माता पिता की आर्थिक स्थिति तय करती है कि ससुराल में बेटी की कितनी इज्जत होगी। – मंजू ओमर 

अरे कभी पहनी है इतनी महंगी साड़ी, तुम्हारे घर में तुम्हारी मम्मी , दादी या बहनों ने किसी ने देखी है ऐसी साड़ी,जो मैं तुम्हें दिला रही हूं।वो तो अपनी इज्जत रखने के लिए मैं तुम्हें दिला दे रही हूं क्यों कि तुम्हारे भाई की शादी है , और सब तुम्हें ही देखेंगे कि इतने … Read more

समाज का सच – लतिका पल्लवी 

माँ,माँ,जल्दी आओ भैया दीदी को लेकर आ गए।गाड़ी की आवाज सुनकर श्रेयांसी माँ को पुकारते हुए घर के बाहर भागी।अरे!लड़की सुन तो ज़रा। एकदम आंधी तूफान है यह लड़की,कुछ सुनेगी ही नहीं। जैसी यह है वैसी ही उसकी बहन भी है।वह भी तुरंत गाड़ी से उतर कर चल देगी। बहू जल्द से एक कटोरी मे … Read more

बहुत कुछ होते हुए भी पैसा ही सब कुछ नहीं – विमला गुगलानी

नई बहू नवेली का ससुराल में पहला कदम मानों खुशियों की बरसात। सास दिव्या पहले से ही आरती की थाली सजाए खड़ी थी,फूलों का कालीन ,और न जाने कितने प्रकार की रस्मों के साथ नई बहू का गृह प्रवेश। सब रिश्तेदार ऐसी सुंदर और अमीर घर की  लड़की को दिव्या की बहू बनने पर जहां … Read more

माता-पिता की आर्थिक स्थिति तय करती है ससुराल में सम्मान – आराधना श्रीवास्तव

आंखों में सपना सजाये मखमली एहसास लिए सलोनी डोली में विदा हो ससुराल आई ।  नाम के अनुरूप उसकी छवि उतनी ही निराली और आकर्षक, जो एक नजर देख ले तो देखता ही रह जाए । विवाह के तीन-चार दिन तक तो दुल्हन की मुंह दिखाई की रस्म चलती रही जो ही देखता बलाइया लेते … Read more

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