मैंने अपना फर्ज़ निभाया – लक्ष्मी त्यागी
बारिश की हल्की बूंदें, पुराने छप्पर पर टपक रही थीं। बाहर ठंडी हवा थी, मगर भीतर रामसिंह के दिल में एक तपिश थी—जो सालों से जल रही थी, न बुझी थी, न कम हुई थी । आज उसने अपना पुराना ट्रंक खोला, जिसमें कुछ फटी हुई फाइलें रखी हुई थीं, एक पुलिस टोपी, और एक … Read more