फेरी वाला – के आर अमित

वह बच्चों के कुरकुरे पॉपकॉर्न और बुढ़िया के लाल पिले बाल बेचता था। वह हर रोज आता और हंस हंस कर कहता कि जो कंघी में फंसे बाल फेंक देती हो उन्हें इकट्ठा कर लो मैं पांच हजार रुपये किलो के हिसाब से खरीद लूंगा। उसने अपना नंबर दिया और कहा कि जब थोड़े जमा हो जाएं तो फोन कर देना।

पहाड़ों की गोद में बसा उज्जियार नाम का एक छोटा सा गांव था जो अपनी सुंदरता और शांति के लिए दूर दूर तक जाना जाता था। चारों ओर बर्फ से ढकी चोटियां थीं

हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और लोग सीधे सादे और भोले भाले थे। यही गांव पर्यटन स्थल भी था इसलिए बाहर से आने वाले लोग अक्सर यहां दिखाई देते थे।

इसी गांव में तीन साल पहले धूमधाम से चंचला की शादी हुई थी। वह नई नवेली दुल्हन बनकर इस घर में आई थी और थोड़े ही समय में पूरे परिवार की आंखों का तारा बन गई।

दो साल का एक प्यारा सा बेटा उसके आंगन में किलकारियां भर रहा था। उसका पति सेबों का बगीचा संभालता था और अधिकतर समय उसी बगीचे में बीतता था मगर दिल से वह अपने परिवार पर जान छिड़कता था। चंचला भी अपने पति से बेहद प्रेम करती थी और अपने छोटे से संसार में बहुत संतुष्ट थी।

राज्य गरीब था बेरोजगारी बहुत थी लोगों के पास छोटे मोटे काम ही थे लेकिन न जाने कहां से बाहर के लोगों की एक बाढ़ सी गांव में उतर आई। कोई कुलचे बेचता हुआ आता कोई कपड़े लाता कोई प्लास्टिक का कचरा खरीदता कोई बर्तन बेचता। हर सुबह और हर दोपहर गलियों में नई नई आवाजें गूंजने लगीं।

धीरे धीरे गांव के माहौल में एक अजीब सा बदलाव आने लगा। यहां तक कि छोटे से गांव में एक सैलून और ब्यूटी पार्लर भी खुल गया जहां महीने में मुश्किल से दो चार ग्राहक आते थे मगर किराया चार गुना दिया जाता था। लोगों को समझ नहीं आता था कि इतना घाटा उठाकर कोई यह धंधा क्यों चला रहा है।

सबसे हैरानी की बात यह थी कि ये फेरी वाले अजनबी होते हुए भी औरतों से बड़े अपनापन दिखाते थे और कहते थे कि सामान ले लो पैसे बाद में दे देना जब होंगे तब दे देना। दो हजार का सूट पांच सौ में दे जाते और बड़े भरोसे से कहते कि जब भी जरूरत हो हमें कॉल करना पैसे की फिक्र बिल्कुल मत करना। वे खास तौर पर तभी आते जब गांव के सारे पुरुष काम पर निकल जाते और घरों में सिर्फ औरतें और बच्चे रह जाते।

एक दिन एक उम्रदराज फेरी वाला आया जिसका चेहरा इतना मासूम लगता था कि देखने वाला खुद ही उसे कुछ न कुछ देने को जी चाहता। उसकी बोली में मिठास थी और आंखों में अजीब सी नम्रता। वह बच्चों के कुरकुरे पॉपकॉर्न और बुढ़िया के लाल पिले बाल बेचता था। वह हर रोज आता और हंस हंस कर कहता कि जो कंघी में फंसे बाल फेंक देती हो उन्हें इकट्ठा कर लो मैं पांच हजार रुपये किलो के हिसाब से खरीद लूंगा। उसने अपना नंबर दिया और कहा कि जब थोड़े जमा हो जाएं तो फोन कर देना।

चंचला ने उसे चाचा कहकर बुलाना शुरू कर दिया और सोचा कि इससे कुछ पैसे मिल जाएंगे तो पति की भी मदद हो जाएगी। वह रोज कंघी के बाल संभाल कर रखने लगी और एक दिन फोन किया। जुम्मन चाचा आए मुस्कुराए मोटे पैसे दिए और बाल लेकर चले गए।

यहीं से चंचला की जिंदगी की सबसे बड़ी भूल शुरू हुई। जुम्मन चाचा अकेला नहीं था वह और गांव में आने वाले सारे फेरी वाले एक ही गिरोह के थे। वे अलग अलग बहानों से औरतों के नंबर और जानकारी इकट्ठा करते और आपस में बांटते थे। कोई उधार के बहाने कोई बाल के बहाने कोई सैलून के बहाने। सब अपने अपने तरीके से कोशिश करते और कोई न कोई शिकार आखिरकार फंस ही जाता।

कुछ ही दिनों में चंचला के फोन पर अनजान नंबरों से कॉल आने लगे। उनमें से एक आदमी उसी गिरोह का था जो गांव से दूर एक छोटे शहर में जिम चलाता था। शरीर मजबूत था चेहरा आकर्षक था पहनावा और बोलचाल सब कुछ ऐसा कि देखने सुनने वाला प्रभावित हो जाए। उसने सीधे फोन नहीं किया बल्कि फेसबुक पर चंचला को ढूंढा और धीरे धीरे बातों का सिलसिला शुरू किया। पहले हाल चाल फिर तारीफें फिर लंबी बातें और फिर वीडियो कॉल।

वह हर रोज चंचला की खूबसूरती की तारीफ करता उसकी आवाज को जादू कहता और उसे ऐसा महसूस कराता जैसे वह दुनिया की सबसे खास औरत हो। चंचला जो कभी आईने में खुद को साधारण समझती थी अब खुद को किसी फिल्म की नायिका समझने लगी। उसे लगने लगा कि शायद उसकी जिंदगी में भी कोई सपना सच होने वाला है।

इसी दौरान गांव में एक के बाद एक डरावनी घटनाएं होने लगीं। आठ साल की रितिका अचानक गायब हो गई। कई दिनों तक तलाश हुई मगर कुछ पता नहीं चला। फिर नौ साल की पायल लापता हो गई और लोगों ने मान लिया कि शायद वह जंगल में भालू का शिकार हो गई। धीरे धीरे पूरे पहाड़ में औरतों और बच्चियों के गायब होने की खबरें फैलने लगीं मगर लोग इसे मजाक में उड़ा देते। कोई कहता कि औरतें खुद भाग जाती हैं कोई कहता कि मोबाइल देकर बिगाड़ दिया है। किसी ने सच जानने की कोशिश नहीं की।

एक दिन अचानक चंचला अपने बेटे के साथ गायब हो गई। गांव में हाहाकार मच गया। हर रास्ता हर जंगल हर शहर छाना गया। सोशल मीडिया पर उसकी और उसके बेटे की तस्वीरें डाल दी गईं। खबर दूर दूर तक फैल गई। कुछ सामाजिक संगठन सक्रिय हो गए और दूसरे राज्यों तक तलाश शुरू हो गई।

उधर चंचला एक अनजान शहर में एक बंद कमरे में कैद थी। बाहर निकलने की इजाजत नहीं थी फोन छीन लिया गया था और हर वक्त डर उसकी सांसों में बसा रहता था। उसका चेहरा हमेशा ढक कर रखा जाता किसी से बात करने या अकेले जाने की इजाजत नही थी बाहर जाती तो मुहँ ढककर उसपर भी उसके  बेटे को साथ नही जाने दिया जाता ताकि कहीं व्हलो भाग न जाए और उसे धमकी दी जाती की गर मुहँ खोल तो बेटे को मार देंगे और उसे किसी कोठे पे बेच देंगे। वह दिन रात अपने बेटे को सीने से लगाए रोती रहती थी और खुद को कोसती रहती थी कि उसने एक अजनबी पर कैसे भरोसा कर लिया।

एक दिन उसके बेटे पर एक सामाजिक कार्यकर्ता की नजर पड़ गई जिसने किसी नई महिला के आने की खबर सुनी थी। बच्चे की तस्वीर ली गई और जब वह वायरल फोटो से मिली तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सुबह होते ही पहाड़ की पुलिस और उस राज्य की पुलिस ने मिलकर छापा मारा और चंचला और उसके बेटे को आजाद करा लिया।

फोन की जांच में भयानक सच सामने आया। वही गिरोह मानव तस्करी का बहुत बड़ा जाल चला रहा था। कई बच्चियों को देह व्यापार के अड्डों से बचा लिया गया मगर कुछ मासूम लड़कों के अंग निकालकर उन्हें मार दिया गया था। उनकी तलाश आज भी जारी है।

चंचला ने सबके सामने हाथ जोड़कर कहा कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है उसने जो अपराध किया उसकी सजा उसने कैद और अपमान के रूप में भुगत ली है मगर उसके पति ने उसे अपनाने से इंकार कर दिया। मायके वालों ने भी दरवाजे बंद कर लिए। उसका बेटा पिता के पास रह गया और चंचला एक एनजीओ के सहारे जिंदगी काटने लगी।

एक हंसता खेलता घर हमेशा के लिए उजड़ गया।

मेरी इस कहानी का मकसद सिर्फ इतना है कि अपने घर मे दो सुखी रोटी भी मिले तो संतोष से खा लो घर से बड़ा कोई धन नही होता किसी की मीठी बातों और मासूम चेहरों के पीछे कितनी बड़ी साजिश छिपी हो सकती है। कोई भी आदमी जो आपको सस्ता या मुफ्त कुछ दे रहा है वह बेवकूफ नहीं है उसके पीछे कोई मकसद जरूर होता है। इसलिए किसी अजनबी को अपना नंबर अपनी जानकारी और अपना भरोसा देने से पहले सौ बार सोचना चाहिए क्योंकि एक छोटी सी भूल पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर सकती है।

किर्पया नोट करें कि ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका उद्देश्य केवल समाज को सावधान करना और जागरूक करना है।

             के आर अमित

        अम्ब ऊना हिमाचल प्रदेश

#सबसे बड़ा धन… परिवार

error: Content is protected !!