अपनो से गैर भले – के आर अमित

दो साल बाद जब भी छुट्टी आता तो उसकी भाभी उसे जाने से हफ्ता दस दिन पहले कोई न कोई लड़की शादी के लिए दिखा देती और कहती कि अब रिश्ता हो गया है जब अगली बार आओगे तो धूमधाम से शादी करवा देंगे। चन्द्र खुश हो जाता और बापिस विदेश चला जाता मगर हर … Read more

अपनो से गैर भले – दीपा माथुर

पी..हु, पी …. हु  आवाज सुनते ही पीहू दादी के पास आ गई । दादी जोर जोर से श्वास ले रही थी। डॉक्टर साहब डॉक्टर साहब प्लीज़ देखिए ना दादी को क्या हुआ? पीहू ने जोर जोर से आवाजें लगाई। एक ७५ ८० साल की बुजुर्ग महिला अस्पताल के जनरल वार्ड में प्लग पर लेटी … Read more

अपनों से गैर भले! – डाॅ संजु झा

हताश-निराश नमिता सोच रही है कि  कभी-कभी मनुष्य  की ज़िन्दगी में ऐसे मोड़ उपस्थित हो जाते हैं कि अपनों से गैर ही भले लगने लगते हैं। मनुष्य अपनों की जहरीली चाल को समझ नहीं पाता है,उन पर भरोसा कर अपना सर्वस्व लुटा बैठता है।बाद में पछताने के सिवा उसके हाथ में कुछ भी नहीं आता … Read more

अपनों से गैर भले। – नीलम गुप्ता 

मेरी नानी अक्सर कहां करती थी – अपनों से गैर भले मैं सुनती तो सोचती ऐसा कैसे हो सकता है भला गैर अपनों से अच्छे कैसे हो सकते हैं अपनों के साथ हम अपना सुख दुख साझा करते हैं खुशी हो या गम अपने ही घर परिवार के लोगों को बुलाया जाता है वही हमारा … Read more

अपनो से तो गैर अच्छे – खुशी

रागिनी के पति हेमंत की बदली झारखंड के एक छोटे से शहर बिलासपुर में हुई ।कहा रागिनी एक भरे पूरे परिवार में रहती थी।घर में मां पिताजी,चाचा चाची दो भाई भाभियां उनके बच्चे चाचा के दो बेटे और एक बेटी नंदिनी जो उसके बराबर थी ऐसा उसका मायका था जो हैदराबाद में था। उसकी शादी … Read more

अपनों से बढ़ कर गैर है – रेखा जैन 

“रश्मि शादी के सारे इंतजाम, सारी तैयारियां तो हो गई है लेखन फिर भी दिल को चिंता लगी रहती है कि शादी के 4 दिन के कार्यक्रम में तुम और मैं तो बहुत व्यस्त रहेंगे तो इस दौरान सभी मेहमानों का ध्यान रखना और बाकी के सारे ऊपर के काम कौन देखेगा!” सुरेंद्र जी ने … Read more

काश…. – संगीता अग्रवाल

” क्या बात है अंतरा क्या सोच रही हो ऐसे गुमगुम बैठी?” मासूमी अपनी दोस्त के घर पहुंच उसे गुमसुम देख बोली। ” कुछ नही यार बस ऐसे ही !” अंतरा अनमनी सी बोली। ” ऐसे तो नही कोई तो बात है ?” मासूमी ने जैसे ही अंतरा के कंधे पर हाथ रखा उसकी कराह … Read more

 “गैर ” लेकिन अपना सा – गीता वाधवानी

 श्यामू ने अपनी पत्नी राधा को आवाज लगाते हुए कहा-” राधा, जल्दी से खाना लगा दो मुझे काम से बाहर जाना है। लोग सच ही कहते हैं, गरीब की किस्मत भी गरीब होती है। ”   राधा-” ऐसा क्यों कह रहे हो रानी के बापू,? ”   श्यामू -” और क्या कहूं राधा, तुम अच्छी तो रही … Read more

करुणा का रिश्ता – सीमा गुप्ता

अस्पताल के बरामदे में लगी बेंच पर बैठी सुधा अपने हाथों को बार-बार मल रही थी। दिसंबर की सर्द रात में उसकी उँगलियाँ ठंड से सुन्न हो चुकी थीं और वह काँप रही थी। पर तन से भी ज्यादा उसका मन कांप रहा था। सामने से आती-जाती नर्सों, स्ट्रेचर पर ले जाए जाते मरीजों और … Read more

निर्लज्ज – खुशी

सुहासिनी की शादी एक ऐसे परिवार में हुई जिसमें ससुर जी की बड़ी चलती थी और उसका पति भी अपने बाप से डरता था ।घर में किसी की हिम्मत नहीं थी कि वो ससुर रामबाबू के आगे बोल सके सास राधा भी डरी सहमी रहतीं।बेटी लक्ष्मी तो कुछ बोलती ही नहीं थी। उसकी शादी भी … Read more

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