टोल प्लाजा – एम. पी. सिंह

कितना अजीब लगता है ज़ब कोई रईसजादा, टोल टेक्स बचाने के लिए टोल कर्मचारियों से बहस करतें हुए ट्रैफिक जाम कर देतें है और दूसरे यात्रियों  का समय और तेल बर्बाद करतें है. कभी कभी तो टोल पर तोड़ फोड़, लाठी डंडे और पिस्तौल तक निकाल लेते है. कई बार टोल कर्मियों पर गाड़ी तक … Read more

कभी तो बहू की भी प्रशंसा की जाए वरना – संध्या त्रिपाठी

वाह …आज क्या कटहल की सब्जी बनी है…  बहुत ही स्वादिष्ट बनी है… डाइनिंग टेबल पर बैठे सभी लोगों ने कटहल की सब्जी की बहुत प्रशंसा की..!  आराध्या मन ही मन खुश हो रही थी कि सब्जी के साथ उसकी भी तारीफ होगी…क्योंकि सब्जी तो वो ही बनाई है…!  पर कुछ ही देर में सासू … Read more

रस्सी उतना ही खींचे जितना उसमे लोच हो – लतिका

सुबह सुबह आराधना जी का बड़बड़ाना शुरू हो गया था। छह बज गया अभी तक बहू रानी के उठने का समय ही नहीं हुआ है। एक हम थी सुबह चार बजे ही नहा धोकर तैयार हो सासु माँ को प्रणाम करने चली जाती थी और एक हमारी बहुरिया है जिन्हे सुबह छह बजे तक कुछ … Read more

आंखों का पानी ढलना – सीमा सिंघी

इन दो सालों में राधे और बंसी दोनों भाइयों के बीच बहुत कुछ बदल चुका था। वजह थी एक जमीन का टुकड़ा। जिसे पिता हरि प्रसाद ने दोनों भाइयों में बराबर बराबर बांट दिया था। छोटे भाई बंसी को इससे कोई परेशानी न थी, परेशानी थी तो बस राधे को, उसे यही लगने लगा की … Read more

आंखों का पानी ढालना – नाज़ मन्नत

श्यामलाल एक कस्बे में रहने वाला व्यक्ति था। वह न तो मेहनती था और न ही ईमानदार, परंतु उसमें एक विशेष गुण अवश्य था—उसे किसी भी बात की लज्जा नहीं आती थी। लोग कहते थे कि उसने तो पूरी तरह आंखों का पानी ढाल दिया है। वह बिना शर्म किए झूठ बोलता, दूसरों का हक … Read more

आंखें भर आना – सुदर्शन सचदेवा 

निहारिका एक UX डिजाइनर थी—हमेशा व्यस्त, हमेशा भागती हुई, हमेशा “ओके, आई’म फाइन” कहते हुए। पर उसके फोन की स्क्रीन पर एक ऐप था जिसे उसने कभी नहीं खोला था—“MemoryVault”। यह ऐप आवाज़, संदेश और छोटी यादों को सुरक्षित रखता था। यह ऐप उसके पिता ने उसकी आखिरी जन्मदिन पर इंस्टॉल किया था। तभी एक … Read more

अब और नहीं – लतिका श्रीवास्तव 

हर बार सुजल उसे बेइज्जत करता वह चुप रहती। शायद उसके प्रति अगाध विश्वास, अलगाव का भय, आर्थिक निर्भरता और पुत्र के भविष्य की आशंका मृणाल को उसकी कटूक्तियों को अनदेखा करने पर बाध्य कर देते थे। वह इस तथ्य से अवगत था इसीलिए वह आए दिन उस पर अत्याचार करता उसे खून के आंसू … Read more

खून के आसूं रुलाना – खुशी

सरला एक तेजतर्रार औरत थी पूरे मोहल्ले में प्रसिद्ध दो बेटियां वो भी मां के अनुरूप और एक बेटा प्रणय पति नीरज जी भी चुप रहने वाले उनकी बीवी के सामने चलती ही नहीं थी।बड़ी बेटी हर्षा की शादी घर के पास ही हुई थी और छोटी गीतू की दूसरे शहर पर वो भी अपने … Read more

धोखेबाज़ कौन? – मीनाक्षी गुप्ता

राहुल की लग्जरी कार जैसे ही सिग्नल पर रुकी, अचानक उसकी आँखें सड़क पार जा टिकीं। उसने देखा कि उसकी प्रेमिका किसी दूसरे लड़के के साथ बाहों में बाहें डालकर घूम रही है। उसे बहुत दुःख हुआ, उसका दिल टूट गया। “धोखेबाज़ लड़की! हद है! मेरे जैसे सच्चे आशिक़ को यह सिला मिला? मैंने इस … Read more

खून के आंसू रुलाना – सुदर्शन सचदेवा 

आज के समय में जिंदगी की रफ़तार जितनी तेज हो गई  है , उतनी ही मुश्किलें भी बढ़ती जा रही हैं। ऐसी ही एक कहानी है रिद्धि की, जो एक साधारण परिवार से थी, पर उसके सपने बिल्कुल असाधारण थे। वह फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती थी, लेकिन हालात ने उसे खून के आँसू रुलाने में … Read more

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