कहावत – काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती – सुदर्शन सचदेवा : Moral Stories in Hindi

भव्या ने देखा – एक नया फ्रेंड रिक्वेस्ट आया है| मोबाइल स्क्रीन पर यह नोटिफिकेशन चमका और चेहरा भी चमकने लगा | आजकल उसकी दुनिया किताबों से ज्यादा मोबाइल में बसती थी | इंस्टा की रील, फेस बुक व्हाट्सअप  नये नये फ्रैंड रिक्वेस्ट  – यही रोज़ का रुटीन था | शुरुआत में तो अच्छा लगा प्यारे प्यारे कमेंटस भेजता था , नोटस भी भेजे , मैनें सोचा – शायद मेरी मदद करना चाहता है | शायद मुझे सच्चा दोस्त मिल गया है |

लेकिन कुछ दिनों बाद वो अजीब सी बातें करने लगा | कभी कभी तो मुझ से फोटो मांगता कभी लिंक मांगता | मुझे यह सब अच्छा नहीं लगा | फिर मुझे एक कहावत याद आई — “

“काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती “

भव्या ने तुरन्त ब्लॉक कर दिया  | इस कदम से न केवल खुद को बल्कि अपने दोस्तों को भी समझाया कि आॅनलाईन फ्रैंडस पर कभी भरोसा नहीं करना| यह डिज़िटल दुनिया है – यहां कुछ भी हो सकता है | उसने सोचा – अन्याय में धोखा बार बार नहीं चलता | बस उसमें समझदारी और साहस दिखाना आवश्यक हो जाता है |

सुदर्शन सचदेवा 

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