“पवित्र रिश्ता” – कुमुद मोहन 

रिचा और अनुज एक ही बस में आते जाते थे!दोनों एक दूसरे के प्रति खिंचाव महसूस करते पर एक दूजे की पहल का इंतज़ार करते करते मौन ही रह गए! ये सफर कब चाहत में तब्दील हो गया दोनों को पता ही न चला! एक दिन अनुज अपने प्यार का इज़हार कर चिट्ठी बनाकर लाया … Read more

लक्ष्मी: मेरी नन्ही गुरु – सीमा गुप्ता

लक्ष्मी से मेरा रिश्ता अचानक बना जो न किसी परिचय का मोहताज है और न ही किसी वादे का। वह चुपचाप आई, मेरे भीतर उतर गई और मुझे पहले से थोड़ा बेहतर इंसान बनाकर चली गई। बात शुरू होती है, महाशिवरात्रि के पावन अवसर से। महादेव की कृपा से मुझे अपनी बेटियों अदिति और अन्वी … Read more

काश तू फिर से मिल जाती… – रश्मि प्रकाश 

राशि अपने पति निकुंज और चार साल की बेटी कुहू और डेढ़ साल के कुश के साथ अभी दशहरे के वक़्त ही नए शहर में आए थे ।  बेटा अभी छोटा था तो काम करने वाली की खोज जारी थी। अपार्टमेंट हो तो आराम से काम वाली मिल जाती है पर छोटी जगहों पर काम … Read more

रिश्ता निस्वार्थ प्रेम का । – अंजना ठाकुर  

ये क्या मां आप कमला को दस लाख रुपए दे रही हो दिमाग खराब हो गया क्या तुम्हारा राजीव अपनी मां सुधा जी से गुस्से से बोला।सुधा ने राजीव से चेक बुक निकलवाई और उसमें रकम भरी जिसे देख राजीव बौखला गया। सुधा बोली शुक्र करो दस लाख ही कर रही  वो तो ममता आड़े … Read more

कैदी नंबर 214 – गीता वाधवानी

लगभग 22 वर्षीय पंकज को पुलिस इंस्पेक्टर सलाखों के पीछे धकेल कर चला गया। पंकज गिरते गिरते बचा और वहीं कोने में बैठकर अपने घुटनों में मुंह छुपा कर रोने लगा। तब इसी कोठरी में बंद 35-36 वर्षीय मनोज ने उसके कंधे को प्यार से सहलाते हुए पूछा- क्या हुआ भाई,इतना क्यों रो रहे हो? … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – मधु वशिष्ठ

दादी की आवाज जोर-जोर से आ रही थी वह चाची से बात कर रही थी और कह रही थी अरे काहे को अभी से बिटिया के लिए वर ढूंढे है, छोरी को पढने दो और फिर बिट्टो वाले मेहमान जैसा ही कोई लड़का देख लियो।” “क्याआआआआ? दादी ऐसा बोल रही है?” नाचती हुई बिट्टो रुक … Read more

एक रिश्ता ऐसा भी – बबीता झा

आज मैं जब अस्पताल से आ रही थी तो अंदर एक सुकून सा एहसास हो रहा था। आज मैं एक ऐसी शख्स मिली जो मेरा पेशेंट नहीं था, मेरा कोई अपना भी नहीं था, लेकिन पता नहीं क्यों आज उसको देखकर अजीब सी खुशी मिल रही थी।   घर पहुंची तो अजय ने कहा, “दीपा, कितनी … Read more

जिंदगी – संगीता त्रिपाठी

इंजीनियरिंग कॉलेज का पचासवां वर्षगांठ…,कॉलेज प्रशासन ने बड़े धूमधाम से मनाने की सोची …,बड़े आयोजन की तैयारी की , पुराने स्टूडेंट्स  को भी निमंत्रित किया गया ।        तीन दिन का प्रोग्राम कल से शुरू है ,रेवा आज सुबह ही दिल्ली पहुंची ,कॉलेज द्वारा आरक्षित होटल में सामान रख ,कॉलेज देखने का लोभ न रोक पाई … Read more

पवित्र रिश्ता – आरती शुक्ला

समीर को यह बात शुरू से चुभती थी कि नंदिता हर मुस्कान से पहले जैसे अपने अंदर किसी दरवाज़े की कुंडी लगा लेती है। सोसायटी में रहते हुए भी वह लोगों से मिलती कम थी, ज़्यादातर अपने फ्लैट की बालकनी में बैठकर पौधों में पानी देती, या किताब लेकर खामोशी में खो जाती। पैर में … Read more

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