रस्सी उतना ही खींचे जितना उसमे लोच हो – लतिका
सुबह सुबह आराधना जी का बड़बड़ाना शुरू हो गया था। छह बज गया अभी तक बहू रानी के उठने का समय ही नहीं हुआ है। एक हम थी सुबह चार बजे ही नहा धोकर तैयार हो सासु माँ को प्रणाम करने चली जाती थी और एक हमारी बहुरिया है जिन्हे सुबह छह बजे तक कुछ … Read more