सुजाता जी अकेली रह गई थीं घर में। संतान का सुख मिला नहीं था और महेश जी भी इस उम्र में हांथ छुड़ा कर चले गए थे। इंसान जन्म लेते ही अपनी आयु सीमा तय कर के ही पृथ्वी पर आता है। किसी ना किसी को तो जाना ही पड़ता है। जीवन और मृत्यु का यही परम सत्य है। घर में नौकर-चाकर के सहारे सुजाता जी का एक – एक दिन गुजर रहा था।
सुजाता जी को पशु – पक्षियों से अथाह प्रेम था।उनको ही बच्चों की तरह ख्याल रखती। गली के लावारिस कुत्तों को खाना खिलाना, बिल्ली दिख गई तो दूध निकाल कर कटोरी में रखना, ये सब आम बात थी। बालकनी में पंक्षियों को दाना डालने की प्रक्रिया तो कभी छूटती ही नहीं थी।
जैसे ही पौधे में पानी डालने आती कि एक चिड़िया आ कर कूद – कूद कर उनके आसपास मंडराने लगती ।ना जाने कैसा रिश्ता बन गया था बेजुबान का जुबान वालों के साथ।
कभी – कभी तो गौरैया उनके हथेली से ही दाना चुगने लगती थी। सुजाता जी के चेहरे की चमक देख कर लगता कि जैसे कोई अपना मिल गया हो।ये सिलसिला बहुत वक्त तक चलता रहता।
एक दिन सुजाता जी की तबीयत ठीक नहीं थीं और वो बिस्तर से उठ ही नहीं पा रहीं थीं।इधर चिरैया बालकनी में बेचैन चींचीं लगातार चिल्लाए जा रही थी। सुजाता जी ने नौकरानी बिमला से कहा अरे! ” बिमला जा कुछ दाना डाल कर आ….देख ना गौरैया आई है।”
एक माफ़ी ने बिगड़ने से पहले रिश्ते सुधार दिए। – निमिषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi
अरे! ” मालिक मैंने दाना – पानी सब रखा है पर वो तो कुछ खा ही नहीं रही है। मुझे लगता है कि वो आपको ना देख कर बेचैन सी हो रही है।”
सुजाता जी बिमला का सहारा लेते हुए बालकनी में पहुंची तो हैरान रह गई….. गौरैया आ कर उनके कंधे पर बैठ गई और इस तरह से खुश हो रही थी कि उसे दाना से ज्यादा सुजाता जी का इंतजार था। हथेली पर दाने को जैसे ही लिया फटाफट खाने लगी। बिमला हंसने लगी. ..मैडम जी! ” ये कैसा रिश्ता है? ये बेजुबान हमारी तरह अपनी बातें तो नहीं कर पाते पर अपनी भावनाओं से अपने रिश्ते का इजहार जरूर करते हैं।”
हां!” बिमला यही तो निःस्वार्थ प्रेम है,शायद अपने भी इतने परेशान ना होते जितनी की ये गौरैया है। मैं तो सिर्फ दाना – पानी डालकर धर्म का पालन कर रही थी इसने तो रिश्ते में बांध लिया मुझे।”
कुछ समय के बाद सुजाता जी का भी देहांत हो गया और उनकी अंतिम यात्रा के साथ एक चिरैया भी जा रही थी।ये कौन सा रिश्ता था पता नहीं लेकिन अब ना तो उस घर में रौनक थी ना ही बालकनी में।
प्रतिमा श्रीवास्तव
नोएडा यूपी