इस गुनाह की माफी नहीं… – तोषिका

*”इस गुनाह की माफी नहीं”* मिलेगी आपको समझे आप, रोते रोते अमृता बोली और वह से भाग कर अपने कमरे में चली गई और अपने आप को अंदर बंद कर लिया। और वहां उसका पति रोहन बस कड़ा का कड़ा रह गया। आखिर उसने काम ही ऐसा किया था कि वो अब किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं बचा था।

तभी अचानक से उसका फोन बजा और रोहन उस नंबर को देख कर एकदम से कांपने लगा जैसे उसकी मृत्यु बस निकट ही हो। उसने अपने कांपते हुए हाथों से फोन उठाया और हेलो बोला, उधर से एक भारी आवाज आई “कहा का तुम्हारा वो कीमती सामान जिसकी बात तुमने कल रात को की थी?

” रोहन बोला “साहब उसके बदले आपको जो लेना है वो लेलो कल मैं जरा शराब के नशे में कुछ भी बोल दिया, अगर आप चाहते हो तो मुझे ले जाओ।” उधर फोन से आग बबूला होके वो आदमी बोला ये तुम्हे पहले सोचना चाहिए था। वो मर्द ही क्या जो अपनी जबान का पक्का न हो?

एक बार जिस चीज पर हम हाथ रख देते है वो हमारी हो जाती है और अगर हमें हमारी चीज नहीं मिलती है तो हम कुछ भी करके उसको हासिल कर लेते है। मैं तुम्हे 3 दिन और दे रहा हू, वो कीमती चीज मेरे कदमों में होनी चाहिए। यह बोलते ही फोन कट हो गया।

उधर रोहन को समझ नहीं आ रहा था कि वो करे तो अब क्या करे? रोहन ये सब सोच ही रहा था अचानक से घर के दरवाजे पर किसी ने खत खत की , जब दरवाजा खोला तो वो उनकी इकलौती बेटी रिया थी जो बस अभी स्कूल से घर आई थी। उसने अपने पापा रोहन से उत्सुकता से पूछा “मम्मा किधर है? मुझे उनको कुछ दिखाना है”

रोहन अपने अश्रु को रोकते हुए बोला मम्मा अभी कमरे में है रेस्ट कर रही है, आप फ्रेश हो जाओ मैं खाना गरम करके लाता हू। रिया जब तक फ्रेश होने गई उधर तब तक रोहन उस फोन वाली बात को सोच रहा था।

रिया ने रोहन को ऐसे देखा तो बोली “पापा आपकी तबियत ठीक तो है ना? आपके माथे पर शिकन है और पसीना भी आ रहा है।

तुरंत ही रोहन बोला हा सब ठीक है वो बस तोड़ी गर्मी लग रही थी। वो खाना खाने बैठे ही थे कि अमृता अपने रूम से बाहर निकली और उसने रिया को देखा ही था कि वो फूट फूट के रोने लगी और उसको अपने सीने से लगा लिया। रिया कुछ समझ नहीं पा रही थी और उसने भी अमृता को गले लगा लिया।

ये सब देख कर रोहन को अपनी गलती का बहुत पछतावा हुआ और उसने अपनी इस गलती को सुधारने के लिए उसी नंबर पर कॉल किया जिससे उसे कॉल आया था और उसको एक ओपन ग्राउंड में आके अपनी कीमती चीज लेके जाने को कहा।

जब वो ग्राउंड में पहुंचे तो रोहन ने देखा कि साहब अकेला नहीं है, उसके साथ वो अपनी पूरी टीम लाया है। साहब रोहन को अकेला देखते ही बोला “कहा है तुम्हारा कीमती सामान, तुम्हारी बेटी? रिया नाम बताया था ना तुमने उसका” रोहन बोला मेरी बेटी नहीं आयेगी और मैं अपनी गलती की सजा उनको नहीं भुगतने दूंगा।

यह सब सुनकर साहब को अच्छा नहीं लगा और उसने अपने आदमी को रोहन को गोली से मारने को कहा और दूसरे को उसकी बेटी रिया को लाने को कहा जिसका वादा रोहन ने किया था अगर वो अपना कर्जा नहीं चुका पता है 8 महीनों के अंदर।

जैसे ही गोली की आवाज़ आई उधर अमृता आई और अपने साथ पुलिस को भी लेकर आई। तभी अमृता ने देखा कि रोहन खून से लतपथ जमीन पर गिरा हुआ है और अमृता को बुला रहा है। अमृता उसके पास भागी भागी गई और रोकर बोलने लगी अकेले आने की क्या ज़रूरत थी। रोहन पूछता तुम्हे पता कैसे चला यहां का?

उसने बोला कि उसने सारी बातें फोन पर सुन ली थी जब रोहन के पास कॉल आया था और अब तुम कुछ मत बोलो एम्बुलेंस आती ही होगी। रोहन ने रोते हुए कहा “मुझे बोलने दो, मेरे पास अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है, मैं जानता हू *”इस गुनाह की माफी नहीं है”* तुम अपना और रिया का ध्यान रखना।

ये बोलते ही रोहन ने अपना दम तोड़ दिया और उधर पुलिस इंस्पेक्टर कहते है आपकी वजह से आज हम इस बड़ी गैंग को एक साथ पकड़ पाए है, आपकी हिम्मत की हम डाट देते है और हमें आपके पति के लिए खेद है।

*”एक हफ्ते बाद”*

अमृता अपनी बेटी के साथ दूसरी जगह शिफ्ट हो गए है और नया जीवन शुरू करने की कोशिश कर रही है, अपने पति रोहन की यादों के सहारे और एक गवर्नमेंट स्कूल में पढ़ा रही है और अपनी बेटी को भी पढ़ा रही है।

लेखिका

तोषिका

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