प्रिया प्रिया कहा मर गई तुमने जो आज गलती की है ना उस गुनाह की कोई माफी नहीं है।मां जी क्या हुआ आप ऐसा क्यों कह रही है मैने ऐसा क्या कर दिया।तुमने तुमने मेरा विश्वास तोड़ा है सबके खिलाफ जा कर मैने तुम्हारा साथ दिया मेरे बेटे के खिलाफ खड़ी हो गई और तुम मेरी ही आंखों में धूल झोंकती रही।
नहीं मैने तो कुछ नहीं किया प्रिया की आंखें नीची थी और जुबान लड़खड़ा रही थी।बोलो सच बोलो शारदा चिल्लाई हा मां मैने गुनाह किया आदर्श की बेरुखी के कारण मैं अनमोल की तरफ आकर्षित हो गई और अनजाने ही उसकी तरफ बढ़ गई मुझे माफ करदो। और अब मै अनमोल का अंश अपने पेट में ले कर घूम रही हूं।
मां वो मुझे अपनाना चाहता है।मुझे आदर्श से तलाक दिलवा दो ताकि मैं अनमोल के पास जा सकू।मां मुझे माफ कर दो प्लीज़। कोई माफी नहीं है तुम्हारे लिए तुमने मेरा विश्वास तोड़ा है फिर भी तुम्हे बेटी माना है लो ये डाइवोर्स पेपर जो आदर्श खुदी ही दे गया है जाओ यहां से चली जाओ।
प्रिया अंधेरे की तरफ बढ़ती है पर्दा गिरता है मंच पर तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई देती हैं सब तारीफ करते हैं वाह नियति और गरिमा क्या एक्टिंग की तुमने गरिमा तुम तो सास के रोल में जम रही थी और नियति तुम्हारे क्या ही कहने पति के बिना किसी और के साथ राधा पागल हो क्या ये तो प्ले था अरे हा यार मै तो ऐसे ही कह रही थी
सोच के तो बोला कर नियति झल्लाई सभी को अटपटा लगा खुश मिज़ाज नियति आज ऐसा व्यहवार कर रही है और साथ ही वो पार्टी के लिए भी ना रुकी और गाड़ी में बैठ गई और आज से 20 साल पहले वाली नियति जो तब नलिनी थी और राघव के साथ उसका ब्याह हुआ था नलिनी इतनी सुंदर थी
कि राघव उसके आगे पीछे घूमता एक छोटी सी साड़ी की दुकान पर नौकरी करता था। सास शांति देवी बोलती सारा दिन बीवी के आगे पीछे करता रहता है काम भी ढंग से करा कर।नलिनी गरीब घर की बेटी थी इसलिए उसकी शादी राघव से हुई बाप पर चार बच्चों की जिम्मेदारी थी क्या करता वो भी नलिनी इतनी सुंदर थी
जैसे कि हाथ लगा मैली हो जाए वो ख्वाब भी बड़े ऊंचे ऊंचे देखती थी जब दोनों बाहर निकलते तो लोग कह ही देते लंगूर के हाथ हूर लग गई।एक साल बाद बेटे विवेक का जन्म हुआ सास ने ही बच्चे को पाला पोसा।अब तो नलिनी को और लगता वो अभावों में जी रही हैं वो चिड़ी चिड़ी रहती।
राघव उसे खुश रखने की कोशिश करता पर वो सिर्फ अपने में ही लगी रहती।तभी नलिनी के भाई की शादी ठहर गई और वो अपने मायके आ गई।उसके भाई मदन की गांव के आवारा लड़कों से बहुत पटती थी जो गुंडा गर्दी में एक no थे।उन्हीं में गांव के मुखिया का बेटा राजन भी आया जो बम्बई रहता था और उसकी थोड़ी फिल्म और थिएटर में जन पहचान थी
उसने नलिनी को देखा तो उसका दिल उसी में अटक गया वो घर में किसी ना किसी बहाने आता और नलिनी को देखता नलिनी ने भी नोटिस किया।उसने मदन से पूछा ये कौन है अरे ये नलिनी जीजी है।नलिनी उसके सामने बचपन की तस्वीर उभर आई तब तो वो साधारण सी लगती थी अब वो कितनी खूबसूरत हो गई है।
पूरी शादी वो घर आता और नलिनी को देखता नलिनी से बात करता उसने नलिनी से कहा तुम इतनी सुंदर हो यहां गांव में क्या कर रही हो चलो मेरे साथ शहर चलो तुम्हारी जिंदगी बदल दूंगा।नलिनी बोली मै कैसे जा सकती हूं पति बच्चा परिवार ।शादी वाले दिन तो नलिनी कहर ढा रही थी
लाल रंग का लहंगा बनारसी दुपट्टा कमर पर फूलों की छोटी राजन ने उसकी बहुत सारी तस्वीरें ली और उन्हें अपने प्रोड्यूसर दोस्त को भेज दिया।शादी खत्म हो गई मन मसोस कर नलिनी फिर अपने ससुराल आ गई।घर आकर भी वो राजन के बारे में सोचती कितना ध्यान रखता था मेरा नई नई चीज देता और जब उसने राघव को देखा था
तो वो बोला था कि ये कौवा कैसे हंसिनी को ले उड़ा।15 दिन हो गए बाल थे नलिनी को आए उसने मन में सोच लिया था कि मुझे यही सड़ना है वो सब तो राजन यूहीं दिल्लगी में कह रहा था कि तुम तो हीरोइन बन सकती हो।एक सुबह राघव के जाने के बाद नलिनी अंदर कमरे में थी तो सास की आवाज आई बहु तेरे मायके से कोई आया है।
मेरे मायके से आती हूं सामने राजन को देख नलिनी चौक गई।बोली तुम यहां वो बोला हा तुमसे जरूरी बात करनी है।सास बोली बहु चाय नाश्ता करवा मै तब तक लाला लो के ले मंदिर हो आऊ।नलिनी उसे अंदर लाई वो बोला नलिनी मैने तुम्हारे फोटो अपने दोस्त को भेजे थे वो तुम्हे अपने सीरियल में लेना चाहता है तुम चलो मेरे साथ।
पागल हो मै कैसे जा सकती हूं तो क्या यही पड़ी रहोगी बेवकूफों कि तरह उस बंदर के साथ। मेरा बेटा परिवार नलिनी बोली। क्या बेटा क्या परिवार तब प्रसिद्ध हो जाओगी तो ये सब जी हजूरी करेंगे।ये टिकट है आज रात का मै 10 बजे मंदिर के कोने पर इंतजार करूंगा चलना हो तो आ जाना नहीं तो मरो यही पर और मुझे भी भूल जाना पर मै तुम्हे नहीं भूल पाऊंगा
तुम मेरी जिंदगी हो वो उसका गाल चूम चला गया।नलिनी वही बैठ गई वो सोच रही थी क्या करूं 18 की बरस में शादी 19 में मां 20 साल की नलिनी ने आज पहली बार इस तरह महसूस किया था उसे अपना सपना दिख रहा था।जब वो छोटी थी तो एक बार दुकान पर सामान लेने गई वहां टीवी पर कुछ चल रहा हूं
वो देख वो कितने दिन उसी जैसी एक्टिंग करती रही वो भी आरामदायक जीवन चाहती थी इसलिए वो तैयार हो गई उसने अपना जरूरी सामान रखा कुछ पैसा जो राघव ने उसे दिया था वो रख लिया ।
शाम को जल्दी खाना खिला उसने 8 बजे तक सब समेट दिया सर्दियों के दिन थे बच्चे को दादी के पास सुला वो कमरे में आई राघव मनुहार कर रहा था पर वो बोली सो जाओ मै थक गई हूं। राघव बोला अरे किवाड़ में ताला नहीं लगाया। नलिनी बोली मैने लगा दिया है राघव थोड़ी देर में खर्राटे मारने लगा।नलिनी बाहर आई सामान लिया
और घर से निकल पड़ी मंदिर के पास राजन खड़ा था दोनो गाड़ी में बैठे और सीधा ट्रेन में बैठ मुंबई पहुंच गए वहां एक 1 bhk फ्लैट था जहां राजन रहता था सबने पूछा कौन है बीवी को ले आए क्या ? राजन बोला जी गांव से ले आये है।अगले दिन राजन अपने दोस्त अविनाश के पास गया
और उसे नलिनी के बारे मे बताया अविनाश ने फोटो देख रखे थे तो नलिनी को उसने छोटे मोटे काम दिलवाने शुरू कर दिए फिर आया वो दिन जिस दिन का इंतजार नलिनी कर रही थी उसकी सीरियल की शूटिंग शुरू हो गई पहले उसे ट्रेनिंग दी गई और काम चल निकला उसका नाम बदल कर नियति कर दिया
गया उसका सीरियल नारी बहुत प्रसिद्ध हुआ।गांव में ये बात आग की तरह फैल गई कि राघव की बहु टीवी पर है राघव जो नलिनी को ना पा टूट गया था बेटा मां के बिना अनाथ हो गया।दादी दादी होती हैं और मां मां वो बच्च। सारा दिन रोता ना कुछ खाता ना पीता सिर्फ मां को याद करता।कितना मजाक बनाया था
दुनिया ने वो दर्द जो राघव ने इस एक साल में झेला था वो कोई सोच भी नहीं सकता।राघव को नलिनी की बेरुखी का मतलब सब समझ आ गया था और आज उसे टीवी पर देख उसे नफरत हो गई।राघव ने वो शहर छोड़ दिया बेटे और मां को ले दूसरे शहर चला आया।मेहनत की 2 जगह नौकरी की बेटे को पढ़ाया ।अपना घर बेच जो पैसा मिला उससे एक दुकान
डाल ली।समय बदला राघव एक दुकान का मालिक था बेटा नेवी में चला गया।मां का दो वर्ष पहले ही देहांत हो गया था।उधर नलिनी ने पैसा कमाया रिश्ते गंवाए वो मां बनाना चाहती थी पर इंडस्ट्री में काम करना है तो नहीं बनना काम नहीं मिलेगा।बेटे की याद आती पर उसे पता ही नहीं था वो कहा है।राघव का प्यार याद आता क्योंकि वो निश्चल था।
राजन बता चुका था कि मायके और ससुराल वालों ने उसे मर गई ये घोषित कर दिया है।फिर एक शूटिंग के सिलसिले में वो राघव के शहर आई दोनो का आमना सामना भी हुआ।नलिनी ने राघव से बात करने की कोशिश भी की उसके घर आई रात के अंधेरे में राघव ने दरवाजे से ही यह कह लौटा
दिया कि उसकी पत्नी का देहांत हो चुका है।वो किसी को नहीं जानता बहुत मिन्नते कि नलिनी ने की बेटे से मिलने दे पर राघव ने दरवाजा बंद कर दिया।मैडम घर आ गया ड्राइवर की आवाज सुन नलिनी वर्तमान में लौट आई।आज वो रोती पर उसकी हसरतें ही तो उसे ले डूबी थी।सब था उसके पास जिसे उसने ठुकराया था आज पैसा है उसके पास पर कोई अपना नहीं।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी