अविनाश के घर दूसरी बार भी लड़की ने जन्म लिया तो एक बार तो सब उदास हो गए, लेकिन बच्ची की दादी आरती खुले विचारों वाली महिला थी। उसने कहा, ये तो हमारे लिए खुशी का मौका है, लक्ष्मी आई है। धन्यवाद करो उपर वाले का जिसने इस सूने आंगन में खुशिंया भर दी। लड़का हो या लड़की , औलाद का सुख तो मिला , आज भी न जाने कितने लोग है जो इस सुख से वंचित है।
अविनाश के पहले पांच साल की अविका थी, दूसरी बार लड़के की चाह होनी स्वाभाविक थी, लेकिन मां की बातें सुनकर उसने आप को संभाला और बच्ची को देखते ही उसका मन मयूर नाच उठा। परियों जैसी सुंदर जैसे दूध में नहाई हो, तीखे नैन नक्श और बिल्कुल स्वस्थ।
उसकी मां हमेशा कहती है कि बच्चा स्वस्थ और हर अंग सही सलामत हो तो प्रभु की कृपा। अविका भी खूबसूरत थी और ये तो उससे भी दो कदम आगे। हों भी क्यों ना उनकी मां कनिका भी तो बहुत सुंदर है और अविनाश की कदकाठी भी हीरो जैसी है । दूसरी बच्ची का नाम रखा अंबिका। अविनाश की प्राईवेट नौकरी थी, साधारण सा लेकिन संस्कारों वाला परिवार था, जैसे एक आम मिडल क्लास परिवार होता है।
धीरे धीरे अविका और अंबिका बड़ी होती गई। जवानी आई तो खूबसूरती और निखर गई। अवनि की पढ़ाई पूरी होते ही शादी की चिंता हो गई। आज भी हमारे समाज में लड़की की शादी बिना धन के होना बहुत मुश्किल है। लेकिन अवनि की किस्मत शायद अच्छी थी, किसी सहेली की शादी में एकम् ने उसे देखा तो पहली नजर में ही दिल हार गया। एकम् अवनि की सहेली के भाई का दोस्त था और बहुत अमीर भी था।
जब एकम् का रिश्ता आया तो अविनाश और कनिका दुविधा में पड़ गए कि क्या किया जाए, क्योंकि दोनों घरों की हैसियत में जमीन आसमान का अंतर था, लेकिन जोड़िया तो उपर से ही बन कर आती है।
सबने कहा अवनि तो बहुत किस्मतवाली है जो घर बैठे इतना बढ़िया रिशता आया और सादे से समारोह में विवाह सम्पंन हो गया। कुछ दिन बीतते ही सच सामने आ गया। एकम् एक नं का शराबी, नशेड़ी ,काम कोई करता नहीं था। वो तो बिजनैस काफी अच्छा था तो काम चल रहा था।
मां- बाप ने सोचा था कि शादी के बाद सुधर जाएगा। अपने से कमतर घर की सुंदर लड़की भी इसलिए जल्दी से पंसद कर ली कि और शादी भी कर दी कि कहीं लड़के के बारे में पता न चल जाए।अवनि की समझ में ही न आ रहा था कि वो क्या करे। साल बाद ही साहिल का जन्म और फिर रूपाली गोदी में आ गए। उसने किसी को भी एकम् के बारे में नहीं बताया था। सब कहते क्या किस्मत है अवनि की, सचमुच ही किस्मत वाली है, इतना अच्छा रईस घर बार , दो प्यारे बच्चे , गाड़ी बंगला, नौकर चाकर, मंहगे कपड़े, जेवर, क्या नहीं है।
लेकिन ये सिर्फ अवनि ही जानती थी कि वो कितनी खुश है। एकम् का रात देर से आना और सुबह दोपहर तक सोते रहना, बाकी समय आवारागर्दी , होटलों क्लबों में पार्टियां।कभी पति पत्नी इकट्ठे घूमने नहीं गए। किसी पारिवारिक उत्सव में भी अगर सबके साथ गया होगा तो बीच से ही निकल लेता। एकम् के मां बाप बहुत अच्छे स्वभाव के थे, कई बार वो अपने आप को दोषी भी ठहराते लेकिन अब क्या हो सकता था। बिजनैस का काम काज अब अवनि ने भी सीखना शुरू किया था। उसके ससुर का बिल्डिंग बनने में लगने वाले लोहे वगैरह के सामान की सप्लाई का होल सेल का बहुत अच्छा काम था। अपना आफिस और स्टाफ सब था, लेकिन मालिक को पूरी नज़र तो रखनी पड़ती है। एकम् कभी आफिस आता भी तो उसका मन न लगता। अवनि के ससुर की भी हैल्थ अब कुछ खराब ही रहती तो अवनि ही एक दो दिन बाद आती और आन लाईन तो रोज ही खबर रखती।
सात साल हो गए, बच्चे स्कूल जाने लगे तो वो उसी में रम गई, लेकिन पति का प्यार, साथ कभी न मिला। वो उसे किसी काम के लिए मना न करता और न कभी डांटता फटकारता लेकिन कभी प्यार से बात , प्रशंसा, भी न करता। अवनि का तो सजना धजना दूर, तैयार होने का भी मन न करता। आखिर किसके लिए लेकिन अब वो इन सब की आदी हो गई थी। इधर दो तीन साल से अंबिका की शादी करने की बात भी चल रही थी। पढ़ाई पूरी करने के बाद वो नौकरी करने लगी थी।घर वालों को वो शादी के लिए टाल रही थी, लेकिन कब तक।
एक बात और भी थी, जब एक बहन इतने बड़े घर की बहू हो तो दूसरी के लिए भी मां बाप वही चाहेगें। कहीं बात बन भी जाती लेकिन अंबिका मना कर देती। दोनों बहनों में मेल मिलाप, बातें होती थी लेकिन अवनि ने कभी अपना जख्म किसी को नहीं दिखाया । वैसे तो शादी के बाद एकम् ससुराल बहुत कम गया लेकिन जब भी थोड़ी देर के लिए गया तो चुपचाप ही रहा। अंबिका थोड़ी शरारती तबियत की थी, साली होने के हक से वो कई बार एकम् से मजाक कर लेती तो वो सिर्फ मुस्करा कर रह जाता। जब अंबिका पर घर वालों ने शादी के लिए दवाब डालना शुरू किया और उसने भी अपने पिताजी की गिरती तबियत को देखा तो उसने शादी करने का मन बना ही लिया।
दरअसल वो अपने सहकर्मचारी वरूण से ही प्यार करती थी। साधारण परिवार का वरूण तीन बहन भाईयों में सब से छोटा था। बड़ी बहन और भाई शादीशुदा थे और वरूण मां बाप के साथ रहता था। भाई की नौकरी दूसरे शहर में थी। पिता रिटायर थे, मां गृहणी थी, उनहें तो वरूण की पंसद पर कोई एतराज नहीं था, लेकिन अंबिका के मां बाप राजी नहीं थे।अंबिका के रिश्ते की बहन ने अपनी ससुराल की रिश्तेदारी में एक अमीर घर का रिश्ता सुझाया था, लड़के वालों की पहली शर्त थी कि लड़की नौकरी नहीं करेगी। अंबिका ने सारी बात अविका को बताई। अवनि ने अंबिका को कहा कि वो किसी के दवाब में न आए और अपनी पंसद से शादी करे। मां बाप को वो मना लेगी।
जब मां बाप से बात हुई तो वो कहने लगे कि अंबिका ऐसे ही वरूण से शादी की जिद पकड़े बैठी है। सारी उम्र पैसे जोड़ने में ही निकल जाएगी। तूं कितनी किस्मत वाली है, जो राज कर रही है। किस्मत तो इसका भी दरवाजा खटखटा रही है, लेकिन यही चुप बैठी है। अब अवनि कैसे बताए कि वो कैसी किस्मत वाली है। जो औरत पिया के मन को न भाए उससे अभागा कोई नहीं। आखिर अबिंका ने वरूण से शादी कर ली, मजबूरी में मां बाप मान गए। सब कहते है अवनि किस्मत वाली है, लेकिन अवनि जानती है कि किस्मत तो अंबिका की है जो उसे पति का प्यार मिला। धन दौलत से प्यार नहीं खरीदा जा सकता। काश कि उसकी हाथों की लकीरों में धन कम होता लेकिन प्यार होता।
दोस्तों माना कि पैसा बहुत कुछ है लेकिन किस्मत वाला वो है जिसकी हाथों की लकीरों में पैसा भले ही जरूरत जितना हो लेकिन ढ़ेर सारा प्यार हो।
विमला गुगलानी
चंडीगढ़।
विषय- किस्मत वाली