छन्नाक – उषा

और अचानक सुलभा ने डर कर आंखें बंद कर ली, कान में सुनाई दिया करम जली बर्बाद करने पर तुली हे। और चटाक

मगर यह क्या कंधे पर एक सुखद स्पर्श 

क्या हुआ बेटा रो क्यों रही है, एक कांच का गिलास हीं तो टूटा है और सुलभा जैसे सपनों से जागी, यह स्पर्श और किसी का नहीं उसकी सासू मां का था। 

अभी 7 दिन पूर्व ही तो वह इस घर की बहू बनकर आई है सासू मां का स्पर्श पा सुलभा सास से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगी। रेवा जी कहने लगी ना बेटा ना ऐसे नहीं रोते गिलास और आ जाएंगे मेरी बेटी मुझे रोती अच्छी नहीं लगती चल आंसू पोंछ।

और सास के दो प्यार भरे मीठे बोल सुन सुन सुलभा चौक गई, कहते हैं सास तो बहुत बुरी होती है मगर मेरी सास वह तो मां से भी बड़ी निकली और सुलभाअतित मैं चली गई। 

जब वह 10 वर्ष की थी अचानक शर्मा अंकल उसे लेने स्कूल आए पता नहीं क्लास टीचर से क्या बात की और उसे ले गए हॉस्पिटल लेकर गए देखा एंबुलेंस में दो शव सफेद चादर में ढके एंबुलेंस में शर्मा अंकल श्रीवास्तव अंकल और दोनों आंटियां उसे चिपकाकर बैठे थे

शव उसके पापा के गांव पहुंचे पापा के घर आंगन में जब शव गए कोहराम मच गया चार जोड़ी हाथ उसे खींचकर गले लगा रहे थे जब शवों चादर हटी वह हतप्रभ रह गई वह शव उसके मम्मी पापा के थे जो बाजार से आते समय एक ट्रक की चपेट में आने से मृत्यु को प्राप्त हुए थे 

12 दिन इसी तरह रोते रोते निकले अपने दादा दादी नाना नानी को पहली बार देखा था कारण पापा मम्मी ने दोनों परिवारों की बगैर रजामंदी से शादी जो की थी दोनों परिवारों ने उनका तिरस्कार कर दिया था हां अक्सर अपनी मम्मी को अपने माता-पिता की याद में भाई बहनों के याद में रोते जरूर देखा था और कभी-कभी पापा भी अपनों को याद कर कर बहुत भावुक हो जाते थे 

12 दिन बाद उसको कोई रखने को तैयार न था तब नाना नानी जो स्वयं मामा मामी से अलग रहते थे अपने साथ ले गए मगर वह आए दिन अपनी बेटी का सारा गुस्सा मुझ पर उतरते‌ नानी तो अक्सर मुझे करम जली ही पुकारती अचानक 19 वर्ष की आयु में एक दिन अपनी सहेली की शादी में बारात में आए राघव को सुलभा की भोला और उदास चेहरा भा गया उसकी सारी कहानी जानने के बाद उसने उसी से शादी करने का प्रण किया 

राघव के माता-पिता भी उसे कहीं लड़कियां बता चुके थे मगर वह शादी नहीं कर रहा था इसका निर्णय सुन बहुत खुश हुए और सुलभ को 7 दिन पूर्व अपनी बहू बना लाए

और आज सुलभा जो प्यार के दो मीठे बोल के लिए तरसती रही दिन-रात वह बोल सास के मुख से पूरे घर में गुंजते है

धन्यवाद

उषा विजय शिशीर भेरूंदा नसरुल्लागंज 

प्यार के दो मीठे बोल 

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