इज्जतदार – नीलम शर्मा

सुहानी अपनी सहेली के यहांँआई थी। उसे बैठे हुए कुछ ही समय हुआ था कि मीना बोली सुहानी बाहर मौसम खराब सा हो रहा है, शायद बहुत तेज बारिश आएगी। सुहानी बोली मैं चलती हूं कभी घर जाना ही मुश्किल हो जाए। देख ले कहीं रास्ते में ही बारिश न आ जाए। अरे नहीं यह तो रहा घर। जरा सी देर में पहुंँच जाऊंँगी। 

सुहानी अभी कुछ ही दूर पहुंँची थी कि बिल्कुल काले बादल छाकर अंधेरा घिर आया। जोर-जोर से बिजली कड़कने लगी। सांय-सांय तेज हवा चल रही थी। ऐसा लग रहा था मानो कितना बड़ा तूफान आने वाला हो। लेकिन सुहानी को क्या पता था कि ये तूफानी शाम उसके जीवन में भी बड़ा तूफान लेकर आएगी। 

सुहानी ने अपने घर फोन करने की कोशिश की। लेकिन खराब मौसम की वजह से नेटवर्क भी नहीं थे। रास्ता सुनसान सा हो गया था। सामने अपनी गली देख सुहानी ने चैन की सांस ली। चलो घर पहुंँच गई। अभी वह सोचते-सोचते  गली के नुक्कड़ पर पहुंँची  ही थी कि  एक मजबूत हाथ ने उसके मुंह को कसकर दबा लिया। ‘

सुहानी की आंखें डर से फटी रह गई। जब उसने अपने सामने राजन के साथ दो और लड़कों को खड़ा देखा। सुहानी ने दो दिन पहले ही बदतमीजी करने पर राजन को उसके दोस्तों के सामने थप्पड़ मार दिया था। पर वह तो राजन की देख लूंँगा वाली धमकी को हल्के में ही ले रही थी। 

राजन हैवानी हंँसी हंँसते हुए बोला आखिर मछली जाल में फंस ही गई। मौसम खराब होने के कारण गली बिल्कुल सुनसान थी।सुहानी की डर के मारे कंपकंपाती सी आवाज निकली।

राजन मुझे जाने दो प्लीज। मैं तुमसे माफी मांगती हूंँ। माफी नहीं अब तो उस थप्पड़ का तुम्हें जवाब मिलेगा। राजन के इरादे भाँपकर सुहानी की समझ में आ गया था कि कमजोर पडने से काम नहीं चलेगा। हिम्मत करनी होगी। 

चल भाई हम चलते हैं। शिकार तेरे पंजे में है। मौज कर। हांँ तुम दोनों जाओ।राजन सुहानी को खींचकर एक अंधेरे कोने में ले जाने लगा। सुहानी ने पूरी हिम्मत करके सामने खड़े राजन की टांगों के बीच जोर से लात मारी। और वहाँ पड़ी हुई कूड़ा मिट्टी जो भी हाथ में आया उसके मुंह पर दे मारा।

राजन बिलबिला उठा। उसकी पकड़ सुहानी पर ढीली पड़ गई। सुहानी उसे धक्का देकर तेजी से अपने घर की ओर भागी। दरवाजा उसकी मम्मी ने खोला। सुहानी की हालत देखकर वे अंजानी आशंका से काँप उठी। सुहानी ने उन्हें सारी बात बताई तो उन्होंने चैन की सांस ली। वे बोली हम इज्जतदार लोग हैं। तू ये बात किसी को नहीं बताना  नहीं तो बिना वजह ही समाज में बदनामी होगी।

नहीं मम्मी मैं चुप नहीं बैठूंँगी। राजन को सजा दिलवा कर रहूंँगी। नहीं तो उसकी हिम्मत और बढ़ जाएगी। हाँ बेटा मैं तुम्हारे साथ हूँ।सुहानी के पापा जो सारी बात सुन चुके थे, उसका फैसला सुनकर बोले। कैसी बात करते हैं आप भी। यह तो नासमझ है। लेकिन  आप तो खुद एक वकील हैं। राजन के साथ हमारी बेटी के चरित्र पर कितनी उंगलियां उठेंगी। इसी डर को तो दूर करना है। जिसके लिए किसी को तो पहल करनी ही पड़ेगी। 

       सुहानी के पापा सुहानी को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच गए । उन्होंने राजन के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी। पुलिस राजन को उसके घर से पकड़ लायी। लेकिन उसने उल्टा सुहानी को ही गलत ठहराया। वह बोला सुहानी ने ही उसे बुलाया था। लेकिन जब मैंने उसकी बात नहीं मानी तो उसने मुझे धमकी दी कि मैं तुम्हें जबरदस्ती करने की कोशिश में अंदर करा दूंँगी।

इंस्पेक्टर ने पूछा क्या कोई गवाह तुम्हारे पास है। पुलिस और मीडिया के बेतुके सवाल अलग सुहानी की हिम्मत तोड़ रहे थे। एक बार  तो उसे लगा कहीं रिपोर्ट लिखा कर उसने कोई गलती तो नहीं कर दी। सुहानी ने अपनी सहेली से गवाही देने के लिए कहा। जब थप्पड़ मारने पर राजन  ने उसे देख लेने की धमकी दी थी।

पर उसकी सहेली के मम्मी पापा ने उसे गवाही देने से मना कर दिया। और कहा कि वह पुलिस के सामने कहे कि वो सुहानी के साथ ही नहीं थी।

आखिर सुहानी की किस्मत ने उसका साथ दिया। और वहाँ आसपास के सीसीटीवी फुटेज से राजन की हरकत पुलिस के सामने आ गई। राजन पर केस चला। सुहानी के साथ रेप करने की कोशिश में उसको सजा मिली। आज कोर्ट के फैसले के बाद जब सुहानी बाहर निकली तो उसके चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था। कल तक जो लोग बातें बना रहे थे। वे आज सुहानी की प्रशंसा करते नहीं थक रहे थे।

नीलम शर्मा

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