झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

संजना को बहुत सारी शापिंग करनी थी इसलिए वह बिना समय गँवाए फटाफट ख़रीददारी कर रही थी सोचती जा रही थी कि घर जाकर भी बहुत सारे काम करने हैं क्योंकि कल ननंद पुष्पा को देखने के लिए लड़के वाले आने वाले हैं ।

वह सब्ज़ियों की ख़रीददारी कर रही थी कि पीछे से उसे किसी ने आवाज़ दी संजना वह पीछे मुड़कर देखती है कि उसके बचपन की सहेली प्रिया कार से उतरकर उसकी तरफ आ रही थी ।

दोनों ने एक दूसरे को गले से लगाया और एक-दूसरे का हालचाल पूछने लगे ।

प्रिया ने कहा कि चल मेरे साथ मेरा घर यहीं पास है । संजना ने फिर कभी आने का वादा किया और उसके साथ उसके घर नहीं गई लेकिन घर का पता और फोन नंबर जरूर ले लिया था ।

संजना जब स्कूल में पढ़ती थी तब उनकी चार सहेलियों का ग्रूप था ख़ासियत यह थी कि यह सब एक ही मोहल्ले में आसपास रहते थे । जब बातचीत के दौरान वे चारों अपने भविष्य की सोचते थे तब संजना कहती थी कि मेरे माता-पिता जिसे मेरे लिए चुनेंगे उसे ही मैं अपना जीवनसाथी मान लूँगी दूसरी भी उसकी बात पर सहमत थीं ।

प्रिया सबसे अलग विचार रखती है इसलिए उन तीनों से लड़ती थी कि तुम लोग ऐसा क्यों सोचती हो हमारे अपने विचार, ख्वाहिश भी तो होंगे उन्हें छोड़कर ना जान पहचान ऐसे व्यक्ति का हाथ पकड़कर उसके घर जाना!!! ना बाबा मेरे से तो ऐसा नहीं होगा तुम लोगों को भी समझा रही हूँ सँभल जाओ वरना मुझे देख कर पछताओगी जब मैं खूब पैसे वाले लड़के के घर जाऊँगी महल जैसे घर में रहूँगी तब सब उसकी बातों पर गौर नहीं करते थे सिर्फ़ हँसते थे ।

समय का पहिया चलता रहा और सबकी शादियाँ हो गई थीं । एक अमेरिका और एक कनाडा में बस गई । उनका परिवार कैसा है यह जानने का कभी मौका नहीं मिला था । प्रिया हैदराबाद में ही बस गई थीं ।

सालों बाद प्रिया से मुलाक़ात हुई थी उसे देखकर तो लगता है कि वह ठाठ बाट से है । शायद उसकी ख्वाहिशें पूरी हो गई हैं । मन में कई सवाल उठ रहे थे उससे पूछूँ कि अब वह क्या कर रही है कहाँ रह रही है आदि!!

संजना घर पहुँची और अपने कामों में व्यस्त हो गई । पुष्पा को लड़के वाले आए और देखकर चले गए एक हफ़्ते बाद ही  पुष्पा के लिए जो रिश्ता आया था उनके पास से खबर आई कि उन्हें पुष्पा पसंद आ गई है !

फिर क्या घर में जैसे ख़ुशियों की बरसात हो गई है । सब बहुत खुश थे मेरी सासू माँ और पुष्पा के तो पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे क्योंकि प्रवीण अमेरिका में रहता था ।

हमारे रिश्तेदारों में कहीं भी किसी के भी घर से….. कोई भी अमेरिका नहीं गया था ……हमारी पुष्पा ही पहली और लकी लड़की है ……जिसे यह मौका मिला है …… ऐसा मेरी सासु माँ सबको बताती फिर रही थी , घर में सब उनका मजाक उड़ाते थे , माँ आपने सबको बता दिया है जिन्होंने पूछा और जिन्होंने नहीं भी पूछा है !!! है ना ।

पुष्पा की शादी धूमधाम से हो गई और वह अपने पति के साथ अमेरिका चली गई ।

संजना को जब अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय मिला तो वह प्रिया के बारे में सोचने लगी । एक दिन दोपहर को उसने प्रिया को फोन किया , बहुत देर तक रिंग बजने के बाद उसने फोन उठाया और कहा मैं सो रही थी , इसलिए उठा नहीं पाई थी चल बोल क्या बात है ? क्या कर रही है ? हमारे घर कब आ रही है?

संजना अरे!! रुक जा जरा! इतने सवाल एक साथ पूछेगी तो कैसे होगा? उन दोनों ने कब मिलना है तय किया । संजना देखना चाहती थी कि प्रिया ने जो सपना देखा है , उसे वह पा पाई या नहीं ? इसी जिज्ञासा के चलते , वह प्रिया के घर पहुँची वाहहह वह घर नहीं एक महल है । उसकी आँखें खुलीं की खुली रह गई ।

वह दस मिनट बैठक में बैठी रही तब जाकर प्रिया अंदर से आई ओह ! सॉरी रे देरी हो गई है , कहते हुए उसके सामने बड़े ही गर्व से बैठी जैसे कह रही हो देखा मुझे ।

दोनों के बीच बहुत सी बातें हुई और संजना घर आ गई । अपने घर को देख उसे लग रहा था जैसे वह एक झोपड़ी में आ गई है । उस दिन वह अन्य मनस्क ही रही ।

पति ने और सास ने भी ध्यान दिया कि आजकल संजना उदास रहती है , कुछ कहने पर चिड़चिड़ा कर जवाब देती है ….. बात- बात पर अपनी क़िस्मत को कोसती है ,  वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर इसे हुआ क्या है ?

संजना एक दिन बाज़ार गई और वहीं से बिना बताए प्रिया के घर चली गई । उसे दरबान ने बाहर ही रोक दिया था,  लेकिन जब उसने बताया कि वह बचपन की सहेली है तो उसे जाने दिया ।

उस दिन प्रिया के घर में काफ़ी चहल-  पहल थी जैसे ही वह मुख्य दरवाज़े से अंदर प्रवेश करती उसके पहले किसी ने उसे रोक लिया और हाथ पकड़कर किनारे पर ले गया ।

उसने देखा वह प्रिया के घर खाना बनाने वाली महिला थी । जब वह पहली बार प्रिया के घर आई थी तब प्रिया ने ही सरला जी को बताया था कि यह मेरी बचपन की सहेली है ।

सरला जी उसे पीछे ऑउटहॉउस में ले गई , जहाँ वे रहतीं हैं । वह कुछ समझती !! उसके पहले ही उन्होंने कहा कि बेटा मेरी इस हरकत का बुरा नहीं मानना।

तुमने मुझे नहीं पहचाना है ? मैं प्रिया की मौसी हूँ , उसकी देखभाल के लिए यहाँ रहती हूँ , कहने के बदले यह कह सकती हूँ कि मेरा कोई नहीं है तो मुझे प्रिया ने आसरा दिया है । जिसके बदले मैं मैं उसके लिए खाना और दूसरे छोटे मोटे काम कर देती हूँ ।

सरला जी ने कहा , तुम सोच रही होगी कि मैं तुम्हें यहाँ क्यों लेकर आई हूँ । मैं प्रिया के बारे में तुम्हें बताना चाहती हूँ । मुझे यह भी मालूम है कि तुम चार सहेलियों का एक ग्रूप था है ना….

संजना उनकी तरफ आश्चर्य से देखते हुए उन्हें पहचानने की कोशिश कर रही थी । सरला ने कहा मुझे बाद में पहचान लेना पहले प्रिया के बारे में जान ले ।

उन्होंने बताया कि प्रिया को पहले से ही था कि वह पैसे वाले लड़के से शादी करें ऐशो-आराम की जिंदगी जिए । मेरी दीदी जीजा उसके लिए कई रिश्ते लेकर आए थे । उन्हें प्रिया की बहुत फिक्र थी क्योंकि तुम सब शादी करके चले गए थे और वह अकेली रह गई थी ।

 उन्होंने देखा कि वह आए दिन लड़कों के साथ घूमती थी , देर रात तक बाहर रहती थी । उसके रहन – सहन में बदलाव आ गया था , वह खूब पैसे खर्च करने लगी थी । जब उससे पूछा जाता कि कहाँ से इतने पैसे आ रहे हैं , कहती थी कि मैं कमा रही हूँ ।

इनके मना करने पर कहती थी कि आप लोग मेरे लिए रिश्ते मत देखिए , मैं अपने लिए खुद लड़का ढूँढ लूँगी । उसने एक दिन माता-पिता को बताया कि मैंने बहुत बड़ा घर सस्ते में ख़रीदा है , हम वहाँ जाकर रहेंगे ।

इस बीच लोगों के द्वारा माँ पिता को भी पता चला कि वह नौकरी नहीं बल्कि धंधा करने लगी है । इसी गम में दीदी गुजर गई और उनके पीछे – पीछे जीजा जी भी चल बसे । मैं यहाँ आई क्योंकि मेरे बच्चे नहीं हैं और पति की मृत्यु एक हादसे में हो गई थी । प्रिया की देखभाल करते हुए यहीं रह गई हूँ ।

बेटा तुम एक इज़्ज़तदार घर से हो तुम्हारा प्यारा सा परिवार है । इस गंदगी में मत आओ , प्रिया बदल गई है कभी तुम्हें भी अपनी ठाठबाट दिखा कर ट्रेप में कर लेगी ।

इसलिए आज के बाद तुम इस घर की तरफ मुड़ कर नहीं देखना और ना ही प्रिया का फोन उठाना समझ गई ना ? चल ! अब धीरे से मैं तुम्हें बाहर छोड़ देती हूँ तुम घर चली जाना ।

संजना मौसी की मदद से बाहर आ गई और सीधे घर पहुँची । उसे लगा कि मैं भी कितनी मूर्ख थी कि झूठे दिखावे को देख कर बहकावे में आ गई और घर की शांति भंग करने लगी थी ।

चलो ! अच्छा हुआ बच गई , अब अक्ल आ गई है झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती है । आज उसका परिवार उसे बहुत अच्छा लग रहा था । झट से रसोई में जाकर उसने खाना बनाया और स्पेशल खीर भी बनाई । उसे इस तरह खुश देखकर घरवाले भी खुश हो गए थे ।

के कामेश्वरी

#झूठे दिखावे से जिंदगी नहीं चलती

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