काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती – सीमा सिंघी  :  Moral Stories in Hindi

 इतने ऑर्डर आए हुए हैं, मगर यह जूली भी न जाने कहां जाकर बैठ गई है। मशीन पर बैठेगी,तभी तो कपड़े सिलाई होंगे। यूं अपने आप तो नहीं तैयार हो जाएंगे ना,मगर मेरी बात सुने तब तो,इसी तरह बडबडाते हुए जूली की ताई जी शीला जी जूली को ढूंढते हुए उसके कमरे तक पहुंच गई। 

जूली अपनी ताई जी को देखते ही घबरा कर बोल उठी । ताई जी बदन बहुत दुख रहा था, हाथ की उंगलियां भी दर्द कर रही थी, इसीलिए थोड़ा आराम करने चली आई। इतना सुनते ही शीला जी का गुस्से से चेहरा तमतमा उठा और जूली को थप्पड़ मारने के लिए जैसे ही उन्होंने हवा में अपना हाथ लहराया। जूली ने डर से अपनी आंखें बंद कर ली। 

मगर शीला जी उसे थप्पड़ मारती उसके पहले ही जूली की मां मैना ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहने लगी। दीदी हद होती है, अत्याचार करने की किसी के दर्द को ना समझने की, आज तो आपने जूली पर हाथ उठाने की कोशिश करके सारी सीमाएं पार कर दी है ।

मगर आप भी आज मेरी एक बात सुन लीजिए। मुझ पर और मेरी बिटिया पर अब आपके अन्याय नहीं चलेंगे, क्योंकि काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती दीदी। 

मगर यह बात आपको आज तक शायद समझ ही नहीं आई।आपने बड़े होने का कोई फर्ज तो नहीं निभाया, मगर हमारे रिश्ते का फायदा सदा ही उठाया,मगर अब और नहीं। और हां दीदी कल से  बाजार में शर्मा जी के सिलाई सेंटर पर मैं और जूली कपड़े सिला करेंगे।

 हमें वहां बेहतर आमदनी भी होगी, और रोज-रोज के आपके यह अपमान भरे बोल भी नहीं सहने पड़ेंगे। अब आप ही अपनी मशीन को संभालिए। 

मैं तो चली अपनी बिटिया जूली को लेकर कहते हुए मैना बड़े स्वाभिमान के साथ अपनी बिटिया का हाथ थामे हुए बाजार में शर्मा जी के सिलाई सेंटर पर जाने लगी। यह बात सुनते ही की शीला जी सदमे में आ गई। 

उन्हें अपने किए हुए पर पछतावा होने लगा और रोज जो इतनी जूली के और उसकी मां के कपड़े सिलने पर आमदनी हो रही थी। वह भी बंद होती दिखने लगी। उन्होंने तुरंत जूली से क्षमा मांगते हुए कहा। मुझे माफ करना, बिटिया मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।

 घर में सिलाई का काम होते हुए तुम मां बेटी बाहर जाकर सिलाई का काम करोगी?? परिवार का लिहाज भी तो जरूरी है। जेठानी की बात सुनते ही मैना बोल पड़ी। माफ करना दीदी, आपने ही परिवार का लिहाज नहीं रखा। हमने तो बहुत रखा था।

 मगर अब और नहीं, हां प्यार और रिश्ता हमारा बना रहेगा मगर बेवजह के अन्याय अब नहीं चलेंगे कहकर मैना शर्मा जी के सिलाई सेंटर की ओर चल पड़ी।

स्वरचित 

सीमा सिंघी 

गोलाघाट असम

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