असहाय नहीं हूं मैं – नीलम गुप्ता

वह मेरे घर में साफ सफाई का काम करती थी ।लंबी छरहरी ,गोरा रंग ,किसी दिन अच्छी सी साड़ी पहन कर आती तो लगता किसी संभ्रांत घर की बहू बेटी है । तीन बेटे हैं उसके बड़े दोनों तो 22 और 24 साल के हैं दोनों पढ़ लिखकर नौकरी पर लग गए हैं ।छोटा अभी … Read more

असहाय नहीं हूं मैं…- बबिता झा

आज सुबह उठने में देर हो गई बगल में देखा तो यह भी बिस्तर पर नहीं थे आज तो रविवार है फिर आज यह सवेरे कैसे उठ गये ,मैं भी उठकर बालकनी में चली गई ,तभी मेरे हाथों में चाय थमाते हुए बोले गुड मॉर्निंग, मैं भी चाय की प्याली हाथ में  ले मुस्कुराने लगी … Read more

रिश्ते की गर्माहट -शिव कुमारी शुक्ला

सुबह ऑफिस जाते बेटे को टिफिन पकड़ाते हुए मम्मी विमला जी ने कहा बेटा नीरज मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है यदि तुम दे देते तो मैं भी अपना काम कर लेती। क्या मम्मी कितने रुपयों की जरूरत है आपको। यही कोई पंद्रह हजार। क्या पंद्रह हजार। इतने रुपयों का आप क्या करेंगी।ऐसी कौन-सी आवश्यकता … Read more

समय सबका आता है – उषा भारद्वाज

      पूरा हाल लोगों से भरा हुआ था। सबकी नज़रें मुख्य अतिथि यानी आई•ए•एस• सविता सिंह के आने की प्रतीक्षा में लगी थी। आर्ट गैलरी के उद्घाटन के लिए उनको बुलाया गया था। तभी कुछ लोग दौड़ते हुए गेट के पास पहुंचे। एक कार वहां आकर रुकी उससे बाहर प्रभावशाली व्यक्तित्व की मालकिन सविता सिंह उत्तरी। … Read more

असमर्थ नहीं हूं मैं – मंजू ओमर 

रुक्मणि जी, रूक्मिणी जी, हां कहां खोई हुई हो आप कब से आवाज दे रही हूं सुन ही नहीं रही है। हां बेटा वो बस ऐसे ही ,बोलो क्या बात है,वो गोविंद आया है नये स्वेटरों का आर्डर देने और पिछले पैसे देने आफिस में बैठा है । अच्छा अच्छा आ रही हूं मैं, इतना … Read more

आश्रिता – शुभ्रा बैनर्जी 

“देखिए ना,हमारे ऊपर तो इतनी बड़ी जिम्मेदारी है,कहीं भी आना-जाना नहीं कर सकते हम।आप लोगों की तरह मैं स्वतंत्र तो हूं नहीं।मंहगाई है कि बढ़ती जा रही है,और खर्च है कि कम होते ही नहीं।बुढ़ापे में बीमारी भी बिन बुलाए मेहमान की तरह आ जाती है।मैं तो आप लोगों के साथ ट्रिप पर नहीं जा … Read more

जिंदगी की परीक्षा – अंजना ठाकुर

नेहा अपनी गृहस्थी मैं बहुत खुश थी ससुराल मै सब उसका बहुत ध्यान रखते और किसी चीज की कोई कमी नहीं थी नेहा का पति राकेश एक बड़ी कंपनी मैं मैनेजर था नेहा भी शादी के पहले नौकरी करती थी पर शादी के बाद उसका खुद का मन नहीं हुआ वो अपनी जिंदगी सुकून से … Read more

मैं असहाय नहीं हूं.. – आराधना श्रीवास्तव

चटाक की आवाज के साथ कान सुन्न हो गए, रवीना अपलक सिद्धार्थ को देखती रह गई थोड़ी देर तक उनकी उसकी समझ में कुछ नहीं आ रहा था सिद्धार्थ ने आखिर तमाचा क्यों मारा।  वह तो सिद्धार्थ के इशारे की कठपुतली है जब चाहा जैसा चाहा वैसा घुमाया आज तक केवल उसकी जरूरत के बारे … Read more

असहाय नहीं हूं मैं – सीमा सिंघी 

मिनी ने जैसे ही स्कूल का बस्ता उठाया । मिनी की रमिया ताई  बोल उठी। मिनी अब तुम्हें स्कूल जाने की क्या जरूरत है। सातवीं तक पढ़ लिया,नाम और पत्र लिखना आ गया । अब बहुत हुआ। वैसे भी तेरे ताऊ जी घर के इतने सदस्यों के बोझ अकेले कैसे सहेंगे।  अपनी ताई जी की … Read more

असहाय नहीं हूं, मैं! – लक्ष्मी त्यागी

रोहिणी तो जैसे टूट गई थी, जब उसके पति ने उसकी बाहों में अपना दम तोड़ा। अब वह क्या करेगी ,किसके भरोसे जीएगी ? एक अकेली औरत जात, जान को सोे झंझट नजर आ रहे थे। घर संभालेगी या फिर खेती-बाड़ी देखेगी। अभी दीनदयाल की ‘दाह संस्कार ‘की आग ठंडी भी नहीं हुई थी। रिश्तेदारों … Read more

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