एक माफी ने बिगड़ने से पहले रिश्ते सुधार दिए – शैलेश सिंह “शैल,, : Moral Stories in Hindi

वो मेरी जीवन संगिनी थी, मेरी सबसे अच्छी दोस्त और सबसे अच्छी सुख दुख की साथी। पर मैंने या उसने.. एक गलती की थी किसी ने, शायद उसी ने की थी। हाँ पक्का उसी ने की थी और फिर हम दोनों अलग हो गए। 

वाह अनिकेत…! गलती किसी की भी रही हो उसका फैसला अलग रहना नही हो सकता मेरे दोस्त।  याद करो वो दो वर्ष, याद करो वो साथ में फिल्में देखना, घूमना, ढेर सारी बातें करना।

   अनिकेत यदि मैं नेहा को नही जानती  होती तो शायद तुम्हारी दोस्त होने की खातिर मैं तुम्हारी तरफदारी कर सकती थी। पर मैं उसे भी जानती हुँ और उससे भी बात होती है।  उसे भी इस बात का दुख है कि एक छोटी सी गलती की वजह से सात फेरों के वचन भुला दिया। साथ जीने मरने की कसमें खाने वाले आज अभिमान के चक्कर में अलग हैं। अभी भी वक्त है अनिकेत अपनी जीवन संगिनी को घर लाओ । 

   नही वर्षा…! बात प्रेम, मुहब्बत या रूठने मनाने की नही है। नेहा ने गलती की है तो की है। उसे वो मान जाय और मेरे माता पिता से क्षमा माँग ले तो सारा किस्सा खत्म। पर उसे जब लगे तब ना कि उसने गलती की है। 

    अच्छा  और यदि ऐसा नही हुआ तो क्या इतनी सी बात के लिए तुम उसे कभी नही बुलाओगे…? 

   इस बात पर अनिकेत उदास हो गया। 

  वर्षा और अनिकेत की बात वही खत्म हो गई। वर्षा सोचने लगी कि यही बात नेहा भी तो कल फोन पर कह रही थी। 

देखो वर्षा…! मैं सारे रिश्ते निभाने को तैयार हुँ , हम लड़कियाँ है और रिश्तों के लिए अपना घर छोड़कर पति के उस घर में हमेशा के लिए चली जाती हैं जिस घर के लोगों को वो जानती तक नही। फिर हमसे कोई ये न कहे कि रिश्ते निभाना नही आता। अनिकेत की गलती है तो है। हाँ  जब अनिकेत ने

इस कहानी को भी पढ़ें: 

” टका सा मुंह लेकर रह जाना ” – सुभद्रा प्रसाद : Moral Stories in Hindi

गुस्सा किया तो मुझे भी गुस्सा आ गया  और गुस्से में गलती हो गई। मैंने भी दो शब्द सुना दिया सासु माता को। पर उस बात की मुझे ग्लानि है वर्षा…!  मुझे बुरा लगा और मेरी माँ ने मुझे समझाया भी कि वो बड़ी है, माँ है  इसलिए तुम्हे जवाब नही देना चाहिए। पर जब अनिकेत ने मुझे सबके सामने खरी खोटी सुनाया तो मेरा पारा सातवें आसमान पर था। पर वर्षा मुझे दुख है इस बात का। 

वर्षा ने नेहा से कहा बस एक माफी सारे रिश्तों को सुधार देगी नेहा।  मैं फोन रखती हुँ अनिकेत माफी के लिए तैयार है तुम्हारे पास आएगा तो तुम माफी माँग लेना और घर चली जाना। 

शाम को अनिकेत ससुराल आया और आते ही नेहा को गुलाब का एक फूल देता हुआ बोला क्षमा नही करोगी। 

नेहा  आँखो में  आँसू लिए बोली  ” गलती तो मेरी भी थी तुम मुझे माफ़ कर दो। 

दोनों की आंखें गीली हो गई और नेहा ने फिर कहा..” मुझे घर ले चलो, माँ जी से भी क्षमा माँगना है आइंदा ऐसी गलती कभी नही होगी। 

शैलेश सिंह “शैल,,

गोरखपुर उत्तर प्रदेश।

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!