**घरेलू औरत की अदृश्य कमाई** – विनीता सिंह

*”जिस पत्नी को वो ‘अनपढ़’ और ‘बोझ’ समझकर घर से निकालना चाहता था, जब माँ ने उसके त्याग और समर्पण का ‘हिसाब’ डायरी खोलकर दिखाया, तो लाखों कमाने वाले बेटे को अपनी ही दौलत कौड़ियों के भाव लगने लगी।”*

“बस बहुत हो गया मां! मैं अब इस अनपढ़ औरत के साथ एक छत के नीचे नहीं रह सकता। मुझे तो समझ नहीं आता कि आपने मेरी शादी इस गंवार से क्यों करवा दी? न इसे ढंग से कपड़े पहनने का सलीका है, न चार लोगों में बात करने का। मेरी तो नाक कटवा दी है इसने मेरी कंपनी की पार्टी में।”

विकास ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ चाय का कप जोर से टेबल पर पटका। चाय छलककर मेजपोश पर गिर गई, ठीक वैसे ही जैसे सुमन के अरमान बिखर गए थे।

कोने में खड़ी सुमन ने अपनी साड़ी का पल्लू कसकर पकड़ रखा था। उसकी आँखों में आंसू थे, लेकिन वे बाहर निकलने से डर रहे थे। विकास का गुस्सा कोई नई बात नहीं थी, लेकिन आज उसने हद पार कर दी थी। आज विकास की कंपनी की एनिवर्सरी पार्टी थी और सुमन ने सादगी से एक साड़ी पहनी थी। वहां विकास के मॉडर्न कलीग्स की पत्नियों के बीच सुमन थोड़ी अलग लग रही थी। बस, घर आते ही विकास का ज्वालामुखी फट पड़ा था।

सावित्री देवी, विकास की मां, अपनी आराम कुर्सी पर बैठी रामायण पढ़ रही थीं। बेटे का शोर सुनकर उन्होंने चश्मा उतारा और शांति से उसे देखा।

“क्या हुआ विकास? क्यों घर सर पर उठा रखा है?”

“मां, आप इसे समझाती क्यों नहीं? आज मिस्टर खन्ना की वाइफ पूछ रही थीं कि ‘तुम्हारी वाइफ क्या करती हैं?’ और इसने क्या कहा? ‘मैं घर संभालती हूं।’ मां, कितनी शर्मिंदगी हुई मुझे। लोग चाँद पर पहुँच रहे हैं और ये घर में दाल-चावल बना रही है। मुझे डिवोर्स चाहिए। मुझे मेरे लेवल की लड़की चाहिए।”

सुमन सिसक पड़ी। “जी, मैंने तो वही कहा जो सच था…”

“चुप रहो तुम!” विकास चिल्लाया। “तुम्हारी वजह से मेरा प्रमोशन रुक जाएगा। मेरी इमेज डाउन हो रही है।”

सावित्री देवी उठीं। उनकी चाल में एक अजीब सी गंभीरता थी। वे विकास के पास आईं और बोलीं, “बेटा, शांत हो जा। तू सही कह रहा है। सुमन तेरे लायक नहीं है। तू इतना बड़ा ऑफिसर और ये मामूली सी घरेलू औरत। जोड़ी जम नहीं रही है।”

सुमन ने अविश्वास से अपनी सास की ओर देखा। मां जी भी?

सावित्री देवी ने सुमन की ओर मुड़कर कहा, “बहू, तू जा अपने कमरे में। अपना सामान पैक कर ले। आज शाम को ही फैसला हो जाएगा। मैं नहीं चाहती मेरा बेटा घुट-घुट कर जिए।”

विकास के चेहरे पर विजय की मुस्कान आ गई। “थैंक यू मां। मुझे पता था आप मुझे समझोगी।”

दोपहर बीत गई। घर में मरे जैसा सन्नाटा था। सुमन अपने कमरे में रो रही थी और बैग में अपने थोड़े बहुत कपड़े रख रही थी। विकास अपने लैपटॉप पर काम कर रहा था, बहुत खुश कि आज इस मुसीबत से छुटकारा मिल जाएगा।

शाम को 5 बजे, सावित्री देवी ने विकास को ड्राइंग रूम में बुलाया। उनके हाथ में एक डायरी और कैलकुलेटर था। सुमन भी सिर झुकाए वहां खड़ी थी, हाथ में अपना सूटकेस लिए।

“बैठो विकास,” सावित्री देवी ने आदेश दिया।

“हां मां, बोलिए। कब भेजना है इसे मायके?” विकास ने बेपरवाही से पूछा।

“भेज देंगे। पहले हिसाब तो कर लें,” सावित्री देवी ने डायरी खोली।

“हिसाब? कैसा हिसाब मां?”

“देख बेटा, तू कॉर्पोरेट में काम करता है। वहां हर चीज का नोटिस पीरियड होता है, सेवरेंस पैकेज (Severance Package) होता है। तू सुमन को नौकरी से निकाल रहा है—हाँ, पत्नी का दर्जा तो तूने इसे कभी दिया नहीं, तो मैं इसे नौकरी ही मानती हूं—तो उसका हिसाब तो करना पड़ेगा न?”

विकास हंसा। “मां, आप भी क्या मजाक करती हैं। ये घर की औरत है, कोई नौकरानी थोड़ी है जो तनख्वाह मांग रही है।”

सावित्री देवी का चेहरा सख्त हो गया। “चुपचाप बैठ और सुन।”

उन्होंने डायरी के पन्ने पलटे।

“पिछले 5 सालों से सुमन इस घर में है।

1. **कुक (Cook):** सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक, तुम्हारी पसंद का नाश्ता, टिफिन, रात का डिनर। अगर हम बाहर से कुक रखते जो इतना हाइजीनिक और टेस्टी खाना बनाए, तो कम से कम 15,000 महीना लेता। 5 साल का हुआ—9 लाख रुपये।

2. **हाउसकीपर (Housekeeper):** घर की सफाई, कपड़े धोना, प्रेस करना। तेरे मोज़े से लेकर मेरी साड़ियों तक। 5,000 महीना। 5 साल का—3 लाख रुपये।

3. **नर्स (Nurse):** पिछले साल जब तुझे पीलिया हुआ था और दो साल पहले जब तेरे पापा को हार्ट अटैक आया था। सुमन ने रात-रात भर जागकर सेवा की। अस्पताल में नर्स एक रात का 2,000 लेती है। इसने तो महीनों सेवा की। मैं कम से कम 2 लाख जोड़ रही हूं।

4. **इवेंट मैनेजर और पीआर (PR):** तेरी बहन की शादी में तूने सिर्फ पैसे दिए थे। सारी खरीदारी, मेहमानों की खातिरदारी, शगुन के लिफाफे, सब इसने संभाले। तेरे बॉस के घर दीवाली पर क्या गिफ्ट जाएगा, ये भी यही याद दिलाती है। इसकी कंसल्टेंसी फीस—1 लाख रुपये।

5. **काउंसलर (Counselor):** जब भी तू ऑफिस से थक कर आता है और अपना गुस्सा इस पर उतारता है, ये चुपचाप सुनती है। तेरी फ्रस्ट्रेशन झेलती है। एक थेरेपिस्ट एक सेशन का 1000 लेता है। ये तो रोज़ झेलती है। इसका मैं 2 लाख जोड़ रही हूं।”

सावित्री देवी ने कैलकुलेटर खटखटाया।

“कुल मिलाकर हुए 17 लाख रुपये। इसमें मैंने ‘प्यार’ और ‘अपनापन’ नहीं जोड़ा है क्योंकि उसकी कीमत तू चुका नहीं पाएगा। तो विकास, अभी चेक काट 17 लाख का। और हां, इसके बाद हर महीने तुझे तीन लोगों को रखना पड़ेगा—कुक, नौकरानी और मेरे लिए नर्स। उनका खर्चा अलग से 30-40 हजार महीना। अगर तुझे मंजूर है, तो अभी चेक दे और सुमन को विदा कर।”

कमरे में सन्नाटा पसर गया। घड़ी की टिक-टिक हथौड़े जैसी लग रही थी। विकास के माथे पर पसीना आ गया था।

“मां… ये कैसा हिसाब है? पत्नी का काम तो होता ही है घर संभालना,” विकास ने धीमी आवाज में कहा।

“और पति का काम होता है सम्मान देना,” सावित्री देवी ने कड़क आवाज में कहा। “तूने उसे ‘गंवार’ कहा? विकास, तूने एमबीए किया है, बड़ी डिग्री है तेरे पास। लेकिन जीवन का गणित तुझे इस ‘अनपढ़’ औरत ने ही सिखाया है। जिस दिन तू ऑफिस की प्रेजेंटेशन में बिजी था, उस दिन घर पर तेरे पिता की अंतिम सांसें चल रही थीं। वो सुमन थी जिसने उन्हें संभाला, एम्बुलेंस बुलाई और तुझे डिस्टर्ब किए बिना सब संभाला। अगर उस दिन ये न होती, तो तू अपने पिता का अंतिम चेहरा भी न देख पाता।”

सावित्री देवी की आवाज भर्रा गई।

“तुझे लगता है तेरी कामयाबी सिर्फ तेरी है? अरे मूर्ख, जिस घर की नींव मजबूत होती है, वही इमारत ऊंची जाती है। सुमन इस घर की नींव है। इसने तुझे घरेलू चिंताओं से मुक्त रखा, इसलिए तू ऑफिस में तरक्की कर पाया। तू ‘पैसे’ कमा कर लाया, लेकिन इसने उस पैसे को ‘बरकत’ बनाया।”

विकास की नजरें झुक गईं। उसे वो दिन याद आने लगे जब वो रात को देर से आता था और सुमन गर्म खाना लेकर इंतजार करती थी। जब वो बीमार पड़ता था, तो सुमन उसके सिरहाने बैठी रहती थी। उसने कभी सुमन को एक इंसान समझा ही नहीं, बस एक सुविधा समझा था।

सावित्री देवी ने सुमन का हाथ पकड़ा। “चल बेटी, उठा अपना सामान। मैं भी तेरे साथ चलूंगी। जिस घर में बहु का मान नहीं, वहां बुजुर्गों का भी सम्मान नहीं हो सकता। हम दोनों हरिद्वार चले जाएंगे। ये बैरिस्टर साहब अपनी मॉडर्न दुनिया में खुश रहें।”

सुमन ने रोते हुए अपनी सास के पैर पकड़ लिए। “नहीं मां जी, आप कहीं नहीं जाएंगी।”

तभी विकास घुटनों के बल बैठ गया। उसने सुमन का सूटकेस पकड़ लिया। उसकी आँखों से आंसू टपक रहे थे।

“मां… मुझे माफ कर दो। सुमन… मुझे माफ कर दो। मैं सच में अंधा हो गया था। चकाचौंध में मुझे हीरे की परख नहीं रही। मुझे लगा था कि सूट-बूट और इंग्लिश बोलना ही क्लास है, लेकिन असली क्लास तो संस्कारों में होती है जो तुम्हारे पास है सुमन।”

विकास ने सुमन का हाथ अपने हाथों में लिया। “आज तक मैंने तुम्हें सिर्फ अपनी पत्नी समझा, वो भी नाम के लिए। लेकिन आज मां ने मुझे आईना दिखा दिया। तुम मेरी अर्धांगिनी हो। अगर तुम नहीं, तो मैं कुछ भी नहीं। प्लीज, मुझे छोड़कर मत जाओ।”

सुमन का दिल पसीज गया। भारतीय नारी का हृदय वैसे भी क्षमा का सागर होता है। उसने विकास को उठाया और अपनी साड़ी के पल्लू से उसके आंसू पोंछे।

सावित्री देवी ने डायरी बंद की और टेबल पर रख दी। उनके चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान थी। उन्होंने कहा, “विकास, याद रखना, औरत घर की शोभा सजावट की चीजों से नहीं, अपने संस्कारों और त्याग से बढ़ाती है। आज के बाद अगर कभी सुमन की आँखों में आंसू आए, तो वो डायरी फिर खुलेगी।”

विकास ने कान पकड़कर कसम खाई। उस रात घर का माहौल बदल गया था। डायनिंग टेबल पर जब सुमन ने खाना परोसा, तो विकास ने पहली बार उसे अपने साथ कुर्सी पर बैठाया और कहा, “आज तुम भी साथ खाओगी। और हां, वो साड़ी तुम पर बहुत अच्छी लग रही थी।”

सुमन शर्मा गई। सावित्री देवी ने मन ही मन भगवान को धन्यवाद दिया। घर टूटने से बच गया था, और एक बेटे को समझ आ गया था कि घर की असली लक्ष्मी तिजोरी में रखा धन नहीं, बल्कि घर को संभालने वाली स्त्री होती है।

**लेखक का संदेश:**

अक्सर हम गृहिणियों (Housewives) के काम को “कुछ नहीं करती” कहकर नकार देते हैं। हम भूल जाते हैं कि उनका काम 24×7 का है, जिसमें न कोई छुट्टी है और न कोई सैलरी। उनका सम्मान कीजिये, क्योंकि जिस दिन उन्होंने काम बंद कर दिया, आपकी तथाकथित ‘सफल’ दुनिया ताश के पत्तों की तरह बिखर जाएगी।

**क्या इस कहानी ने आपके दिल को छुआ?**

क्या आपके घर में भी कोई ऐसी ही ‘सुमन’ है जो निस्वार्थ भाव से सबकी सेवा करती है? क्या उसे वो सम्मान मिलता है जिसकी वो हकदार है? अपने विचार कमेंट में ज़रूर साझा करें।

**“अगर इस कहानी ने आपकी आँखों को नम किया और सोच को नई दिशा दी, तो लाइक, कमेंट और शेयर ज़रूर करें। अगर आप इस पेज पर पहली बार आए हैं, तो ऐसी ही दिल को छू लेने वाली और मार्मिक पारिवारिक कहानियाँ पढ़ने के लिए पेज को फ़ॉलो करें। धन्यवाद!”**

लेखिका : विनीता सिंह

error: Content is protected !!