अचानक निखिल की गाड़ी मोड पर रुकते ही उसे एक मासूम बच्चे की आवाज सुनाई दी। बाबूजी यह फूल का गुच्छा ले लो। आप मैडम जी के जुड़े में लगा देना। देखो कितने सुंदर फूल है। मैं सच कहती हूं,उन पर बहुत खिलेंगे।
न जाने क्यों निखिल न चाहते हुए भी उस मासूम की आवाज सुनकर उस मोड़ से आगे न बढ़ सका। वह फिर गाड़ी का शीशा खोलकर गुड़िया को बड़े प्यार से समझाते हुए कहने लगा। देख गुड़िया मुझे अब इसकी जरूरत नहीं है वरना मैं जरूर ले लेता क्योंकि कुछ दिन बाद हम दोनों का तलाक हो जाएगा।
निखिल की बात सुनते ही वह मासूम पूछ बैठी ।
बाबूजी यह तलाक क्या होता है। निखिल ने बड़े संयम से गुड़िया को समझाते हुए कहा। गुड़िया तलाक यानि कि मैं और मेरी पत्नी दोनों अलग-अलग हो जाएंगे कहकर भारी मन से गाड़ी आगे बढ़ाने लगा आखिर वह उस मासूम गुड़िया से और ज्यादा कहता भी क्या। मगर वह मासूम बच्ची तुरंत फिर बोल उठी । बाबूजी मैं भगवान जी से प्रार्थना करूंगी। आप और आंटी कभी अलग ना हो और रोज आप मेरे यहां से एक फूल का गुच्छा ले जाए क्योंकि बाबूजी आप ये फूल का गुच्छा लेंगे । तभी मैं अपने भाई के लिए दूध ले पाऊंगी।
हमारा इस दुनिया में और कोई नहीं है। बाबूजी प्लीज आप यह फूल का गुच्छा ले जाइए। मुझे इसके ज्यादा पैसे नहीं, बल्कि दूध के जितने पैसे ही दे दीजिए कह कर वह मासूम रोने लगी।
न जाने उस मासूम की आवाज में ऐसी क्या कशिश थी। जो निखिल से अब रहा नहीं गया और गाड़ी से उतर पड़ा और उस मासूम के सर पर हाथ फेरते हुए बोल उठा। गुड़िया कहां है तेरा भाई, चल मुझे उसके पास ले चल।
ठीक है बाबूजी कहते हुए वो निखिल को लेकर चल पड़ी और चलते चलते एक नाले के पास पहुंच गई। जहां उस मासूम गुड़िया का भाई जो लगभग चार महीने का था। एक मैली सी चादर पर सोए सोए रोए जा रहा था ।
उसे देखकर ऐसा लग रहा था। शायद वह बच्चा बहुत भूखा था। निखिल से उस बच्चे का रुदन देखा ना गया और दौड़कर उसने उस बच्चे को उठाकर अपने गले लगा लिया और सबसे पहले सामने की दुकान से दूध खरीदा और गुड़िया के साथ उस बच्चे को दूध पिलाने में उसकी मदद करने लगा और सोचने लगा । ईश्वर भी कैसे-कैसे खेल रचते हैं यहां हमारा वैवाहिक जीवन बिन बच्चों के डोल रहा है। मेरी पत्नि डोली भी इनके बगैर अकेलेपन का शिकार हो गई है और यहां यह दोनों मासूम भाई-बहन बिन माता-पिता के अपना जीवन गुजार रहे हैं। अचानक निखिल के दिल से आवाज आई।
अरे अगर यह दोनों मासूम हमारी जिंदगी में आ जाए तो डोली ठीक हो जाए तो, हमारा तलाक भी रुक जाए तो।
निखिल को चुप देखकर वह मासूम गुड़िया फिर बोल उठी। बाबूजी अब यह फूल का गुच्छा आपका हुआ। देखिए मेरा भाई भी अब चुप हो गया है और यह मुस्कुरा भी रहा है।
गुड़िया की बात सुनते ही निखिल अचानक खुशी से बोल उठा । सुन गुड़िया तुम कुछ देर पहले बोल रही थी। मेरा और आंटी का तलाक ना हो तो, इसके लिए तुम्हें भी मेरे साथ चलना होगा कहते हुए उसने गुड़िया का हाथ थामा और उसके भाई को अपने गोद में लेकर गाड़ी की ओर बढ़ चला।
घर पहुंचते ही जैसे ही डोली ने दोनों बच्चों को देखा । उसके चेहरे पर प्यारी सी मुस्कान उभर आई।
यह देखकर निखिल को भी बहुत खुशी हुई और वह तुरंत डोली से बोल उठा । डोली हमारे कोई औलाद नहीं है और इन दोनों भाई-बहन के माता-पिता नहीं है।
देखो डोली अगर यह दोनों बच्चे हमारी जिंदगी में आ जाते हैं तो तुम्हारा अकेलापन खुशियों में बदल जाएगा । मैं जानता हूं तुम मुझसे इसलिए तलाक लेना चाहती हो, क्योंकि तुम्हें यह पता चल चुका है कि तुम कभी मां नहीं बन सकती मगर सोचो अगर इन बच्चों को हम दोनों स्वीकार कर लेते हैं तो हम माता-पिता भी बन जाएंगे और हमें एक दूसरे से अलग भी नहीं होना पड़ेगा ।
निखिल के मुख से डोली का इतना सुनना था कि वह खुशी से गुड़िया और उसके मासूम भाई को गले लगाकर तुरंत बोल उठी।
निखिल लोग सच कहते हैं, जब ईश्वर देते हैं तो बेहिसाब देते हैं । मैंने इन्हें जन्म नहीं दिया, मगर मैं इन्हें स्वीकार करती हूं और वादा करती हूं कि इन्हें बहुत प्यार करूंगी, अच्छे संस्कार भी दूंगी और समाज को बतलाना चाहूंगी की एक रिश्ता ऐसा भी होता है,जिसकी शुरुआती नींव चाहे किसी और ने रखी हो मगर बाद में भी अगर सच्चे मन से कोई अपनाना चाहे, उसे निभाना चाहे, तो वो निभा सकता है।
डोली की बात सुनते ही निखिल भी चहक कर बोल उठा। हां डोली तुम सच कह रही हो। हम इन्हें बहुत सारा प्यार, अच्छे संस्कार, अच्छी शिक्षा देंगे और ये रिश्ता निभाकर दिखाएंगे। जिसकी जड़े भले ही हमने नहीं सिंची मगर फिर भी इसे हरा भरा पेड़ बनाने में हम कोई कमी नहीं रखेंगे ।
जिन बच्चों के हमारी जिंदगी में आते ही हम फिर से एक हो रहे हैं । उनके सबसे अच्छे माता-पिता बनकर दिखाएंगे कहते हुए दोनों बच्चों को गले से लगा लिया।
आज निखिल को न जाने कैसा सुकून मिल रहा था। जो उसे समझ ही नहीं आ रहा था मगर उसे अच्छा बहुत लग रहा था कि कि अचानक से उन दोनों के जीवन में एक ऐसा रिश्ता आया जो सदा सदा के लिए उनका हो गया।
#एक रिश्ता ऐसा भी
स्वरचित
सीमा सिंघी
गोलाघाट असम