निखिल ने निशा को एक शादी में देखा था लंबी छर हरी सांवली सलोनी निशा की बड़ी-बड़ी शर्मीली आंखों ने उसे जैसे सम्मोहित कर लिया। पूरे समय वह उसे ही देखता रहा और अवसर पाते ही बोला -हेलो मिस ब्यूटीफुल ! क्या मैं आपका नाम जान सकता हूं? निशा ने हैरानी से उसे देखा और बोली मेरा नाम निशा है वैसे अगर आपने मुझे मिस ब्यूटीफुल कहा है तो यह अवश्य ही एक बहुत बड़ा मजाक है ।अरे नहीं निशा जी ,आप वास्तव में बहुत खूबसूरत हैं । आपके सांवले चेहरे पर बड़ी-बड़ी काली आंखें और यह मोहक मुस्कान !भगवान श्री कृष्ण का सांवला सौंदर्य ऐसा ही होगा जिस पर सारा संसार मोहित है । अपनी ऐसी प्रशंसा सुनकर निशा शर्मा कर वहां से चली गई ।निखिल ने मां से कहकर निशा के बारे में सब पता करवा लिया और कह दिया कि मैं शादी करूंगा तो निशा से ही। निशा एक बड़े व्यावसायिक पिता की बेटी थी ,जबकि निखिल एक साधारण सी नौकरी करता था ।यह बात निशा भी जान गई थी लेकिन निखिल एक सुदर्शन युवक था और उसने स्वयं निशा को पसंद करके उसका हाथ मांगा था तो निशा के परिवार वालों ने भी रिश्ता स्वीकार कर लिया। निखिल और निशा एक दूसरे को पाकर बहुत खुश थे। निशा तो सातवें आसमान पर उड़ रही थी ।अब तक कई लड़के उसके सांवले रंग के कारण शादी से इनकार कर चुके थे । वहीं निखिल उसे सर आंखों पर रखता, उसके सारे नाज़- नखरे उठाता ,उसकी हर इच्छा पूरी करता था । अमीर पिता की बेटी पति का इतना प्यार पाकर अहंकार से भर गई ।अब वह अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझती थी ।हर समय आइने के सामने खड़ी होकर सजने संवरने में लगी रहती या फोन पर सहेलियों से गप्पें लगाती। घर के काम में उसे कोई रुचि नहीं थी ।पति ऑफिस से आता तो उसके लिए चाय तक न बनाती । छुट्टी के दिन शॉपिंग करना और घूमने यही उसकी दिनचर्या थी। निखिल छुट्टी के दिन आराम करना चाहता तो वह मुंह फुला कर बैठ जाती निखिल कुछ स्पेशल खाने की फरमाइश करता तो कहती होटल से मंगवा लो। निखिल ने उसे प्यार से समझाना चाहा, पर वह झगड़ा करने लगती और बात-बात पर उसको गरीब होने का ताना देती ।निखिल उसे खिंचा खिंचा रहने लगा एक समय ऐसा आ गया कि दोनों में बातचीत भी बंद हो गई ।निखिल की मां सुमित्रा जी सब देख रही थी ।बहु बेटे के बीच अनबन बढ़ती देख उन्हें चिंता हुई ।वह जानती थी गलती दोनों की है । निखिल ने पहले तो प्यार में पत्नी की जायज नाजायज मांगों को पूरा किया जिससे उसमें अहंकार की भावना आ गई कि मैं जैसा चाहूंगी वैसा ही होता रहेगा मैं बड़े घर की बेटी हूं मैं किसी के आगे झुकने वाली नहीं । निखिल लाचार था तीर हाथ से निकल चुका था ।सुमित्रा जी ने निशा की मां से सलाह करके यह तय किया कि वे निशा को कुछ दिनों के लिए मायके बुला लें। निशा की भाभी सविता बहुत मिलन सार थी वह दिखने में भी बहुत सुंदर थी उसके पिता बहुत बड़े व्यापारी थे विदेश तक उनका व्यापार फैला था पर उसमें घमंड बिल्कुल नहीं था भाभी ने बड़े प्यार से निशा का स्वागत किया ।सास ससुर के प्रति उसका व्यवहार बहुत सम्मानजनक था ।वह अपने पति का भी बहुत ख्याल रखती थी ।घर में सब सविता से प्यार करते थे निशा की मां तो हर समय उसकी सराहना करती रहती। आखिर एक दिन निशा ने पूछ ही लिया – मां घर में सब भाभी की इतनी तारीफ करते हैं आखिर ऐसा क्या है उनमें ? उसमें अहंकार नहीं है बेटी , मां ने कहा ।उसे ना अपने मायके की अमीरी का घमंड है ना अपनी खूबसूरती का । वह सब को यथा योग्य सम्मान देती है ।एक तुम हो जो बेवजह के अहंकार में अपने पति और ससुराल वालों से दूरी बनाए रखती हो ।निशा को अपनी गलती समझ आ रही थी परंतु उसका अहंकारी मन अपनी गलती स्वीकारने को तैयार नहीं था। निशा की मां से बात करके सुमित्रा जी ने निखिल को निशा को लिवाने के लिए भेजा , निशा घर आ गई ।उसके व्यवहार में कुछ सकारात्मक परिवर्तन था। मौका देखकर सुनीता जी ने उसे समझाया – देखो बहू निखिल तुमसे कितना प्यार करता है हमने तुम्हें बेटी की तरह रखा है पर बेटा कोई भी रिश्ता एक तरफा नहीं निभाया जा सकता। तुम अपने पैसे और रूप के घमंड में चूर रही ।देखो बहू घर बचाना है तो अहंकार को छोटा करना होगा ।निखिल तुझे बहुत प्यार करता है । तुम उसकी भावनाओं को समझो उसकी परेशानियों को साझा करो। यह तुम्हारा घर है,हम सब तुम्हारे अपने हैं सास की प्यार भरी समझाइश का अच्छा असर पड़ा। निशा ने उनके दोनों हाथ अपने हाथ में लेकर कहां – मां अब जैसा आपने कहा है मैं वैसा ही करूंगी मुझे मेरा निखिल वापस चाहिए । जरा पीछे मुड़कर तो देखो मैं तो कब से तुम्हारी वापसी का इंतजार कर रहा हूं निशा ! निखिल की आवाज सुनकर निशा ने शर्मा कर सास के आंचल में मुंह छुपा लिया
नीलम गुप्ता