काश तू फिर से मिल जाती… – रश्मि प्रकाश 

राशि अपने पति निकुंज और चार साल की बेटी कुहू और डेढ़ साल के कुश के साथ अभी दशहरे के वक़्त ही नए शहर में आए थे । 

बेटा अभी छोटा था तो काम करने वाली की खोज जारी थी। अपार्टमेंट हो तो आराम से काम वाली मिल जाती है पर छोटी जगहों पर काम करने वाली को खोजना थोड़ा मुश्किल हो रहा था । 

ऐसे ही एक दिन राशि अपने घर के बाहर कुछ लड़कियों को खड़ी देखी, देख कर ऐसा लगा कि ये काम करने वाली ही होगी । उसने आगे बढ़ कर उन लोगों से पूछा,“ तुम लोग काम करती हो क्या घर की साफ़ सफ़ाई ये सब?”

सबने कहा,“ हाँ पर हमारे पास वक़्त नहीं है , कोई मिलेगी तो बता देंगे ।”

इतनी तसल्ली काफ़ी तो नहीं थी पर राशि कर भी क्या सकती थी , ठीक है बोल कर अपने घर आ गई ।

अगले दिन सुबह सुबह एक बारह तेरह साल की लड़की एक आदमी के साथ राशि के घर के बाहर आई…।

“क्या काम है ” राशि ने पूछा 

“ जी कल आप उन लड़कियों से काम के बाबत पूछ रही थी ना… तो आप इससे काम करवा लीजिए… हम आपके पीछे जो गली है उधर आख़िरी में जो झोपड़ी दिखाई दे रहा वहीं रहते हैं ।बाक़ी जो जानकारी चाहिए हम दे देंगे ।”उस आदमी ने कहा 

“ अरे ये तो छोटी सी है , मैं कैसे काम करवा सकती हूँ? आप रहने दीजिए… कोई और मिल जाएगी ।” कहकर राशि जाने लगी

“ मैडम जी.. आप चिंता मत करें इसको सारे काम आते हैं… क्या कहूँ बहुत अभागा बाप हूँ इसका.. ये मेरी पहली पत्नी की बेटी है.. जब मैं काम पर चला जाता हूँ तो इसकी सौतेली माँ इससे सारे काम भी करवाती और खाना भी नहीं देती। आप के पास रहेंगी तो चाहे पैसे कम दे देना पर इसको खाने को ज़रूर देना। आपका घर पास में है तो मैं निश्चित हो कर रह सकता हूँ ।” उस लड़की के पिता ने कहा 

राशि कुछ सोच कर बोली,” ठीक है देखती हूँ वैसे मेरे बच्चे छोटे हैं तो उनके साथ खेल भी लिया करेगी और बाक़ी मैं मिलकर सारे कर लूँगी …अच्छा तेरा नाम तो बता ?”राशि ने उससे पूछा 

“ सोनाती ” उस मासूम सी लड़की ने कहा 

इस तरह सोनाती राशि के घर में आ गई ।

कहते हैं ना प्यार दो तो बदले में प्यार ही मिलता सोनाती भाभी भाभी कह आगे पीछे लगी रहती … कहने को त वो राशि के घर काम करने के लिए आ रही थी पर उसके साथ राशि का एक रिश्ता बनता जा रहा था… लो उसके बच्चों को भी सँभाल लेती साथ ही साथ उनके साथ खेलती भी रहती…. उसकी बेटी तो साथ खेलने वाली मिल गई थी बेटी सोनाती दीदी बोलने लगी थी….कुछ लोगों के साथ हमारा कोई भी रिश्ता नही होता फिर भी वो अपने व्यवहार से सबके साथ रिश्ता बना लेते है उनमें से एक सोनाती थी

ऐसा कौन सा काम था जो वो नहीं जानती होगी ।बेटे के साथ राशि सो जाए तो बिना कहे बच्चे के गंदे कपड़े साफ कर देती 

राशि भी हर वो चीज जो अपने बच्चों को खाने को देती वो सोनाती को भी देती… चाहे वो काजू बादाम हो फल या कोई मिठाई… सोनाती सब को पहले अच्छे से देखती और खाती… उसके बाद बोलती ,” भाभी मैंने ये सब पहले कभी नहीं खाया… आप मुझे सब कुछ दे देती हैं जो अपने बच्चों को देती हैं एक मेरी सौतेली माँ है मुझे कभी अच्छा खाने को नहीं देती और मेरे भाई बहनों को पेट भर भर के खिलाती है।” 

उसकी बातें सुन कर ऐसा लगता जैसे उसकी सौतेली माँ से ज़्यादा उसका रिश्ता राशि के साथ बनता जा रहा था… इतनी छोटी होने के बावजूद वो बहुत सलीके से काम करती मन हो ना हो राशि को ज़बरदस्ती बोलती भाभी आप थक गई होंगी आप बैठो मैं आपके लिए चाय बना कर लाती हूँ….उसके बोलने में ही इतना अपनापन होता था कि राशि के ना को बावजूद वो चाय लाकर रख देती 

जब सोनाती आई थी उसके पास बस दो ही कपड़े थे वो भी फटे हुए । 

राशि ने सोचा दीवाली पर अपने बच्चों के साथ उसे भी नए कपड़े दे देंगी ।

जब उसे दो नए कपड़े मिले तो उसकी ख़ुशी उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी । वो उन्हें हाथों में लेकर बोली,“ भाभी मैं इन कपड़ों को यही रखूँगी.. घर लेकर गई तो सौतेली माँ मेरी बहनों को दे देंगी । “

सुनकर कलेजा मुँह को आ गया । लोग कैसे करते हैं ना..राशि ने अब उसे ठंडे कपड़े भी दिए वो भी उसने घर के सीढ़ी रूम में रख छोड़े। अब तो जब उसके पापा नहीं होते राशि के घर ही सोने की ज़िद्द करती।

राशि निकुंज चाह कर भी मना नहीं कर पाते थे ।

दीवाली तक सोनाती बिल्कुल घर में रच बस गई।

दीवाली वाले दिन सुबह से सोनाती राशि के घर को सजवाने में मदद कर रही थी ।

पूजा के बाद निकुंज बोले चलो कुहू को फुलझड़ी जलाकर देते हैं ।

 बच्चे छोटे थे तो ज़्यादा पटाखे तो नहीं लाए थे पर कुछ फुलझड़ियाँ और अनार ही लाए थे ।

इतने में राशि देखती है कुहू पटाखे के पैकेट से कुछ निकाल कर बार बार बाहर जा रही है ।

“ निकुंज आप कुहू को देखो ये जाने पटाखे लेकर किधर जा रही है कहीं खुद को जला न लें ।”राशि ने कहा 

कुहू फिर कमरे से आकर पटाखे निकालने लगी…. “ बेटा ये पटाखे कहाँ लेकर जा रही हो? रूको पापा के साथ जलाना … हम भी बाहर ही आ रहें ।” राशि ने कहा 

बाहर जाकर देखा तो सारे पटाखे सोनाती जला रही थी और कुहू उसे  देख देख कर खुश हो रही थी ।

“ सोनाती तुम्हें भी तो पटाखे दिए थे ना वो क्या हुए? “राशि ने पूछा 

“ भाभी वो ख़त्म हो गए… कुहू को डर लगेगा ये सोच कर मैंने ही उसके पटाखे भी जला दिए।”सोनाती सफ़ाई देती हुई बोली 

“ अच्छा कोई बात नही… और पटाखे होंगे ना वो जला लो।”कहकर राशि पटाखे का पैकेट देखने गई तो वो तो ख़ाली हो चुका था 

“ तुम दोनों ने बिना किसी बड़े के साथ के सारे पटाखे जला लिए… कुछ हो जाता तो..।”राशि डरते हुए बोली 

“ कुछ नह होता भाभी…. कुहू के साथ मैं थी ना… मुझे पटाखे बहुत पसंद है पर कभी इतने पटाखे एक साथ जलाए नहीं तो कुहू से बोल बोल कर मँगवाती रही ।” सोनाती ने कहा 

सोनाती की बात सुन कर राशि को लगा , इतनी छोटी बच्ची और समझदारी इतनी कह रही कुहू के साथ मैं थी ना…।”

“ चलो फिर सोनाती के लिए और पटाखे मँगाते है… इस बार की दीवाली हमारे घर की नई सदस्या के नाम की। 

“जाइए निकुंज कुछ पटाखे और ले आइए… इन बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देख कर हमें भी तो ख़ुशी हो रही है दो साल से कुहू ने भी पटाखे कहाँ जलाए कुश होने वाला था तो पटाखे भी नहीं लाए थे,इस बार कुहू कितनी ख़ुश हो रही है शायद अपनी सोनाती दीदी के साथ उसे भी मजा आ रहा है ।”

कुछ देर में निकुंज और पटाखे ले आए। 

आज किसी दूसरे की ख़ुशी के लिए किए गए काम से जो ख़ुशी राशि और निकुंज को मिली वो व्यक्त करना मुश्किल था ।

ये आग़ाज़ था उस बच्ची के लिए जो अपने घर में हर एक चीज़ को तरस रही थी और जिसे अपनों से प्यार नही मिल रहा था पर अब राशि के साथ उसे प्यार , सम्मान और खाना भी मिल रहा था ।

दो साल तक राशि वहाँ रही और सोनाती उसके घर परिवार का हिस्सा बन गईं थीं…. घर आने वाले परिवार के सभी सदस्यों के साथ उसने अपना रिश्ता बना लिया था…

अपने नए शहर जाने से पहले राशि कुछ दिनों के लिए मायके चली गई… और जब लौट कर आई तो सोनाती के घर खबर भिजवाया आकर वो अपना सारा सामान ले जाए जो हमने उसे दिए थे और वो अभी तक हमारे ही घर में रखे हुए थे…. उसके पिता ने आकर बताया मैडम जी उसकी सौतेली माँ उसे बहुत परेशान कर रही थी… तो बस उसे उसकी नानी के घर भेज दिया अब वो उधर ही रहेगी।

“ओहहह उसके कपड़े रखे हुए थे… मैं जाते वक्त बोली थी ले जाओ अपने घर वो नहीं ले गई बोली भाभी जब आप आएगी तो मैं आऊँगी मिलने तब लेकर चली जाऊँगी पर अब तो वो यहाँ है ही नहीं तो आप वो ले जाइए उसे दे दीजिएगा….हमने कितने चाव से उसे सब दिया था और उसे सब पसंद भी था।”राशि ने कहा 

“ क्या फ़ायदा ले जाकर मैडम जी अब तो मेरी बेटी को कभी यहाँ ले कर नहीं आऊँगा…और मैं भी उसके पास ज़्यादा नहीं जा सकता तो किसके लिए ले कर जाऊँ और जो घर लेकर गया पत्नी कलह करेगी… इसलिए उसे यहीं छोड़ जाइए कोई ज़रूरतमंद ले जाएगा।” सोनाती के पिता के स्वर में एक दर्द भरा हुआ था 

“ मैं तो सोच रही थी उसे साथ ले जाती… हमारे पास रहती तो पढ़ाई भी करवा देते और वो परिवार की सदस्या बनकर रहती।” राशि ने कहा 

“ ना मैडम जी…आपके साथ भेज दूँगा तो फिर बेटी से मिलना मुश्किल हो जाएगा… अभी वो जहाँ है वही रहने दीजिए…. कम से कम अपनों के साथ तो है।” पिता की आवाज़ में बेटी के लिए फ़िक्र भी थी और उसे दूर कपने का दर्द भी पर पत्नी के बुरे व्यवहार से बेटी को दूर रखने के लिए उनके पास कोई चारा भी नहीं था 

“ ठीक है जैसी आपकी इच्छा ।” कहकर राशि ने उन्हें भेज दिया 

कुछ दिनों बाद समान बाँध कर वो अपने नए शहर आ गए पर वो नहीं भूल पा रहे थे तो वो थी सोनाती….बेटी को भी अपनी सोनाती दीदी की बहुत याद आती थी…पर वो कर ही क्या सकते थे…. कुछ वक्त का साथ था पर सच कहते हैं कुछ रिश्ते ऐसे भी होते है जो अपनों से ज़्यादा अपने हो जाते है चाहे वो कोई भी हो ।

आज वो जाने कहाँ होगी पर आज भी राशि ऐसे बच्चों को देख कर यही सोचती है काश सोनाती उसे फिर मिल जाती। ख़ुशी की ज़रूरत सबको होती है वो किस रूप में किससे मिल जाए कहना मुश्किल है … इसलिए जो आपको प्यार दे उसपर प्यार लुटाते चलो।

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धन्यवाद 

रश्मि प्रकाश 

# एक  रिश्ता ऐसा भी

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