अंगारे फूल बन जाएँगे.. – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” कितनी भी कोशिश कर ले दीपा…तेरे बेटे का कुछ नहीं होने वाला..अंधा है..इसे तो जन्म के समय ही मार…।” ” बस कीजिए दीदी..जैसा भी है..मेरा बेटा है..मेरे शरीर का हिस्सा है..।” अपने छह साल के बेटे के लिए जेठानी मालती की जली-कटी बातें सुनकर दीपा तड़प उठी थी।वह मनु को लेकर कमरे में चली … Read more

अंगारे उगलना! – लक्ष्मी त्यागी : Moral Stories in Hindi

देख रहे हैं ,आज छोटी बिना किसी से कहे ,अपने पति को लेकर फ़िल्म देखने गयी है ,तन्वी ने अपने पति से शिकायत भरे लहज़े में कहा।  विनय ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया और चुपचाप अपने कमरे में चला गया पति के इस व्यवहार से वह बुरी तरह तिलमिला गयी। जब वो इस … Read more

अंगारे उगलना – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

दीनानाथ और जानकी गाँव में अकेले रहते गाँव की ताजा आबोहवा खेती बाड़ी कर अपने में ही मस्त रहते परिवार के नाम पर दो बेटे,पढ़ने लिखने में लायक तो स्कालरशिप से आगे बढ़ते गये और एक बेटा कम्पनी के माध्यम से विदेश बस गया दूसरा मुम्बई वहीं शादी कर इतना मस्त हो गया कि भूल … Read more

जब बहू ने अंगारे उगले – रेखा सक्सेना : Moral Stories in Hindi

शालिनी की शादी एक प्रतिष्ठित परिवार में हुई थी। पढ़ी-लिखी, आत्मसम्मानी और अपने विचारों पर अडिग रहने वाली लड़की ने जब ससुराल में कदम रखा, तो सबने कहा, “बहू तो बहुत तेज़ है, जुबान से अंगारे उगलती है।” असल में, शालिनी कभी गलत के सामने चुप नहीं रहती थी। जब पहली बार सास ने कहा, … Read more

डिजिटल अंगारे – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

आज वह स्क्रीन से नज़रें नहीं हटा पा रही थी। नेहा के फोन की नोटिफिकेशन बार धधक रहा था – एक के बाद एक टिप्पणियाँ, शेयर, टैग। सब एक ही लिंक की ओर इशारा करते थे – उसके खुद के डिज़ाइन स्टूडियो के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर पोस्ट की गई एक वीडियो रील। रील में … Read more

अंगारे उगलना – सीमा सिंघी : Moral Stories in Hindi

तुम दिन भर घर पर करती ही क्या हो…बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। मैं भी सुबह का गया ऑफिस से शाम को ही लौटता हूं। हमारे जाने के बाद आराम ही तो करती हो और गुस्से में अपनी ऑफिस वाली बैग और टिफिन लेकर निकल पड़ा। यह साहिल की रोजमर्रा की आदत थी । … Read more

” पिता का आशीर्वाद ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” पापा कब छोड़ेंगे आप अपना गँवार पन , इतनी इज्जत कमाई है मैने अपनी मेहनत के बल, सब मिट्टी मे मिलाने मे लगे हो आप !” मेहमानों के जाते ही अरुण मानो अंगारे उँगलने लगा। ” बेटा मुझे पानी पीना था कमरे मे था नही बस इसलिए रसोई मे पानी लेने जा रहा था … Read more

अंगारे उगलना – सुनीता परसाई ‘चारु’ : Moral Stories in Hindi

हरि का दोस्त मनोहर बाहर से आवाज दे रहा था “अरे ओ हरि! खेलना नहीं है क्या आज? “हांँ-हांँ चलता हूँ”   हरि व मनोहर अच्छे दोस्त थे। एक ही मोहल्ले में रहते थे। साथ खेलते साथ ही शाला जाते थे। हरि के पापा एक प्राइवेट कंपनी में  काम करते थे। उनकी कमाई से घर आसानी … Read more

अंगारे उगलना – खुशी : Moral Stories in Hindi

रवि मां बाप का लाडला बेटा था।1 बहन आरती और भाई विशाल था।पिताजी सरकारी नौकरी में थे मोतीलाल मां सरिता देवी गृहिणी थीं पर पति और रवि को अपने काबू में कर रखा था।रवि का बहुत बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोर था। उसकी शादी सविता से हुई । समय के साथ पिता जी का स्वर्गवास हो गया। … Read more

मिसरी सी बतियां – लतिका श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

मां ये करेले का जूस वैसा ही पड़ा है।इसको कौन पियेगा।सुबह से झक मार रही हूं मैं।जूस निकालने में कितनी मेहनत और समय लगता है आप क्या जाने बैठे बैठे पीने को मिल जाता है फिर भी पिया नहीं जाता आपसे..निमी की तीखी आवाज से मां जी झट से बिस्तर पर उठ कर बैठ गईं … Read more

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