बहू ने सीमा खींच दी – मधु वशिष्ठ
——————— सर्दियों की दोपहर में ,और गर्मियों की शाम को, गुप्ता आंटी , “कॉलोनी में ” अपने घर के बाहर चारपाई बिछाकर सबको इकट्ठा करके बहू पुराण शुरू हो जाती थी। उस पुराण में कहीं कुछ भूल जाए तो याद कराने का काम उनके साथ बैठी उनकी बिटिया रानी का था। खाने का काम … Read more