कर्जलक्ष्मी – रीमा महेंद्र ठाकुर : Moral Stories in Hindi

बेटी हुई है””!

हा तो क्या हुआ जच्चा बच्चा ,दोनों स्वस्थ है ,ये क्या कम है””!

लक्ष्मी आयी है आपके घर””नेग तो लेकर जाऐगी”!

हाथ नचाते हुऐ ,वृन्नला बोली”!

देख वृन्नला, कहने को तो लोग बोल देते है की लक्ष्मी आयी है,पर जब यही बेटियां विवाह योग्य होती है,तो मां बाप के लिऐ कर्ज बन जाती है””!

विविधा जी ,अपनी बेटी दीपा की ओर देखकर बोली”!

मां की बात  चुभ गयी दीपा के मन मे, उसने नजरें झुका ली””!

अरे नेग नही देना है तो मत दो”पर बिटिया को ऐसा तो मत बोलो””!

तो क्या बोले””कोई मां अपनी बेटी को ऐसे नही बोलना चाहती,क्या बताऊ जबसे बेटी हुई है दीपा के ससुराल वालो की सुन सुनकर मन खिन्न हो गया है ।

छोडो विविधा जी ,मै तो जाती है”” !

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अरे हा ,एक बार मुखडा तो दिखा दे नातिन का””वापस पलटते हुऐ बोली”वृन्नला””!

विविधा जी ,कुछ बोलती उससे पहले ही ,बच्ची को लेकर,दीपा बाहर आ गयी!

बडी सुन्दर है लाडो नजर न लगे ,”

अपनी आंखो के कोर से काजल निकालकर ,बच्ची के तलवें मे लगाती हुई बोली ,वृन्नला “”!

मौसी किसी ने मेरी बच्ची को अशीर्वाद भी नही दिया””!

बोलते हुऐ दीपा के” पीले कमजोर  चेहरे पर उदासी फैल गयी!

अरे मै आयी न अशीर्वाद के लिऐ””तू चिन्ता   क्यू करती है भाग्य लक्ष्मी  है”जुग जुग जिये लाली”””!

मौसी ये लो””!

अपनी ऊंगली से अंगूठी निकालकर ,वृन्नला की ओर बढाती हुई बोली दीपा””।

नही बिटिया  मौसी बोला है तो ,चिन्ता मत कर,तेरी बच्ची  हमेशा खुश रहेगी!

इतना बोलकर वृन्नला मेनगेट से बाहर चली गयी!

उसके जाने के बाद दीपा ,वापस  रूम मे लौट गयी!

इस बात को उन्नीस वर्ष बीत गये!

लक्ष्मी  अब बडी हो चुकी ,थी””वो नाम के अनुसार ही सुन्दर सुघड  ,शिक्षित युवती बन गयी थी!

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दीपा को हमेशा ही ,लक्ष्मी की चिन्ता लगी रहती””!

वो अपने पति से हमेशा यही कहती की भले दहेज देना पडे जमीन गिरवी रखनी पडे ,पर हम ,लक्ष्मी की शादी बडे घर मे करेगें”!

दीपा के पति ,आशुंमान जी इसी चिन्ता मे डूबे रहते,की बेटी बडी हो रही है,इतने रूपये का प्रबंध कहां से होगा!””जमीन पुस्तैनी  है .फिर बेटे के लिए भी तो .कुछ नहीं कर पाये.सारी कमाई बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च में ही ख़त्म हो जाती हैं!

वो जहां भी लक्ष्मी के रिश्ते की बात लेकर जाते”वही से निराशा हाथ लगती!

एक दिन सुबह ही प्रमोद जी ,जो की उनके दूर के रिश्तेदार थे”

एक लडके का फोटो लेकर पहुंचे”!

अंशुमान  जरा यहां तो आ ,खुश खबरी है!

प्रमोद जी की आवाज सुनकर, अंशुमान जी बाहर आ गये !

देख”?

,एक युवक की तस्वीर आगे बढाते हुऐ  बोले प्रमोद जी”!

लडका तो बहुत अच्छा है!

हा और उद्योगपति का इकलौता बेटा भी है!

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फिर तो ,?

,,सहम गये अंशुमान जी “”!

अच्छा लडका है ,लक्ष्मी बिटिया के भाग खुल जाऐगे!

वो तो ठीक है ,भाई,पर दहेज””!

मै कर्ज दिला दूंगा ,अच्छा रिश्ता है ,पैसे तो फिर बाद मे भी आते जाते रहेंगे,यदि हाथ से निकल गया तो “!

प्रमोद की बात सुनकर ,अंशुमान उदास हो गये!

चल तेरी मदद कर देता हूं, खोर वाली जमीन मेरे पास गिरवी रख देना,मै ब्याज नही लूंगा ” तू बाद मे धीरे धीरे मूलधन देकर छुडा लेना”!

भाई तू तो भगवान है मेरे लिऐ””!

नाहक भगवान न बना”‘!

पर वो बिटिया को पंसद तो कर लेगें न”!

अरे हा मैने तुझसे बिना। पूछे लक्ष्मी की तस्वीर उन्हे भेज दी थी!

आभार भाई””!

उनको दो तीन दिन मे लाकर बात पक्की करवा दूंगा,लेनदेन की बात भी हो जाऐगी”‘बडे लोग है,कुछ कम ज्यादा भी करवा लेगें””!

ठीक है!

मै चलता हूं'”!

प्रमोद जी के जाते ही”‘!

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मां सच ही कहती थी की””‘?

क्या बडबडा रही हो दीपा ,?

कुछ नही””!

भाग्य लक्ष्मी है बच्ची”वृन्नला के द्धारा बोली गयी बात,दीपा को याद आ गयी!

फिर मां की बात””कर्ज लक्ष्मी होती है बेटियां!

आँखें भर आयी दीपा की”।

कुछ दिनो बाद ,सूर्यभान जी अपनी पत्नी के साथ पधारे””!

प्रमोद जी ने लक्ष्मी और उज्ज्वल का रिश्ता तय करवा दिया!

तभी सूर्यभान जी ,अंशुमान के नजदीक आकर कान मे फुसफुसाते  हुऐ ,उनके पास बैठ गये!

कुछ दहेज की बात कर ले”!

सुनकर अंशुमान, जी की धडकने बढ गयी!

लक्ष्मी बिटिया को बुलाओ समधी जी,”

उनके बोलते ही दीपाजी ,लक्ष्मी को लेकर बाहर आ गयी”!

साक्षात हमारे घर की भाग्य लक्ष्मी,,”!

लक्ष्मी के पैर छूते ही .उमा जी ने उसे सीने से लगा लिया!

अब दहेज की बात करे”””धीरे से बोले ,प्रमोद जी’!

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जी ,मुझे दहेज मे,सिर्फ लक्ष्मी चाहिऐ ,आप जितना देना चाहो ,दो ,एक रूपये एक लाख तक पर इतना याद रखो”!

मुझे मेरे घर की लक्ष्मी चाहिऐ”आपके द्धारा भेजी गयी कर्जलक्ष्मी नही””!

बस इतना सा अनुरोध है मेरा”””,मेरी गृह लक्ष्मी आपके घर की कर्ज लक्ष्मी नही बननी चाहिए “””आखिर आप मेरे संम्बधी है!

सूर्यभान जी द्धारा बोली गयी बात सुनकर ,अंशुमान जी की आंखे भर आयी!

दीपा जी ने लक्ष्मी की ओर देखा””जो उसी की ओर देख रही थी!

लक्ष्मी मौन थी,पर दीपा जी को ,ऐसा लग रहा था की,लक्ष्मी  मौन होकर भी बहुत कुछ कह रही है”!

दीपा जी आंसू पोछती हुई ” रूम के अंदर चली गयी”

वो दीवार पर लगी तस्वीर  से सवाल कर रही थी””!

मां देख ,हमारी लक्ष्मी कर्ज लक्ष्मी नही,बल्कि भाग्यलक्ष्मी, है क्योकि उसपर वृहन्नला मौसी की दुआऐ है!

बाहर से गूंजते कहकहो की आवाज अंदर तक  आ रही थी!

समाप्त

रीमा महेंद्र ठाकुर वरिष्ठ लेखक सहित्य संपादक राणापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत

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