आगे क्या – रश्मि झा मिश्रा 

बस दो महीने ही बचे थे… मरियम के रिटायरमेंट को… सिस्टर मरियम… उम्र से अधिक बूढी दिखने वाली… आंखों पर मोटे फ्रेम का चश्मा… बहुत साधारण सी कद काठी… यही पहचान थी उनकी… भरी जवानी में पति का साया उठ जाने के बाद यह नौकरी मिली थी मरियम को… नर्स की ट्रेनिंग भी उन्होंने नौकरी … Read more

पगडंडी -लतिका श्रीवास्तव

दिसम्बर का उत्साह पूरे उफान पर था।शायद अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते अंत में वहीं बचता है अकेला पूरे वर्ष का भर ढोने वाला।पूरे वर्ष सारे महीनों ने जो उम्मीदें पूरी नहीं की उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी का बोझ उठाता दिसंबर कभी निराश नहीं दिखता।मेरे साथ यह वर्ष खत्म हो जाएगा इसका दुख … Read more

नई राहें – लतिका श्रीवास्तव

दिसम्बर का उत्साह पूरे उफान पर था।शायद अपनी बारी की प्रतीक्षा करते करते अंत में वहीं बचता है अकेला पूरे वर्ष का भर ढोने वाला।पूरे वर्ष सारे महीनों ने जो उम्मीदें पूरी नहीं की उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी का बोझ उठाता दिसंबर कभी निराश नहीं दिखता।मेरे साथ यह वर्ष खत्म हो जाएगा इसका दुख … Read more

इंसानियत – सीमा सिंघी 

आज लाजवंती का सुबह से ही मन बहुत उदास था। वह करने को सुबह से चूल्हे में आग धरना, लाल चाय बनाना, साग बनाना सब कर तो रही थी मगर उसका मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। वह बार-बार यही सोच रही थी ।  जब किसी के पास थोड़ा धन आ जाता … Read more

इंसानियत अभी जिंदा है – मंजू ओमर 

कल्लू वो कल्लू कहां घूम रहा है। कितने दिनों से तुम्हें फोन लगा रहा हूं ,पर फोन बंद था रहा है।कहां था इतने दिन से ।बस बाबूजी फोन रिचार्ज नहीं था ।आजकल कहीं काम नहीं मिल रहा था पास में  पैसे नहीं थे तो रिचार्ज नहीं कर पाया ।अच्छा इधर आ घरमें कुछ काम  कराना … Read more

यह रिश्ता टूटता ही नहीं -शुभ्रा बैनर्जी 

“मां,कल हम लोग आ रहें हैं।वकील अंकल को बुलवा लीजिएगा।घर के पेपर्स तैयार हैं ना?मैंने दो साल पहले ही कहा था आपसे।अब ना -नुकुर मत करिएगा।इस बार आप आ रहीं हैं हमारे साथ बैंगलुरू।और हां ,हमारा कमरा तो काली है ना,या उसमें भी बच्चे रहते हैं? मैं अपने कमरे में कोई भी बदलाव नहीं देखना … Read more

इंसानियत अभी जीवित है – गीता वाधवानी

महानगर मुंबई, एक छोटी सी खोली में रहने वाले तीन दोस्त। नवीन, अजय और सुनील। नवीन किसी कंपनी के ऑफिस में पिओन का काम करता था। अजय और सुनील एक जूते बनाने वाली फैक्ट्री में काम करते थे। तीनों बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे और मिल बांटकर गुजारा करते थे। तीनों को घर पर … Read more

इंसानियत – मीनाक्षी गुप्ता

‘गुलमोहर सोसाइटी’ के ब्लॉक-सी में वैसे तो बहुत सारे परिवार रहते थे, लेकिन यह कहानी थी—फ्लैट नंबर 201 और 202 में रहने वाले परिवारों की। इन दोनों घरों के बीच की दूरी महज़ दस कदम की थी, लेकिन इनके विचारों के बीच मीलों का फासला था। फ्लैट नंबर 201 में मीरा जी का परिवार रहता … Read more

इंसानियत की मिसाल – संगीता अग्रवाल

” आदित्य !” बाहर से घर में घुसी नीता अपने सामने का नज़ारा देख हैरत और गुस्से से चिल्ला पड़ी ।  ” मम्मा …!!” मां को सामने देख आदित्य ने अपने नीचे दबोची नन्ही वसुधा को छोड़ा और भाग खड़ा हुआ ।  “रुक जाओ आदित्य !” नीता फिर चिल्लाई पर आदित्य तो तीर से छूटे … Read more

इंसानियत – नीलम गुप्ता

स्वार्थ भाव से ऊपर उठकर सब के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार करना इंसानियत का आधार है ।एक इंसान दूसरे इंसान को इंसान समझे, उसके सुख-दुख में साथ दें ,उसकी खुशी में खुश हो और गम में दुखी हो यही तो इंसानियत है ।इंसानियत कोई बहुत महानता या अभिमान की विषय वस्तु नहीं है । यह … Read more

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