#माँ जी मैं आपकी बेटी जैसी हूं
मां जी मैं भी आपकी बेटी जैसी हूं – सीमा सिंघी
अरे डोली बहू तुम रसोई का काम देख लो और हां तुम रसोई में दही बड़े, दाल का हलवा पुलाव और थोड़ी पुड़िया तल लेना। तुम्हारी जेठानी बाहर की साफ सफाई सब कर लेगी। वैसे भी रसोई में दो इंसानों का काम तो है नहीं। मैं तो अपने जमाने में मिंटो में बहुत कुछ कर … Read more
इक अनोखा रिश्ता – सेल्वीन गोहेल
स्नेहा और राजीव सुबह पूजा-पाठ करके चाय नाश्ता करने बैठ जाते हैं। अचानक उनको याद आता हैं की, मां जीने कल रात से कुछ खाया पिया नहीं हैं। अगर जाग गई हों तो, उन्हें भी चाय नाश्ता के लिए बुला लाते हैं। “राजीव तुम चाय नाश्ता करो, में मां जी अगर जाग गई हों … Read more
मैं आपकी बेटी जैसी हूं, मां जी । – आराधना श्रीवास्तव
अरे! सिया बहू भिंडी की सब्जी कैसी बनाई थोड़ा भी कुरकुरी नहीं बनी पता नहीं क्या सीख कर अपने मायके से आई हो। सिया जल्दी-जल्दी रसोई समेट रही थी बिजली की तरह दौड़-दौड़ कर कार्य कर रही थी सुबह 5:00 के अलार्म के साथ दिनचर्या शुरू हो जाती है सासू मां शोभा जी को शुगर … Read more
मां जी मैं आपकी बेटी जैसी हूं – विनीता सिंह
सुबह के पांच बज रहे हैं। बिस्तर पर बैठी, आशा जी आवाज़ देती है। महारानी कहा चली गई, अभी तक चाय लेकर नहीं आई।तभी हाथ में चाय की ट्रे लेकर अनामिका कमरे में आई और बोली माजी चाय लिजिए। आशा बोली क्या बहरी हो गई है कितनी देर से आवाज दे रही हो अब तू … Read more
मां जी मैं भी आपकी बेटी जैसी हूं। – मधु वशिष्ठ
कल सुबह अपनी माँ से मिलेंगे! मायके में माँ से मिलने का सुख क्या होता है, यह ससुराल में बैठी हर लड़की से पूछो। माँ के सीने से लगते हुए ढेरों बात करना, “कुर्सी से नीचे लटकाए हुए खुले बाल” और “पैर ऊपर करके बैठना”, इसी खूबसूरत एहसास में खोई हुई मीनल की तंद्रा तब … Read more