एक और मौका – रेखा जैन

बारिश की बूंदे सड़क को भिगो रही थी। अस्पताल की दीवारों पर खामोशी पसरी थी। शाम से रोते रोते निकिता की आंखों में आंसू सुख चुके थे। वो आई सी यू के बाहर बैठी खामोश सी अपने ही विचारों में गुम थी। अंदर उसका पति अनिकेत जीवन और मौत के बीच जुझ रहा था। उसकी … Read more

एक और मौका – विनीता सिंह

एक बहुत बड़ी आलीशान हवेली । वहां पर श्रीकांत जी और रुक्मणी जी रहते हैं! उनका बेटा कृष्णम जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुका था आज पिता से कह रहा था पिताजी मुझे गिटार में अपना कैरियर बनाना है उधर श्रीकांत जो शहर के बहुत बड़े जज थे वह चाहते थे उनका बेटा सिविल की … Read more

 दूसरा मौका – गीता वाधवानी

 अपनी बहू मुस्कान के बाजार जाने के बाद, सुमित्रा देवी ने अपने बेटे आशीष से कहा-” बेटा, मेरे पास आकर बैठ, मेरी बात सुन। “  आशीष अपनी मां के पास आकर बैठ गया और बोला-” कहो माँ। ”   सुमित्रा देवी-” बेटा, तेरे ऑफिस से आते ही मुस्कान तुझे इतना कुछ सुनाती रहती है, कभी बच्चों … Read more

चाभियाँ… और एक और मौका – पूजा अरोड़ा

शरद की हल्की-ठंडी सुबह थी। बरामदे में नीम की पत्तियाँ गिर रही थीं। बड़े ठाकुर घर में हलचल हमेशा की तरह थी…संयुक्त परिवारों में ऐसी हलचल तो सामान्य बात है..! रसोई में चूल्हे की आवाज़, अंदर से बच्चों के उठने का शोर और ऊपर से आती जेठानी चाँदनी भाभी की तेज़,  लेकिन व्यवस्थित आवाज़ “सिया, … Read more

एक और मौका – सुदर्शन सचदेवा

रात के साढ़े ग्यारह बज रहे थे। शहर की सड़कें लगभग सो चुकी थीं, लेकिन रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ॉर्म नंबर 3 पर बैठी भावना की आँखें अभी भी जाग रही थीं। उसके सूटकेस पर धूल जमी थी और चेहरे पर थकान… पर असली थकान उसके दिल में थी—हार मान लेने की। आज उसकी ज़िंदगी जैसे … Read more

एक और मौका – सीमा गुप्ता

“वंशु बेटा, कल ही रक्षाबंधन है, आपने पर्व और हर्ष के लिए राखी तो भेजी है न! हम सब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।” मेघा दूर के शहर में रह रहे अपने जेठ की बेटी वंशिका से फोन पर पूछ ही रही थी कि तभी डोरबेल बज उठी। “अरे! वंशिका का भेजा पार्सल आ … Read more

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