मैंने अपना फर्ज़ निभाया – लक्ष्मी त्यागी

बारिश की हल्की बूंदें, पुराने छप्पर पर टपक रही थीं। बाहर ठंडी हवा थी, मगर भीतर रामसिंह के दिल में एक तपिश थी—जो सालों से जल रही थी, न बुझी थी, न कम हुई थी । आज उसने अपना पुराना ट्रंक खोला, जिसमें कुछ फटी हुई फाइलें रखी हुई थीं, एक पुलिस टोपी, और एक … Read more

अपने पर बीता तो समझ आया – लतिका पल्लवी

भाई दूज के दिन सभी बहने भगवान से अपने भाई की लंबी उम्र और उसकी प्रसन्नता के लिए प्रार्थना करती है।और भाई को तिलक लगाकर बजरी और मिठाई खिलाने के लिए उसकी राह देखती है, कब भाई उससे मिलने आए और वह उसे तिलक लगाकर आशीर्वाद दे। सुमन भी अपने भाई की लंबी उम्र की … Read more

पड़ोसी धर्म – दिक्षा_बागदरे

प्रिया का मन आज बहुत ही अशांत है। करे भी क्या, आए दिन की बेवजह की बातों से बहुत परेशान हो गई है।  प्रिया एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग में रहती है।  प्रिया का स्वभाव सबसे मिलजुल कर रहना, हंसना-बोलना रहा है।  मगर अब लगने लगा है कि लोगों से दूरी बनाकर रखने में ही भलाई … Read more

मैने मेरा फर्ज निभाया है – रेखा जैन

शादी का घर था। घर मेहमानों से भरा हुआ था और सब तरफ गहमा गहमी थी।   मनोहर जी की छोटी बेटी नेहा की शादी थी।  मनोहर जी के कमरे में वो स्वयं, उनकी बीवी प्रतिभा जी, और बेटा मनोज मौजूद थे। तीनों के चेहरे पर तनाव पसरा था। माथे से पसीना टपक रहा था। तीनों … Read more

मैंने अपना फर्ज़ निभाया – सुनीता परसाई’चारु’ 

डा.आरव आर्थोपेडिक थे। उनकी पत्नी नैना ने गणित में एम. एस. सी. किया था । कालेज में लेक्चरर थी। शादी के दो साल बाद ही आपसी विचारों के मतभेद के कारण प्रतिदिन वाकयुद्ध दोनों  के बीच चलता रहता था। एक दिन गुस्से में आरव ने उस पर हाथ उठा दिया। नैना की सहनशक्ति जवाब दे … Read more

मैंने अपना फर्ज़ निभाया है। – मधु वशिष्ठ

मैंने अपना फर्ज़ निभाया है और मैं किसी के प्रति भी जवाबदेह नहीं हूं। मुझे नहीं लगता तुम्हें भी इस विषय में कुछ अधिक सोचना चाहिए मानसी ने अपने पति मनन को  झिड़कते हुए कहा। 88 वर्ष की माताजी की मृत्यु के बाद आज 13वीं की क्रिया रसम का समापन हुआ और मनन और मानसी … Read more

मैंने अपना फर्ज  निभाया। – मधुलता पारे

         राशि का गजानन  बाबू से कोई खास  परिचय  नहीं था कभी आमने सामने की उसकी उनसे भेंट भी नहीं हुई  थी केवल एक बार उन्हें दूर से देखा भर था घर के धुले पैजामें कुरते में  जिसकी सफेदी में हल्के पीलेपन की झलक दिखाई  दे रही थी एक शख्स  दूर अकेला खड़ा था राशि की … Read more

मैंने अपना फर्ज निभाया है – विधि जैन

सुशीला लगभग 28 वर्ष की हो चुकी थी उसके लिए रिश्ते तो बहुत आ रहे थे लेकिन कहीं भी उसकी शादी सेट नहीं हो पा रही थी घर में बहुत टेंशन था मां बाप के पास ज्यादा पैसे नहीं थे मां सिलाई कढ़ाई करती थी और पिताजी छोटा-मोटा काम कर लेते थे लड़के वाले जो … Read more

मैंने अपना फर्ज निभाया है – विनीता सिंह

कश्मीर की वादियों में भारत पाकिस्तान के बॉर्डर के पास एक गांव जहां के लोग चरवाहे या फिर लोग की नांव में सब्जियां बेचकर अपना गुजारा करते थे।यह गांव कश्मीरी पंडितों का था लेकिन ज्यादातर लोग गांव छोड़कर जा चुके थे लेकिन अर्जुन के दादा जी ने कहा इस गांव के पुरोहित भगवान दास जी … Read more

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