वक्त से डरना चाहिए – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’

“ये रहे घर के कागज, इन्हें आप गिरवी रख लीजिए और मुझे 10 लाख रुपए दे दीजिए…..”प्रशांत ने सेठ दयाल जी से कहा। “बेटा, मैंने तो तुमसे पहले ही कहा था जब तुमने मुझसे 1 लाख रुपए लिए थे कि ये कैंसर जैसी बीमारी होती ही ऐसी है…. न जाने कितना खर्च करवा दे कोई … Read more

वक्त से डरो – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

पापा मम्मी आप लोग इस घर से निकल जाइए यह घर अब मेरा है। यहां आपका यह सब पीना पिलाना नहीं चलेगा। क्या कह रहे हो बेटा वक्त से डरो इस उम्र में हम कहां जाएंगे। मुझे नहीं पता आप कहां जाएंगे लेकिन यहां से चले जाइए।सोसाइटी में मेरी बदनामी हो रही है।   आंखों … Read more

आईना – बीना शर्मा : Moral Stories in Hindi

सुबह-सुबह आनंदी ने रजत को जल्दी से नहा धोकर कहीं जाने के लिए तैयार होते हुए देखा तो वह समझी कि रजत अपने दोस्तों के साथ कहीं घूमने के लिए जा रहा होगा क्योंकि वह पहले भी ऐसे ही सुबह-सुबह तैयार होकर कई कई दिनों के लिए अपने दोस्तों के साथ बाहर घूमने निकल जाता … Read more

जितनी चादर उतने पैर फैलाना – निशा जैन : Moral Stories in Hindi

“आज फिर कुछ नया सामान… ये रोज़ रोज़ नया सामान… कभी छोटे की जगह बड़ा फ्रीज, कभी बड़ी टीवी तो कभी नया सोफ़ा… सब फ्री में आ रहा है ? या कोई लॉटरी लग गई देवर जी की इतने पैसे कहां से आए सुधीर ? देवर जी कुछ गलत काम तो नहीं कर रहे?” आज … Read more

वक्त से डरो – डॉ आभा माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

“एक गाँव में एक बूढ़ा लकड़ी काटनेवाला श्यामू रहता था । उम्र साठ साल थी, लेकिन मेहनत में कोई कमी नहीं आई थी। दिनभर जंगल में लकड़ी काटता, फिर शाम को बाज़ार जाकर बेच आता। लोग उसकी ईमानदारी की मिसाल दिया करते थे। पर उसकी एक आदत बुरी थी उसकी—वक्त को हल्के में लेना। उसे … Read more

वक़्त से डरो! – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

श्रीमती विनीता जी, जैसे ही घर के मुख्य द्वार में प्रवेश करती हैं ,उन्हें किसी बच्चे की रोने की आवाज आती है, वे समझ जाती हैं कि दुलारी जी का पोता रो रहा होगा वही उनके घर में छोटा बच्चा है। वे  दुलारी जी से मिलने के लिए उनके घर आई थीं। दोनों ने कल … Read more

वक्त से डरो – मीनाक्षी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मीरा, बी.कॉम फर्स्ट ईयर की छात्रा, हर दिन की तरह आज भी कॉलेज जा रही थी। सुबह की हल्की धूप और मन में ढेर सारे सपनों के साथ वह सड़क पर चल रही थी कि अचानक एक तेज़ रफ़्तार गाड़ी के ब्रेक की कर्कश आवाज़ आई। टायर सड़क पर घिसटे और गाड़ी मीरा के ठीक … Read more

वक्त से डरो – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

अपनी ही रौ में मधु बोले जा रही थी”मम्मी,अठारह साल की हो गईं हूं।अब मैं अपने फैसले खुद ले सकती हूं।कब तक पापा की तानाशाही बर्दाश्त करेंगें हम।मैं तो कहती हूं,मेरे साथ तुम भी निकल लो इस कैदखाने से। मम्मी,हम जैसे ही शादी करके सैटल हो जाएंगे,तुम भी हमारे साथ रहना।रवि की भी तो मां … Read more

वक्त वक्त की बात – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

बेटी की चिट्ठी हाथ में पकड़े योगेश को आज एहसास हो रहा था कि एक वक्त था जब पिताजी ने कहा था (और योगेश अतीत में खो गया) “ बस योगेश बस !!!अब बस भी करो… बहुत बोल रहे हो कम से कम वक़्त से डरो…आज इनकी ज़िन्दगी पर बन आई है कहीं कल को… … Read more

“वक़्त से डरो” – सुबोध प्राण : Moral Stories in Hindi

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव ‘माधोपुर’ की सुबह कुछ अलग होती है — खेतों में ओस की बूँदें, मंदिर से आती घंटियों की आवाज़ और एक बूढ़ी औरत की खाँसी। वो औरत है रामदुलारी, जो हर सुबह अकेले ही आँगन में झाड़ू लगाती है, फिर चूल्हे पर चाय बनाती है और भगवान के … Read more

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