कैसे कैसे इज्जतदार – गीता वाधवानी

आज घनश्याम दास और उनकी पत्नी आशा देवी बहुत खुश थे क्योंकि उनकी बेटी सुरभि का विवाह सुखपूर्वक संपन्न हो गया था और अब उसकीविदाई होने वाली थी।   विदाई से ठीक पहले सुरभि की सास ललिता,आशा देवी को बुलाकर कहने लगी कि आपकी बेटी की विदाई बिना कार के कैसे होगी? कार तो आपने दी … Read more

ओहदे का मान – पुष्पा जोशी

        आज बैशुमार दौलत के मालिक रविन्द्र बाबू अपने घर के बराण्डे में अकेले बैठे थे, कहने को बहुत इज्जतदार थे, हर तबके के लोग उनकी इज्जत करते थे, इज्जत से बात करते थे, वे नजर घुमाकर जिसे भी कोई कार्य कहते वह अपने को खुशकिस्मत समझता था। यह इज्जत उनकी थी या उनके आसपास … Read more

इज्जतदार ( इंसान या वहशी जानवर ) – संगीता अग्रवाल

” पापा आ गये ..पापा आ गये !!” जैसे ही ऑटो रिक्शा चलाने वाले जीवन ने घर मे कदम रखा उसके दोनो बच्चे मचलते हुए बोले । ” अरे मेरे बच्चो !” बोल जीवन दोनो बच्चो को गोद मे उठा लेता है । अपने बच्चो का हँसता चेहरा देख उसकी सारी थकान उतर जाती है। … Read more

पर घर अलग होना ज़रूरी है – सीमा श्रीवास्तव 

“मम्मी, ये भी कोई बात हुई? हर बार विवेक की तरफ़ से हम ही खड़े हों, तो वो कब जिम्मेदार बनेगा?” सान्या ने रसोई के दरवाज़े पर खड़ी-खड़ी आवाज़ थोड़ी धीमी, लेकिन साफ़ रखी। शांता देवी ने बर्तन में दाल चलाते हुए माथे पर पल्लू टिकाया,“अरे बहू, तू हर वक्त हिसाब ही करती रहती है। … Read more

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