घाव हरे करना – खुशी

रीना की मां का आकस्मिक निधन हो गया।वो छुट्टियों में अपनी मां के पास गई थी और अचानक हार्ट अटैक होने से उनका देहांत हो गया इस समय रीना की दुनिया उजड़ गई वो अपनी मां को बहुत प्यार करती थी उसकी तो दुनिया ही उजड़ गई।वो इस गम से सम्भल ही नहीं पा रही … Read more

परिवर्तन – लतिका श्रीवास्तव

अचानक तुम्हें नौकरी करने का क्या फितूर सवार हो गया है। मैंने हमेशा कहा है ऊंची से ऊंची डिग्री ले लो जितना पढ़ना चाहो पढ़ लो।इतना अच्छा घर वर मिल गया है।शादी हो जाने दो फिर अपने घर जाकर जो करना हो करते रहना सुमेर जी के रूढ़ियां लपेटे तर्क बेटी नंदिनी के गले के … Read more

हिम्मत – स्नेह ज्योति 

सुबह-सुबह सूरज़ की किरणों से अंधियारा ज़रुर छँट जाता है…..  लेकिन आत्मा पर छाया अंधियारा शायद इस रोशनी में ऑर गहरा होता जाता है । जहाँ ठंड के मौसम में पक्षी अपनी मधुर ध्वनि में चहचहा रहे थे । वहीं भीनी-भीनी धूप झरोखों से झाँक मेरे पैरों को गरमाहट दे ना उठने का बहाना बनी … Read more

घाव हरा करना – सुदर्शन सचदेवा

कालेज का वार्षिकोत्सव था। पूरा कैंपस रोशनी और रंगों में डूबा हुआ था। हर ओर हँसी, संगीत और दोस्तों की बातें। आयुषी भी मंच की तैयारियों में व्यस्त थी। तीन साल बाद वह फिर से कल्चरल टीम की लीडर बनी थी। पर आज कुछ अलग था — उसका दिल अजीब-सा भारी लग रहा था। उसी … Read more

अस्तित्व – लतिका श्रीवास्तव

प्रतिदिन की भांति फिर थानेदार साब अपने कई साथियों के साथ डंडा फटकारते आ गये। ओए रामू …सबको पेशल चाय दे और सब जगह सलोनी लगा रौबदार आवाज कानों में जाते ही यंत्रवत रामू के कांपते हाथ चाय के पतीले की ओर बढ़ गए थे। जल्दी चाय बना एक काम भी ढंग से नहीं होता।तब … Read more

मिताली – गीता अस्थाना

——— शिवेंद्र ने ट्रेन के कोच में भरी पैसेंजर के बीच तेज़ आवाज़ में कहा, ‘ कब तुमने मुझे रुपए दिए ‘ उनकी तेज़ आवाज़ से भयभीत सी होकर नीचे देखने लगी। उसकी आंखों में आंसू आ गए। रात्रि का सफर था, सो वह अपने बर्थ पर जाकर लेट गई। काफी देर तक वह जागती … Read more

उजाला – संध्या त्रिपाठी

     माँ – माँ उठ ना , देख  तो उजाला हो गया ….. मैं जाऊं पटाखा बिनने ? कहां जाएगी बिटिया पटाखा बिनने …..? जहां तू काम करती है ना माँ ….वहीं …  कल देखी थी मेम साहब का बेटा (भैया) खूब पटाखा फोड़े थे….. जरूर दो- चार इधर-उधर बिना फूटे रह गया होगा …!    अरे … Read more

परिवर्तन – खुशी

नरेन्द्र जी का एक बहुत बड़ा पब्लिकेशन हाउस था।जहां नए नए लेखकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था और बहुत सारे कर्मचारी उनके यहां काम करते थे।सभी कुछ बहुत अच्छा चल रहा था।घर परिवार में दो बच्चे पीयूष और पायल पत्नी सावित्री और माता पिता दमयंती और लक्ष्मण ।सभी खुश रहते थे और … Read more

उजाला – संध्या त्रिपाठी

 माँ – माँ उठ ना , देख  तो उजाला हो गया ….. मैं जाऊं पटाखा बिनने ? कहां जाएगी बिटिया पटाखा बिनने …..? जहां तू काम करती है ना माँ ….वहीं …  कल देखी थी मेम साहब का बेटा (भैया) खूब पटाखा फोड़े थे….. जरूर दो- चार इधर-उधर बिना फूटे रह गया होगा …!    अरे … Read more

पचास वर्ष बाद :माँ बेटे का मिलन – लतिका पल्लवी 

 बुची की माँ कहा हो ? चलो जल्दी से नई बहू आ गईं है सभी तुम्हारा इंतजार कर रहे है। चलो चलकर अपनी पोता बहू को परीछ कर उतारो।ना बेटा ना मै नई बहुरिया के सामने नहीं जाउंगी। मै आज तुम्हारी एक भी बात नहीं सुनूंगा और ना ही मानूंगा। मै अब बच्चा नहीं रहा, … Read more

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