हमारा परिवार – एम पी सिंह

राहुल का परिवार गाँव में रहता था। परिवार में राहुल के माता पिता, ताऊ जी ताई जी, उनका बेटा रोहन और दादा जी थे। राहुल पढ़ाई में बहुत तेज था और रोहन औसत था। दोनो भाई  दोस्तों की तरह रहते थे। दादा जी के गुजर जाने के कुछ साल बाद राहुल के पिता जी भी गुजर गए। ताऊजी सारी खेती बाड़ी संभालते थे।

राहुल ने भी पढ़ाई छोड़ दी ओर ताऊ जी के साथ खेती बाड़ी में लग गया. रोहन पढ़ाई के लिए पास के शहर में चला गया। राहुल की पढ़ाई  छोड़ने पर उसकी माता जी बहुत ज्यादा नाराज रहने लगी क्योंकि राहुल पढ़ाई में रोहन से तेज था परंतु ताऊ जी के आगे मजबूर थी।

माँ को इस बात का बहुत मलाल था कि राहुल पढ़ नहीं पाया ओर रोहन ग्रेजुएट हो गया।

ताऊ जी ने दोनों भाइयों के लिए लड़कियां 

देखना शुरू किया तो रोहन बोला, मैंने शहर मैं अपने लिए लड़की पसंद कर ली है, उसी से शादी करुँगा. ताऊ जी ने राहुल के लिए पास के गाँव कि लड़की पसंद करके दोनों कि एक साथ शादी कर दी। रोहन कि पत्नी पढ़ी लिखी होने के साथ साथ तेज तर्रार थी। इसलिये उसका मन गाँव में नहीं लग रहा था।

कुछ समय बाद ताऊ जी की भी मौत हो गई। अब रोहन खेत पर कम जाता और शहरके / बाहरके में सारे काम करता। जब भी शहर जाता अपनी पत्नी को भी ले जाता  राहुल सारा दिन खेतो में रहता ओर उसकी पत्नी घर संभालती।

पत्नी के दबाव में आकर रोहन ने खेती बाड़ी छोड़ शहर में नोकरी पकड़ ली और शहर में शिफ्ट हो गया और माँ कोई भी साथ ले गया.

अब राहुल अकेला ही सारी जमीन पर खेती करता और जरूरी सामान लेने शहर भी जाता। शहर जाने पर रोहन से भी मिल आता परन्तु रोहन कभी गाँव नहीं आता था।

एक दिन राहुल काम से शहर गया और 

रोहन के यहाँ भी गया पर ताई जी दिखाई नहीं दी तो राहुल ने ताई जी के बारे में पूछा तो रोहन बोला, मां तीर्थ पर गई है।

ये बात राहुल की समझ से परे थीं. खाना खाने के बाद हम दोनों बाहर टहलने निकले तो राहुल ने रोहन से पूछा, क्या बात है? रोहन बोला में अपनी पत्नी से परेशान हो गया हूं। रोज रोज की किच किच, कभी बड़ा घर चाहिये, कभी नई साड़ी चाहिए, तो कभी मां के साथ नहीं रहना , वगैरह वगैरहा।

आखिर मां को किसके पास छोड़कर आऊ, तंग आकर मैं माँ को वृद आश्रम छोड़ आया, फिर भी चैन से जीने नहीं देती, समझ नहीं आता कि क्या करूँ? राहुल बोला, मुझे बताया तो होता, मैं कोई गैर नहीं, मिलकर कुछ हल निकल लेते। गाँव जाकर राहुल ने माँ को बताया तो माँ गुस्सा हो गई,

ताई जी कोई साथ लेकर आना चाहिए था,  अपनों के बीच रहेंगी तो सब ठीक हो जायेगा। अगले दिन राहुल अपनी पत्नी और माँ को लेकर वृद आश्रम गया. राहुल ने रोहन को फोन करके बता दिया की ताई जी को अपने साथ गाँव लेकर जा रहे हैं. 

राहुल ने सारी फॉर्मेलिटी पूरी कर दी और ताई जी कोई लेकर गाँव आ गया. 

 गांव पहुंच कर ताई जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई और राहुल भी बहुत खुश था

सब लोग खाना खाने बैठे ही थे कि तभी वहाँ पर रोहन भी आ गया. रोहन नज़रे झुकाये सबके साथ बैठकर खाना खाने लगा और तिरछी नज़रो से माँ को मुस्कुराते हुऐ देख रहा था. सबको हस्ते मुस्कुराते देख कर रोहन को परिवार के साथ खुशी का अहसास हो गया. 

अचानक रोहन उठा और अपनी पत्नी को फोन लगाया और बोला, कि मैं नौकरी छोड़ रहा हूँ और माँ के साथ गाँव आ गया हूँ ओर अब यही रहूँगा।  तुम अगर मेरे साथ रहना चाहती हो तो गाँव आ जाना. सब लोग रोहन को देख और सुन रहे थे

और वो रोता हुआ बोल रहा था, मुझ से बहुत बडी गलती हो गई, मैंने अपनों को छोड़ कर गैरो पर भरोसा किया। मॉ जी, चाची जी मुझे माफ़ कर दो, अब हम सब साथ ही रहेंगे। अब मुझे समझ आ गया है कि  “सबसे बड़ा धन : परिवार होता है. 

अगले दिन रोहन कि पत्नी भी गाँव वापस आ गई. उसकी आंखों में पशचाताप के आँसू थे।

बेटा पत्नी के दबाव में आकर ज्यादा पैसा कमाने के लिए शहर का रुख कर लेता है, और ठोकर खाने के बाद ही परिवार की अहमियत समझ आती है.

अब दोनों परिवार गाँव मैं एक साथ रहते और खेती करते है.

साप्ताहिक विषय

सबसे बड़ा धन: परिवार 

लेखक

एम पी सिंह

(Mohindra Singh)

स्वरचित, अप्राकृतिक 

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