गुलाबी तौलिया – गीता वाधवानी

पालम गांव के अस्पताल के एक बिस्तर पर पड़ी नैना, जिसने कल ही एक लड़की को जन्म दिया था, उसे उसकी सास माया आग्नेय नेत्रों से घूर रही थी। ” कहा कहां था ना पहला बच्चा लड़का ही होना चाहिए, हमारे खानदान का वारिस, हमारे यहां न जाने कितनी पीढियों से पहली संतान पुत्र के … Read more

अधिकार कैसा – सीमा सिंघी

आज नए घर की गृह प्रवेश की पूजा रखी गई थी ।जिसमें परिवार के लोग और नाते रिश्तेदार भी सम्मिलित हुए थे जिसकी वजह से घर पर चहल पहल बनी हुई थी। पूजन की सामग्री जुटाने के लिए सासू माँ और रसोई का काम मेरी देख रेख में ही हो रहा था कि अचानक मेरी … Read more

अधिकार कैसा? – नीलम शर्मा

बेटा मयंक तेरे पापा की सांस शायद तुझे देखने के लिए ही अटकी है। महिमा जी अपने विदेश में बसे बेटे से एक बार आने की विनती करते हुए फोन पर ही सिसकने लगी । पर उनके बेटे मयंक पर उनकी भावुक बातों का कोई असर नहीं हुआ। और बोला मां अब ये रोना-धोना बंद … Read more

बूढ़ेे पिता की पेंशन पर कैसा अधिकार – अमिता कुचया

जया सुबह- सुबह ससुर रामचरन जी को किचन में देखकर बोली -बाबू जी मुझे अभी टिफिन बनाना है, आप बाद में गरम पानी करना। वे बोले अच्छा बेटा तू अपने बाथरूम से ही गरम पानी लाकर दे दे। तब जया बोली- बाबू जी अभी बच्चों और आपके बेटे को गरम पानी चाहिए है ,आप को … Read more

अधिकार कैसा? – विनीता सिंह

रोशनी जब आठ साल की थी। तब उसकी मां की बीमारी से मृत्यु हो गई। उसके पिता अब रोशनी को ही उसकी मौत का जिम्मेदार समझते और दिन पर दिन उस से नफ़रत करते कहते जब इसका जन्म हुआ तब से उनकी मां बीमार रहने लगी यह बहुत ज्यादा अभागी है और उन्होंने बहुत18साल की … Read more

बड़ी बहू होना सम्मान है, अधिकार नहीं। – अर्चना खंडेलवाल  

वृषाली रसोई में खड़ी सब्जी काट रही थी। सुबह-सुबह का समय था और घर में हलचल शुरू हो चुकी थी। उसका मन काफी हल्का-फुल्का था क्योंकि आज वह अपनी सास मालती देवी की पसंद की बैंगन की स्वादिष्ट सब्जी बनाने वाली थी। उसने बड़े मन से तैयारी की, गैस हल्की रखी और बाहर आकर आँगन … Read more

हरिया चाचा – के आर अमित

स्कूल के छोटे बच्चे उनके आसपास बैठकर शरारतें किया करते कभी उनके औज़ार छुपा देते कभी जूते में छोटी कंकड़ डालकर चाचा को हँसी में परेशान करते। कभी कभी तो चाचा के थैले से निकालकर उसकी रोटी और आचार भी खा जाते। हरिया चाचा भी मुस्कुराकर सब सह लेते जैसे वो बरगद का पेड़ हों … Read more

error: Content is protected !!