मैं भी तो एक बेटी हूं – मंजू ओमर

मंशा जी भइया जा मम्मी के लिए पतली पतली सी खिचड़ी बना था , मंशा सुन ही नहीं रही थी वो तो बस फोन में ही लगी थी । मंशा तू सुन रही है कि नहीं भाई निखिल ने जोर से कहा। हां भईया सुन रही हूं । हां मैं इस घर की बेटी हूं … Read more

अपनों से तो गैर भले – स्वाती जैंन

साहिल के  फोन की स्क्रिन पर किसी मोना नाम की लड़की के मैसेज का नोटिफिकेशन देखकर राखी से रहा नहीं गया और वह फोन हाथ में लेकर चेक करने लगी ! साहिल का फोन लॉक था और सहिल वैसे भी अपना पासवर्ड कभी राखी को बताता नहीं था मगर उपर आए नोटिफिकेशन में मोना का … Read more

मैं भी तो एक बेटी हूं। – सीमा गुप्ता

सुबह के साढ़े चार बजे थे। अभी अँधेरा पूरी तरह छँटा नहीं था। अलार्म की घंटी के साथ अनन्या की नींद खुल गई। वह कुछ पल चुपचाप लेटी रही। पास ही सो रहे पति आदित्य की नींद न टूटे, इसलिए वह धीरे से उठी।  नहाने के बाद उसने तुलसी के सामने दीपक जलाया। हाथ जोड़ते … Read more

हर बात के लिए बहु ही दोषी क्यों – कमलेश आहूजा

ठंडी हवाएं चल रहीं थीं पर बारिश थम चुकी थी।रोहन जिद पर अड़ा हुआ था कि मॉल जाना है।रिया बोली -“ऐसा क्या जरूरी काम है?जो बारिश के मौसम में मॉल जाना है,तो मुस्कुराते हुए रोहन बोला-“क्या बताऊँ यार,मैंने दो दिन पहले मूवी के टिकिट बुक कराए थे ये सोचकर कि इस संडे शाम को मॉल … Read more

मायका – शुभ्रा बैनर्जी 

“सुमन! ओ सुमन, मधु आ रही है कल दामाद जी के साथ।सुबोध से कहना, छुट्टी ले ले दो चार दिन की।” सुमित (पति)ने फोन रख दिया था।सुमन समझ नहीं पा रही थी कि बेटी के आने की खुशी क्यों नहीं महसूस हो रही थी उसे? ऐसा नहीं कि मधु पहली बार आ रही थी राखी।पांच … Read more

बंधन मुक्ति – बीना शुक्ला अवस्थी

घर में सुबह से हलचल मची थी जिसका कारण था सबके मोबाइल पर एक मैसेज। भानुजा का मोबाइल भी कमरे में ही रखा था। कहॉ गई भानुजा? किसी को कुछ पता नहीं था, कल रात तक सब कुछ सामान्य था। तीन महीने पहले ब्याह कर आई नववधू अर्चिता भी अचंभित थी।  इन तीन महीनों में … Read more

दरार -पूजा अरोड़ा

शादी का माहौल था चारों तरफ गहमा गहमी थी। एक ओर हलवाई कड़ाही में गर्मा गर्म पूरिया तल रहे थे तो दूसरी ओर टेंट वाला फूलों से सजावट कर रहा था।  सब काम सुचारू रूप से चल ही रहे थे परंतु फिर भी यूं लग रहा था जैसे कुछ काम नहीं हो रहा..! यही तो … Read more

स्वार्थ खत्म दुर्व्यवहार शुरू – रोनिता कुंडु

काजल… आज सीमा चाची के यहां सतसंग है तो मुझे हाथ बटाने थोड़ा पहले ही जाना होगा, तो पीछे से जब विमला आएगी तो उससे याद से ऊपर वाला कमरा अच्छे से साफ करवा लेना, विभा जी ने अपनी बहू काजल से कहा..  काजल:  मम्मी जी! अचानक ऊपर वाले कमरे की सफाई? वह कमरा तो … Read more

मैं भी तो एक बेटी ही हूं – मधु वशिष्ठ

निशा का घर दूर मैसूर में था और नीता आगरा की ही थी। क्योंकि कॉलेज की 5 दिन की छुट्टियां थीं तो दिल्ली का लगभग सारा हॉस्टल ही खाली हो रहा था। निशा का मैसूर तक आना और जाना 5 दिनों में तो संभव ना होता इसलिए उसने भी नीता के साथ उसके घर ही … Read more

मै भी एक बेटी हूं – निशा जैन

अरे रश्मि बेटा आज भी इतनी जल्दी उठ गई, आज तो रविवार है , आराम से उठ जाती। रोज़ तो पांच बजे उठती हो बच्चों के स्कूल की वजह से, रश्मि की सास आशा जी बोली मम्मी आपको और पापाजी को उठते ही चाय और गर्म पानी चाहिए इसलिए मैं उठ गई । आज सर्दी … Read more

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