बहू जितना होगा उतना ही कर सकती हूँ… – रश्मि प्रकाश 

“ क्या हुआ मम्मी जी आज आपने डिनर नहीं बनाया… और कृष के कपड़े भी नहीं बदले… जबकि कितनी बार कहा है… दिन भर में इसके कपड़े बदलते रहिए…. ।” अपने बेटे को सुबह के कपड़े में ही देख नताशा सासु माँ दमयंती जी पर बरस रही थी  “ बहू आज सुबह ही मन अच्छा … Read more

इंसानियत – डाॅ संजु झा

संसार में इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं है। ‘मानवता परमो धर्म:’हिन्दू सनातन धर्म का आधार है।भारत की सभ्यता और संस्कृति मानवता का उद्गम स्रोत है। इंसानियत के नाते हमारे ऋषियों ने महान-से-महान त्याग किया है।ऋषि दधीचि ने तो अपनी अस्थियाॅं तक दान कर दी थी। आधुनिक समय में भी इतिहास में कुछ ऐसे मनुष्य … Read more

इंसानियत – डॉ. आशा

नवरात्रि के आख़िरी दिनों में मोहल्ले की गलियाँ अपने आप में एक अलग ही रंग ओढ़ लेती थीं। कहीं मंदिर से घंटियों की मधुर आवाज़ आती, कहीं लाउडस्पीकर पर “जय अम्बे गौरी…” गूंजता, और कहीं घरों के आँगन में रंगोली के बीच दिए टिमटिमाते दिखते। दुर्गा नवमी का दिन था—वही दिन जब हर घर में … Read more

इंसानियत – परमा दत्त झा

आज दुखन पर पंचायत बैठा था।कारण दुखन श्वसुर होकर बहू का हाथ पकड़ा और गोद में उठा कर—! मधुबनी जिले का वह सोनवर्षा गांव जहां करीब चालीस घर मंडल परिवार है उसी में एक दुखन मंडल का घर है। पूरा भगवान के कोप से शापित अभागा परिवार।दुखन दो भाई और सात बहनें सबसे बड़े भाई … Read more

मानवता – बालेश्वर गुप्ता,

        रात्रि के नौ बजे होंगे, दरवाजे  पर कॉल बेल का स्विच लगा होने के बावजूद कोई दरवाजा जोर जोर से पीट रहा था. ये तो समझ में आ गया था कि निश्चित ही कोई बड़ी परेशानी है. तभी तो दरवाजा पीटने की व्यग्रता है, यह स्वाभाविक ही होता है. मेरे सामने धर्म संकट आ खड़ा … Read more

इंसानियत – बीना शुक्ला अवस्थी

अक्सर कहा जाता है कि दुनिया बहुत खराब है, हर कदम पर धोखा देने वाले मिलते हैं। इसलिये किसी पर विश्वास नहीं करना चाहिये लेकिन इंसानियत अब भी जिन्दा है और जब हमें कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाता है तो हम मानने पर विवश हो जाते हैं कि वह व्यक्ति हमारे लिये भगवान बनकर आया … Read more

फूल चोर – संजय मृदुल

रानू जी कॉलोनी की सबसे पुराने रहवासियों में से थी। बहुत ही अकडू स्वभाव, नकचढ़ी और घमंडी। बड़ा सा बंगला था उनका, उनके साहब, वो अपने पति को इसी नाम से संबोधित करती थी, रिटायर्ड सरकारी अधिकारी थे। रानू जी की रोज़ सुबह मुंह अंधेरे उठ जाती और कॉलोनी का चार पांच चक्कर घूमतीं। सैर … Read more

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