तो इतने सुंदर हैं जहां से निकल जाते हैं लोग देखते रह जाते हैं श्वेता ने आगे बढ़ इतरा कर कहा।

….हां और इसे देख लोग भाग जाते हैं श्वेता ने चंदा की तरफ देखते हुए कटाक्ष किया तो चंदा झट से अपने कमरे में घुस गई।

देखा आपने इसीलिए मै इसके साथ रूम भी शेयर नहीं करना चाहती श्वेता ने बहुत चिढ़ कर कहा इसकी शक्ल मेरी रोज की सुबह खराब कर देती है।दीदी मुझे कोई भी दूसरा रूम दे दीजिए ना मुझे इसके साथ नहीं रहना वह जिद करने लगी।

नहीं श्वेता इस साल तो नहीं हो सकता अगले सत्र में चेंज कर सकती हो अभी कोई भी रूम खाली नहीं है और अभी एग्जाम का समय है तुम जाकर पढ़ाई करो दो दिनों बाद पेपर है कहां जा रही हो इस समय ।जाओ अपने कमरे में कहती विशाखा अपने कमरे में चली गई।वह कुछ चिंतित हो गई थी।

श्वेता पैर पटकती बाहर चली गई।उसे एक जन्मदिन पार्टी में जाना था इसलिए वह पार्लर जा रही थी।

रात में हॉस्टल में हंगामे की आवाज सुन विशाखा भागती हुई लड़कियों के कमरे की तरफ आई जहां से आवाजें आ रहीं थीं।

दीदी देखिए ना इसे क्या हो गया है साधना ने इशारा करते हुए  चिल्लाकर कहा तो एक क्षण को विशाखा सन्न रह गई।

क्या यह श्वेता है अभी शाम को तो भली चंगी थी ।इसका चेहरा इतना काला और बदरंग कैसे हो गया विशाखा सोच ही रही थी कि चंदा आ गई।

दीदी श्वेता जिस पार्लर में गई थी वहीं किसी क्रीम का रिएक्शन हो गया इसके चेहरे पर बहुत जलन हुई इसे ।जब यह बहुत चीखी चिल्लाई तो पार्लर वालों ने हम क्या कर सकते हैं हमें क्या पता ये क्रीम तुम्हारे चेहरे पर रिएक्शन कर जाएगी कह पल्ला झाड़ लिया और इसे भगा दिया चंदा ने आहिस्ता से बताया तो विशाखा स्तब्ध रह गई।

जो पार्लर चेहरा सजाने खूबसूरत बनाने का ठेका लेते हैं औने पौने दाम वसूलते हैं वो ऐसा कुरूप भी कर सकते हैं विशाखा को आज ही पता चला था।और इससे भी ज्यादा दुख की बात  कि ईश्वर प्रदत्त शक्ल  को सुधारने का दावा करने वाले ये पार्लर शकल बिगड़ने पर अपनी गलती मानने से भी मुकर जाते हैं यह असहनीय यथार्थ आज उजागर हुआ था।

श्वेता को संभालना दुश्वार था।वह दुखी असहाय और निरूपाय थी।अपने घरवालों को बुलाने से सख्त मना कर दिया था उसने।जिस चेहरे पर घमंड था।जिस शक्ल को लिए इतराती फिरती थी ।जिस रूप पर इतना गुमान था कि लोग ठिठक जाते थे आज वही मर गया।जिस दर्पण के सामने घंटों गुजारना भी कम लगता था आज उसी दर्पण को तोड़ कर फेंक दिया था उसने।जिंदगी जीना उसे कठिन प्रतीत हो रहा था।पार्लर वालों पर उसका क्रोध सीमा पार कर दुख में बदल चुका था।

श्वेता धीरज रखो चेहरा ही सब कुछ नहीं होता विशाखा ने श्वेता की मानसिक अवसाद स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

नहीं दीदी मुझे तो मैं ही पसंद नहीं हूं।मेरा चेहरा ही तो मेरी पहचान था अब वही नहीं रह गया तो मैं भी नहीं रहूंगी कलप उठी श्वेता उसका करुण क्रंदन पूरे हॉस्टल को भयभीत कर गया।हर चेहरे पर मुर्द नी छाई थी।हर दिल आक्रांत था।

एक ही क्षण में श्वेता की खास मित्र मंडली उससे छिटक कर दूर चली गई थी।सब उससे कन्नी काट लिए।

विशाखा ने श्वेता को तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया।डॉक्टर्स ने चौबीस घंटे एडमिट रखने की बात कही ।एलर्जी टेस्ट होने थे अलग ट्रीटमेंट दिया जाना था।

एग्जाम का समय था कोई लड़की श्वेता के साथ रुकने को तैयार नहीं हुई।आज सबको अपनी अपनी पढ़ाई की चिंता हो रही थी।

ऐसे संकट के समय चंदा खड़ी रही।

दीदी आप हॉस्टल जाकर बाकी व्यवस्था देखिए मैं यहां श्वेता के साथ रहूंगी अपनी पढ़ाई की किताबें लिए वह विशाखा को हिम्मत दे रही थी।

अगले दो दिनों तक चंदा श्वेता के पास से हटी ही नहीं।उसके पास बैठकर उसे मानसिक दिलासा देती थी हौसला बढ़ाती रही साथ ही आने वाले पेपर की तैयारी भी करवाती रही।।उसकी सेवा उसके खाने पीने सोने का ख्याल दिल लगा कर करती थी।उसकी ज्ञानवर्धक बातों ने श्वेता पर दवाओं से ज्यादा असर किया।उसको पहली बार इस बात का गहराई से बोध हुआ कि चंदा बहुत अच्छी बातें बहुत अच्छे तरीके से करती है।चंदा का दिल एकदम साफ संवेदनशील है।उसे कितना ज्ञान है।बाकी लड़कियों से एकदम अलग है उसकी बातें।उसे पहली बार पता चला कि चंदा का चेहरा जो उसकी बनाई खूबसूरती की परिभाषा में पहले फिट नहीं बैठता था आज बहुत सुंदर लग रहा था।

उसे ग्लानि हो रही थी सोचकर कि इतने उदार स्नेही दिल वाली चंदा को ईश्वर प्रदत्त रूप के कारण मैंने कितना अपमानित किया उपेक्षा करती रही।इसे कितना दुख पहुंचाया है मैने और यही आज मुझसे बदला लेने या मेरी हंसी उड़ाने के बजाय मेरी ढाल बनकर मेरे साथ खड़ी है।आज उसे खराब चेहरे के साथ जीने की व्यथा और विवशता भी अनुभव हो रही थी।उसने महसूस किया कि# असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है जो चंदा के ही पास है।

श्वेता कल के पेपर के सारे प्रश्न मैने तुम्हे समझा दिए हैं तुम उत्तर लिख लोगी ना चंदा ने पास आकर मृदुता से पूछा तो श्वेता की आँखें भर आईं।

चंदा मुझे माफ कर देना मैने तुम्हे समझे बिना बहुत दुख दिए हैं इसीलिए ईश्वर ने मुझे ऐसी स्थिति में डाल दिया ताकि मैं उन भावनाओं को समझ सकूं श्वेता रोने लग गई थी।

नहीं श्वेता तुम एकदम अच्छी हो जाओगी ऐसा कुछ मत सोचो कल पेपर है चंदा ने उसके आंसू पोछते हुए कहा और गले से लगा लिया।

विशाखा दरवाजे पर खड़ी यह सब देख और सुन रही थी और महसूस कर रही थी अपने गालों पर स्वयंमेव लुढ़क आए आंसुओं को।

लतिका श्रीवास्तव 

असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है#वाक्य कहानी प्रतियोगिता

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