हा, हो गई हू मैं स्वार्थी… – तोषिका

“अरे दीपा जल्दी से मेरा टिफिन लेकर आओ, मुझे दफ्तर के लिए लेट हो रहा है।” रसोई घर में खड़ी दीपा को बाहर से दीपक की चिल्लाते हुए आवाज़ आई। तुरंत ही दीपा बाहर आई और टिफिन का डब्बा दीपक के हाथ में थमा दिया। तभी दीपक वहां से गुस्से में और अपने आप से बड़बड़ाता हुआ निकल गया।

आधे घंटे में वो दफ्तर पहुंचा और उसके गुस्से वाले मुंह को देख के उसका दोस्त रवि समझ गया कि आज फिर से घर में कुछ हुआ है।

रवि उसके पास जाके बैठ गया और बोला कि “अगर तुझे ये शादी नहीं करनी थी तो क्यों की शादी? ना तू खुश है उस रिश्ते में और ना ही तू दीपा से कुछ बात करके क्लियर कर रहा है।” तभी दीपक बोला “देख रवि मैं जानता हूं कि मुझे यह शादी के लिए मना कर देना चाहिए था, पर मैं क्या करता मेरी मां को भी यही गांव की लड़की पसंद आई और तू

जानता है कि मैं उनकी बात नहीं ताल सकता था। पिता जी के जाने के बाद उन्होंने ही मुझे अकेले पाला पोसा और बड़ा किया कि मैं आज यह बैठ के इस बड़ी कंपनी में काम कर पा रहा हू।”

दीपा और दीपक की शादी को 11 महीने होने को आए थे पर वो अभी भी दीपा को अपनी बीवी के रूप में स्वीकार नहीं कर पा रहा था क्योंकि वो ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी और दूसरा वो गांव से थी तो दीपक को लगता था कि उसकी वजह से उसका स्टैंडर्ड लो हो जाएगा साथ ही वो वेस्टर्न कल्चर के मामले में भी कुछ नहीं जानती थी।

दफ्तर से जब दीपक आया तो उसे रवि की बात ध्यान आई और सोचा कि आज वो उससे सारी बात बता देगा। टेबल पर खाना लगती दीपा, दीपक को उसके ख्यालों से वापस लाते हुए बोली “हाथ मुंह धोकर आ जाए फिर आपका गरम गरम खाना लगा दूंगी। दीपक बैठा ही था खाना खाने तभी दीपा को खड़ा देख कहा कि बैठो और तुम भी अभी खा लो, मुझे तुमसे कुछ बात भी करनी है।

दीपा यह बात सुन कर हक्का बक्का रह गई पर उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान भी थी क्योंकि 11 महीनों में यह पहली बार हुआ था कि दीपक ने खुद से आके उसको बैठने को कहा और साथ में खाना खाने को भी कहा। जैसे ही दीपा बैठी और खाने का एक निवाला मुंह में ले रही थी

तभी दीपक ने कुछ ऐसा बोला कि उसका निवाला हाथ से गिर गया। दीपक ने कहा “दीपा मैं जानता हूं कि तुम इस रिश्ते को अच्छे से निभा रही हो और इस घर को भी घर जैसा रख रही हो पर मुझे माफ करदो मैं यह रिश्ता और नहीं निभा पाऊंगा क्योंकि मैं तुमसे प्यार कभी कर नहीं पाऊंगा

और न तुम्हे खुश रख पाऊंगा। इसलिए मैं चाहता हु कि तुम इस रिश्ते से आगे बढ़ो और उस से शादी करो जो तुम्हे खुश रख सके। दीपा इन सब को सुनकर अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी कि उसके मन में इतने सारे सावल थे कि वो पूछना चाह रही थी पर उसकी आवाज जैसे गले में ही अटक गई हो।

अपनी बात रखने के बात दीपक अपने बर्तन देख के उठा ही था कि पीछे से अचानक से दीपा कि आवाज़ आई “एक मिनट” दीपक पीछे घुमा और दीपा तोड़ी तेज आवाज में पर अपना स्वर नरम रखते हुए बोली “हमारी शादी को 11 महीने हो गए है और आप यह मुझे अब बता रहे है कि आपको मैं पसंद नहीं थी और आप मेरे से अब कोई रिश्ता नहीं रखना चाहते?

यह सब आप मुझे शादी से ही पहले बता देते कम से कम मेरी जिंदगी बर्बाद तो नहीं होती। अब मैं अपने परिवार को क्या मुंह दिखाऊंगी? सारी दुनिया जो ताने कसेगी मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ उसका क्या? मैने आपको अपना पति पूरे दिल से तभी मान लिया था जब आपने शादी के लिए हा करी थी

और आप मुझे कह रहे है कि आपको यह रिश्ता नहीं रखना और आप मुझे अपनी पत्नी का दर्जा भी नहीं दे पाएंगे? अरे आप शहर में आ गए पढ़ने इसका मतलब ये तोड़ी है कि आप रिश्तों का मजाक बना के रख देंगे। दीपा के मन में और भी कई सवाल थे पर वो कुछ न बो पाई और रोते रोते अपने आप को गेस्ट रूम में बंद कर लिया।

दीपक को कुछ नहीं समझ आ रहा था क्योंकि उसने खुद दीपा का यह रूप पहली बार देखा था। तभी उसने रवि से बात करने का सोचा और उसको कॉल मिलाया। उधर से रवि बोला “हा दीपक कैसे हो? सब ठीक है ना? इतनी रात को कॉल किया? दीपक बोला हां सब ठीक है बस मैने आज सब कुछ जो भी मेरे मन में चल रहा था वो मैने उसे सब बता दिया है।

रवि ने बिना सोचे एक दम से बोला “फिर क्या कहा दीपा ने? दीपक से सारी बात साफ साफ बता दी। सारी बात सुनने के बाद रवि ने बोला ठीक है दीपक जैसे तुम्हारी मर्जी पर मैं बस यही बात कहूंगा कि तुमने जिस तरीके से दीपा को यह सारी बात बोली है उसमें उसकी भलाई से ज्यादा तुम्हारा स्वार्थ दिख रहा है।

अगले दिन जब दीपक उठा तो देखा दीपा अभी भी गेस्ट रूम में बंद है और आज खाने के लिए कुछ भी नहीं बनाया है। दफ्तर पहुंचने के बाद रवि ने दीपा के बारे में पूछा पर दीपक के पास उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था। उधर दीपा घर में दीपक के जाने के बाद कमरे से बाहर निकली और फिर नहा कर , पूजा पाठ करके अपने लिए खाने का कुछ बनाया

और सारा दिन वो बस अपने दिमाग में कल रात दीपक की सारी बातें दोहरा रही थी और इसी में कब शाम हो गई पता ही नहीं चला और उसने फिर ठान लिया कि अब वो सिर्फ अपने बारे में सोचेगी, पहले जैसी दिलदार और सीधी साधी दीपा से वो स्वार्थी दीपा बनेगी।

उस दिन से वो बस कमरे से तभी बाहर निकलती थी जब दीपक दफ्तर चला जाता था फिर तैयार होकर वो अपना खाना बना के अपने कमरे में चली जाती थी। इस सिलसिले को एक हफ्ता हो गया, न दीपक ने कुछ पूछा ना ही उसने कुछ बोला। इन एक हफ्ते में दीपा पूरी तरह से बदल गई थी

और यह सब देख के दीपक को कुछ अलग सा लगने लगा था, क्योंकि न अब सुबह वो दीपा की उठाने की आवाज़ सुनता न ही किच में खाना बनाते समय दीपा की चूड़ियों की खन खन सुनाई देती ना ही उसकी पायल का शोर सुनाई देता था। उस दिन दीपक को तोड़ा लेट हो गया

जाने में और दीपा अपने उसी समय कमरे से बाहर निकली तो उसको देख दीपक के होश उड़ गए थे। उसने पहली बार उसको इग्नोर किया और बिना कुछ बोले वहा से चली गई जैसे कि वो वहा अकेली रहती हो। यह सारी बातें उसने रवि को बताई और रवि ने तोड़ा सोचा और फिर बोला कि जब दिल टूटेगा तो भरोसा नहीं रहता पर तुम्हारे लिए मैं दीपा से एक बार

बात करूंगा। उस रात दफ्तर के बाद रवि, दीपक के साथ उसके घर आया। दीपक ने कहा कि वो गेस्ट रूम में हैं, रवि ने कमरे के बाहर नॉक किया और बोला “भाभी मैं रवि हू, दीपक का दोस्त आप मुझसे मिले भी थे एक बार। मुझे आपसे बात करनी है क्या मैं अंदर आ सकता हू?

अंदर बैठी दीपा को पता था कि क्या होगा पर वो घर आए मेहमान को नाराज़ नहीं करना चाहती थी इसीलिए उसने दरवाजा खोला और कहा “नमस्ते भैया! आइए अंदर आराम से बात कर लेते है। वो चाय के साथ कुछ खाने के लिए भी ले आई।

तभी रवि चाय पीते पीते बोला “भाभी मैं जानता हू कि दीपक ने आपको क्या क्या बोला है और मैं यह भी जानता हू कि आपको लग रहा होगा कि मैं आपको समझाने आया हू पर ऐसा नहीं है क्योंकि मैं जानता हु कि इसमें गलती दीपक की है और मैं यह भी जानता हू कि वो अपनी गलती माने गा भी नहीं क्योंकि वो बहुत जिद्दी है।

” तभी दीपा तोड़ी हल्की और रोने वाली आवाज में बोली ” अगर आप सब जानते है तो मुझे ये भी बता दीजिए कि अब मैं क्या करूं? अब मुझसे कोई और शादी भी नहीं करेगा। मैं कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं बची हू। इसमें मेरी क्या गलती थी कि मुझे इतनी बड़ी सजा मिल रही है। रवि यह सारी बाते बहुत ध्यान से सुन रहा था और फिर बोला “भाभी मैं जानता हू

कि आप को बहुत हर्ट हुआ है पर आप फिकर मत कीजिए। अपने मुझे भाई बोला है ना तो आपका यह भाई एक भाई का फर्ज भी निभाए गा और इस बारे में मैने आपकी सासुमा से भी बात कर ली है और वो हमारे इस प्लान में हमारा साथ देगी । और आज से इस प्लान का नाम है *”हा, हो गई हू मैं स्वार्थी”*।

दीपा उत्सुकता से बोली कैसा प्लान भैया? रवि बोला आप फिकर मत कीजिए और अपना सारा प्लान समझा दिया और फिर वो दीपा को बाएं बोलके जाने ही लगा कि दीपक ने पीछे से आवाज़ लगाई और बोला “रवि, तुम्हारी बात हुई क्या दीपा से? वो कुछ बोली? की कब वो जायेगी यहां से और मुझ से अलग होने के लिए मान गई वो?

रवि बोला कि मैं सब हैंडल कर लूंगा। मिलते है फिर कल। अगले ही दिन वो जब उठा तो उसने देखा कि लेट होगया है और फटाफट तैयार होने लगा तभी अचानक से उसकी नजर दीपा पर पड़ी जो पूजा कर रही थी। जब वो पूजा करके उठी दीपक भी बस निकलने को तैयार होगया था,

उसने दीपा को और दीपा ने दीपक को देखा और प्रसाद के लिए हाथ आगे कर ही रहा था कि दीपा उसके बगल से निकल गई जैसे कि वहां कोई कड़ा ही ना हो। दीपक उसको बस देखता रह गया अपनी आँखें बिना झपकाए और सोचने लगा कि दीपा कल के बाद पूरी तरह से बदल गई है। अब वो तैयार हो रही है, अपना श्रृंगार कर रही है और अब तो उसने देखना भी छोड़ दिया है दीपक की तरफ।

दफ्तर आते ही रवि को बुलाया और पूछा कि “तुमने ऐसा क्या बोल दिया कि वो इतना त्यार हो रही है और देख भी नहीं रही है मेरी तरफ” रवि मन ही मन मुस्कुराते हुए बोला “वही किया जो तुम चाहते की वो आगे बढ़ जाए। अब वो आगे बढ़ना

चाहती है तो वो तुम्हारी तरफ क्यों देखेगी और त्यार तो वो होंगी ही आज उनकी पहले डेट है। दीपक चुप था और फिर बोला चलो बढ़िया है। तभी रवि बोला”अरे मैं भी ना, दीपक मुझे ध्यान आया उन्होंने यह भी कहा था कि अब से वो कोई काम नहीं करेगी, ना घर का ना ही तुम्हारा।

दीपक को काफी अच्छा लग रहा था कि चलो अच्छा है दीपा से जल्द ही पीछा छूटेगा पर वो यह नहीं जानता था कि आगे उसको जो दिक्कतें आने वाली है वो कितनी बड़ी है। उधर दीपा भी रवि के कॉन्टैक्ट में थी और वो बिकलुक वैसे ही कर रही थी जैसा रवि बोल रहा था।

ऐसे ही दीपक के कुछ दिन खुशी में ही निकल गए पर वो अब बाहर का खा खा कर थक गया था और घर भी काफी गंदा होने लगा था। हर जगह धूल मिट्टी की परत जमना शुरू हो गई थी। तभी उसकी नजर पड़ी दीपा पर जो दिन भर दिन मॉडर्न होती जा रही थी और अब तो वेस्टर्न ड्रेसेज भी पहनना शुरू कर दिया था।

और आज उसकी डेट भी है तो उसके लिए वो वन पीस में जा रही थी और वो काफी सुंदर भी लग रही थी। यही सब देख कर दीपक को हल्की से चिढ़ हुई और वो पीछे से टोकता हुआ बोला कि इतना सजने से कोई तुम्हे पसंद नहीं करलेगा, बोलने का तरीका भी आना चाहिए। ये बात सुनके दीपा को गुस्सा आया पर अपने ऊपर कंट्रोल करते हुए बोली “जिसको

मुझे पसंद करना होगा वो करलेगा और मेरी सीरत को देख के पसंद करेगा सूरत को नहीं, और रही बात कपड़ों की तो मेरा मन है त्यार होने का और आपका कोई हक नहीं बनता कि आप कुछ बोले, वो हक आप पहले ही खो चुके है। ये सब बोल कर उसको बहुत हल्का लग रहा था जैसे कोई दिल से भारी पत्थर हटा दिया हो और मन ही मन में खुश होकर बोलने लगी *”हा, हो गई हू मैं स्वार्थी”*।

उधर दूसरी तरफ दीपक को कुछ नहीं समझ आ रहा था कि ये अभी क्या हुआ। पर दीपक इतना जिद्दी था कि वो आसानी से मानता नहीं कि उसकी गलती है। बस मन ही मन उसको आग लग रही थी कि संडे के दिन दीपा बाहर मज़े कर रही है और वो यहां पे घर का काम कर रहा है।

ऐसे ही घर का काम करते करते उसको शाम हो गई थी और वो बुरी तरह थक गया था। ऐसे ही ये उसके हर हफ्ते का बन गया था, सारा दिन ऑफिस का काम फिर छुट्टी वाले दिन घर का सारा काम । ये सब करते करते वो इतना थक जाता था कि उसको कही न कही लगने लगा था

कि दीपा कितनी मेहनत करती थी और वो भी बिना किसी शिकायत के। तभी दरवाजे पर घंटी बजी दीपक को लगा दीपा आई होगी पर वो गलत था। वहां दीपा नहीं रवि आया था, रवि जैसे ही अंदर आया उसने छेड़ते हुए दीपक को बोला “क्या बात घर के काम इतनी शिद्दत से हो रहे है”।

ये देखके दीपक बोला तुझे इतना पसंद है ये काम तो तू करले, एक तो ये दीपा पता नहीं अपने आप को क्या समझ रही है… तभी अचानक से रवि बीच में टोकते हुए बोला “यार दीपक हमें जिंदगी में सब कुछ नहीं मिल सकता

और ये तेरी ही इच्छा थी दीपा से अलग होना और अब वो आगे बढ़ रही है तो तुम्हे इसमें हालत लग रहा है? अब वो खुद अपने बारे में तोड़ा सोचने लग गई है तो वो स्वार्थी होगी और जो तुम कर रहे हो इतने समय से वो क्या सही था? क्या वो स्वार्थ नहीं था?”

दीपक हल्का सा शर्मिंदा था और उसके पास रवि को बोलने के लिए कोई शब्द भी नहीं था क्योंकि दीपक कही न कही जानता था कि वो गलत था। उसको अपने गलती का एहसास हो रहा था पर समझ नहीं आ रहा था कि बोले तो कैसे बोले?उसने इस बारे में पूरा 2 दिन सोचा और बोला कि वो माफी मांगेगा और अपने रिश्ते को दीपा के साथ एक और मौका देगा।

तो जब दीपा शाम को बाहर से घर आई उसने दीपा से कहा “दीपा मैं जानता हू कि मेरी गलती की कोई माफी नहीं है पर क्या तुम मुझे एक और मौका दोगी मेरी गलती सुधारने का? दीपा कुछ बोले उससे पहले ही दीपक फिर से बोला कि मैं जानता हू तुम स्वार्थी नहीं हों और मेरी दीपा जैसी है वैसे ही अच्छी है।

दीपा यह सब सुनकर हैरान थी पर उसकी आंखों में खुशी के आंसू भी थे। तभी अचानक से माहौल को हल्का करने के लिए रवि आया और उन दोनों का मुंह मीठा कराया और खुद का भी किया और दीपक की मां को कॉल करके अपने प्लान : *”हा, हो गई हू मैं स्वार्थी*” सक्सेसफुल रहा। सब बहुत खुश हुए। फिर एक साल के बाद उनकी एक छोटा से बेटा भी हुआ जिसका नाम उन्होंने रवि रखा।

लेखिका 

तोषिका

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