जरूरत – लतिका श्रीवास्तव

रमिया क्या कर रही है कब से पुकार रही हूं जल्दी से बर्तन धोकर दे  साहब का लंच भी तो बनना है ।तू है तो सुन ही नहीं रही है मालिनी जी ने पीछे वाले आंगन में तेजी से घुसते हुए जोर से कहा तो देखा रमिया अपने जिद मचाते सुबकते तीन वर्ष के पुत्र … Read more

अभागी – लतिका पल्लवी 

निशी विदा होकर ससुराल मे आई तो सभी औरतो नें एक एक करके दुल्हन को सिंदूर लगाकर दुल्हन का मुँह देखा। फिर दादी सास नें पूछा कि सभी नें देख लिया ना? कोई छूटा तो नहीं? बड़ी बहू के कहते ही की नहीं दादी जी सभी नें सिंदूर लगा दिया कोई नहीं छूटा तो दादी … Read more

आंख भर आना – विमला गुगलानी

   झुगी- झोंपड़ी बस्ती में कोहराम मचा हुआ था। हरिया और उसकी पत्नी भगवती दोनों शहर में बन रही किसी बड़ी इमारत में मजदूरी करते थे। दोनों के अंकुश और सुखी यानि सुखमनी पांच और आठ वर्ष के दो बच्चे थे जो कि पास के ही सरकारी स्कूल में पढ़ते थे।घर में हरिया की बूढ़ी मां … Read more

ऑंख भर आना – डाॅ संजु झा

जबसे नीरा ने बेटे की विदेश जाने की बात सुनी है,तब से उसके दिल में  तरह-तरह के ख्याल आने लगें हैं और रह-रहकर उसकी ऑंखें भर जातीं हैं।जिंदगी में बहुत कुछ पा लेने की  होड़ में आज के युवा अपने वतन छोड़कर विदेश जाने से नहीं हिचकते नहीं हैं। मोटी सैलरी , एशो-आराम की जिन्दगी … Read more

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