लबान गाँव के संपन्न किसान गोबरी लाल के दो बेटे थे, मोडू लाल और लटूर लाल. कहने को तो वो दोनों सके भाई थे, पर उनका रिस्ता दोस्तों जैसा था, क्योंकि उम्र में ज्यादा अंतर नहीं था. स्कूल में अगर किसी एक को कोई कुछ बोल देता, तो दूसरा उससे लड़ने लगता. दोनों एक दूसरे पर अपना सब कुछ नोछावर करते थे. बड़ा भाई मोडू लाल मैट्रिक के बाद पिता के साथ खेती बाड़ी में हाथ बटाने लगा और लटूर लाल एग्रीकल्चर में स्नातक करके भाई से साथ काम करने लगा. बड़े भाई की मेहनत और छोटे भाई की शिक्षा ने खेतो में नई जान डाल दी. देखते ही देखते उनके खेत सोना उगलने लगे. दोनों की शादी का रिश्ता एक ही घर से अंजू और मंजू के साथ तय हो गया. दोनों बहने एक ही घर में एक ही छत के नीचे मिलजुल कर रहने लगी. कुछ समय बाद बड़े भाई के घर बेटी का जन्म हुआ और फिर छोटे भाई के घर लड़का हुआ. गोबरी लाल की उम्र हो गई थीं और वो बीमार रहने लगा था. उसने खेतो पर जाना बंद कर दिया था. कुछ समय बाद बीमारी के चलते इलाज के दौरान गोबरी लाल का स्वर्गवास हो गया. छोटी बहू का लड़का होने के कारण उसके स्वभाव में बदलाव आने लगे और दोनों बहनो के दिलो में दूरियां पैदा हो गई. दोनों बहने अपने आदमियों के कान भरने लगी और दोनों भाइयो के बीच भी खटास पैदा हो गई. एक दिन अंजू मंजू के बच्चे आपस में खेलते खेलते लड़ने लगे. उनको लड़ते देख उन दोनों की माँये भी लड़ने आ गई. उनको लड़ता देख उनके बाप भी बीच में कूद पड़े. दिलों की कड़वाह आज जुबा पर आ गई और बात इतनी बड़ गई की नौबत बटवारे तक आ गई और पंचायत बैठानी पड़ गई. गोबरी लाल की बीवी ने बटवारे के लिए साफ मना कर, बोली, ज़ब तक मैं जिन्दा हूँ, ये जमीन मेरी है. अगर ये एक साथ काम नहीं कर सकते तो दोनों आधी आधी जमीन पर अलग अलग खेती करे. फ़सल का आधा हिस्सा मेरा होगा. पंचायत के दबाव मैं दोनों भाइयों को माँ की बात माननी पड़ी. अब एक ही घर मैं एक ही साथ दोनों भाइयों का परिवार दुश्मनो की तरह रहने लगे. सबसे बड़ी मज़बूरी माँ की थी, किसी एक से बात करती, तो दूसरा नाराज़ हो जाता. जिस गाँव मैं लोग भाइयों को दोस्त बोलते थे, आज उन भाइयों को एक दूसरे का दुश्मन बोलते हैं.
किसी ने सच कहा हैं की “भाई जैसा मित्र नहीं ना भाई जैसा शत्रु “.
वाक्य कहानी प्रतियोगिता
भाई जैसा मित्र नहीं ना भाई जैसा शत्रु “.
लेखक
एम. पी. सिंह
(Mohindra Singh)
स्वरचित, अप्रकाशित