खून के आंसू रुलाना – सीमा सिंघी 

विवान और आर्यन में बड़ी अच्छी दोस्ती थी मगर धीरे-धीरे विवान में अपने पिता की संपत्ति को लेकर अहम आते गया ! जबकि आर्यन अपने पिता की सीमित आय होने के कारण बड़ी साधारण सी मगर बहुत खुशनुमा और सुकून की जिंदगी जी रहा था। 

आर्यन विवान के दिन-ब-दिन बदलते बदलाव को देख कर समझ तो रहा था । उसे बुरा भी लगता मगर फिर भी शांत रहता  !

  अचानक एक दिन विवान के पिताजी की तबीयत बिगड़ गई !उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा ! जहां उन्हें खून की जरूरत थी!  संयोगवश वही खून अस्पताल में उपलब्ध नहीं था !

आर्यन को पता चलते ही वो दौड़ा-दौड़ा अस्पताल गया और डॉक्टर से कहने लगा ! डॉक्टर साहब मेरे मित्र के पिताजी का खून और मेरा खून एक ही है इसीलिए मैं खून दे सकता हूँ ! आप जितना चाहे ले लीजिए पर मेरे मित्र के पिताजी को बचा लीजिए। 

विवान की बात सुनकर डॉक्टर जरूर कहकर विवान के पिताजी को खून चढ़ाने की तैयारी करने में लग गए। शाम तक विवान के पिताजी की तबीयत में थोड़ा सुधार आ गया।तब विवान बहुत शर्माते हुए कहने लगा।

 मेरे मित्र मैं खुद को बहुत लज्जित महसूस कर रहा हूं। मेरे दिन-ब-दिन बदलते हुए व्यवहार को देखकर भी तुमने अपनी सच्ची मित्रता निभाई जबकि मैं तो तुम्हें खून के आंसू रुला रहा था।

 मैंने तो सभी मित्रों के सामने भी तुम्हें अनदेखा किया मगर तुम मेरे वही के वही सच्चे मित्र  ही रहे। मुझे क्षमा कर दो, मेरे मित्र कहते हुए विवान ने अपने दोनों हाथ आर्यन की ओर फैला दिए। विवान  की बात सुनकर आर्यन तुरंत मुस्कुरा कर बोल उठा। छोड़ो मित्र अब यह बातें। 

अब चाचा जी ठीक हो जाएंगे। इससे बढ़कर हमारे लिए खुशी की और क्या बात हो सकती है। हां मगर इतना जरूर करना चाहूंगा । 

अब आगे आने वाली जिंदगी में कभी भी मुझे इतना न सताना वरना मैं माफ नहीं करूंगा तुम्हें कहते हुए आर्यन अपने मित्र विवान के गले ल पड़ा।

स्वरचित 

सीमा सिंघी 

गोलाघाट असम

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