बहू ने सीमा खींच दी – मधु वशिष्ठ

——————— सर्दियों की दोपहर में ,और गर्मियों की शाम को, गुप्ता आंटी , “कॉलोनी में ”    अपने घर के बाहर चारपाई बिछाकर सबको इकट्ठा करके बहू पुराण शुरू हो जाती थी। उस पुराण में कहीं कुछ भूल जाए तो याद कराने का काम उनके साथ बैठी उनकी बिटिया रानी का था। खाने का काम … Read more

बहु ने सिमा रेखा खिंच दी। – बबीता झा

शांति जब अठारह वर्ष कि हुइ तभी उसकी शादी कर दि गइ।  मायके से वह सबके लिए इज्जत और प्यार का तोहफ़ा लेकर आई। शांति जैसा नाम, बस वैसी ही उसकी पहचान थी। छोटी उम्र में ही ससुराल आने के बाद उसने घर का सब काम अपने ऊपर ले लिया था, यानी कहिए जिम्मेदारी। शांति … Read more

*बहु ने सीमा खींच दी…* – तोषिका

ओ बहु! जरा इधर तो आ, जल्दी आ इतना धीमे धीमे कहे चलती हो? हमारे जमाने में जब हमारी सास बुलाती थी तो एक सेकंड भी नहीं लगता था आने में। पता नहीं आज कल की पीढ़ी को क्या हो गया है, भागना तो दूर चलना भी नहीं आता है। साक्षी की सास उसको ऐसे … Read more

बहू ने सीमा खींच दी – संजय सिंह

 राजेश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। माता-पिता ने बड़े  लाड -प्यार से उसकी परवरिश की। पढ़ाया -लिखाया और वह एक कामयाब वकील बन गया। समय चलते माता-पिता ने उसकी शादी एक पढ़ी-लिखी संस्कारी लड़की से कर दी ।समय बिता गया और राजेश के माता-पिता इस दुनिया से अलविदा कहकर चले गए। राजेश अपनी पत्नी … Read more

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