क्या, इतना अभिमान ठीक है – मंजू ओमर 

ये तू जूते पहनकर कैसे अंदर आ गया,बाहर उतार गधा कहीं का, रत्ती भर भी तमीज नहीं है ।तू एक नौकर है हम मालिक पता है कि नहीं कुछ तुझे , कैसे मालिक के घर आते हैं,बस दनदनाता हुआ अंदर चला आता है।बस वही गेट पर खड़ा रह रेखा जी जोर जोर से चिल्लाए जा … Read more

इतना अभिमान सही नहीं – नीलम गुप्ता

चार लड़कियां नमिता नैना नीरू और निशा एक ही विद्यालय में पहली कक्षा से साथ-साथ पढ़ रही थी । चारों का नाम अंग्रेजी के एन अक्षर से शुरू होता था इसलिए वे N4 के नाम से प्रसिद्ध थी । उनकी दोस्ती पूरे विद्यालय में जानी जाती थी l चारों ही पढ़ने में अच्छी थी उनके … Read more

पछतावे के आँसू – लतिका 

संगीता जी वृद्धाश्रम के कमरे मे लेटे हुए अपने पुराने दिनों को याद कर रही थी। उनके आँखो से बहते आँसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। नींद आँखो से कोसो दूर थी। जो उनके बहुत चाहने पर भी आ नहीं रही थी।सोच रही थी कि सो जाती तो शायद कुछ देर के … Read more

अभिमान – खुशी

प्रमिला एक बेटे नरेंन  की मां थी उसके पिता गल्फ में नौ करी करते थे। तो उसके पास अनाप-शनाप पैसा था। जिसे वह जैसे चाहे खर्च करती । क्योंकि उसके पति तीन-चार साल। में  घर आता पर महीने में अच्छा पैसा भेजता।जिससे प्रमिला और नरेन  बहुत घमंडी हो गए थे उस पर सोने पर सुहागा … Read more

इतना अभिमान ठीक नहीं – आराधना श्रीवास्तव

शैलजा बस 19 वर्ष की थी जब रमैया की दुल्हन बनकर आई थी । रमैया सीधा-साधा ग्रामीण अंचल में पला- बढा प्रकृति को ही अपना इष्ट देव मानता और खेतों में लहलहाते  फसलों को अन्नदाता ।  जी तोड़ मेहनत करता।  मेहनत तो उसके रंग रंग में बसा था खेती -बाड़ी तथा बीजों का ज्ञान उसे … Read more

इतना अभिमान सही नहीं। – मधु वशिष्ठ

   माधवी बेहद सुंदर पढ़ी-लिखी और और संपन्न परिवार की लड़की थी। अभी उसने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। आजकल लड़कों के लिए लड़की ढूंढना भी इतना सरल काम नहीं है। अच्छी लड़की और अच्छा परिवार देख कर बहुत से रिश्ते भी स्वत: ही आने लगते हैं। ऐसे ही माधवी के लिए बहुत से … Read more

इतना अभियान सही नहीं – विनीता सिंह

पहाड़ों का जीवन बहुत ज्यादा कठिन होता है। कब पहाड़ गिर जाए कब रास्ते बन्द हो जाए। कुछ पता नहीं ऐसे ही दो पहाड़ियों के बीच में एक गांव था उस गांव में नदी थी उस नहीं के ऊपर एक पुल था पता नहीं कब गिर जाए कहा नहीं जाता।उसी गांव में अरूण नाम का … Read more

इतना अभिमान सही नहीं – सीमा सिघी

नित्या तुम दिन भर घर में करती क्या हो। बस थोड़ा बहुत घर का और रसोई का काम बाकी अपने घर की साफ सफाई, बर्तन आदि के काम वो काम वाली बाई करके चली जाती है फिर तो तुम दिन भर बैठी ही रहती हो।  मैं तो सुबह का निकला शाम को ही घर आ … Read more

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