अधिकार कैसा? – सीमा गुप्ता

राघव और प्रीति की शादी को लगभग बाईस–तेईस साल हो चुके थे। दोनों ने जीवन की धूप–छाँव साथ देखी। छोटे-से सरकारी क्वार्टर में बिताए कई वर्ष, राघव की सीमित तनख़्वाह और फिर दो बच्चों की परवरिश। संघर्ष बहुत थे, पर दोनों ने कंधे से कंधा मिलाकर घर संभाला। धीरे-धीरे हालात बदले। राघव की पदोन्नति हुई, … Read more

ये मेरा अधिकार है – मंजू ओमर 

बहू , बेटा हर्षिता सुबह-सुबह की सैर करके आ गया हूं।आज कुछ ज्यादा ही दूर चला गया था, बहुत थक गया हूं , मुझे एक कप चाय और नाश्ता दे  दो बेटा। बहुत जोर की भूख भी लग रही है। सन्तोष जी के आवाज़ देने पर भी कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने दोबारा आवाज … Read more

अधिकार कैसा… – रश्मि झा मिश्रा –

…सीमा चहकते हुए मां के कमरे से निकली… निकलते ही उसका सामना भाभी से हो गया… भाभी ने उसके चेहरे की तरफ गौर से देखा… एक पल को रुकी… लेकिन कुछ बोली नहीं… सीमा के कानों में मां के झुमके झूल रहे थे…  भाभी रोशनी सीधे मां के पास जाकर, शिकायत भरे लहजे में बोली…” … Read more

अधिकार प्रेम पर – रोनिता कुंडु

भैया… मैं तो दो तल्ले सोने का झुमका लूंगी, एक लौती बुआ हूं इसकी, अब इतना तो हक बनता है और नामकरण मेरे दिए हुए नाम से ही संपन्न होगा, तो कम में कैसे छोड़ दूं तुम्हें? सोनम ने अपने भैया जतिन को उसके बेटे के नामकरण पर कहा।  प्रभा जी:  अरे बेटी! तूने कुछ … Read more

सम्पति पर अधिकार किसका? – लतिका पल्लवी 

जो बेटा माँ बाप की सेवा नहीं कर सकता,उसे उनके पैसो पर भी नजर नहीं रखनी चाहिए।अभिषेक जी नें अपनी सम्पति से बेदखल करके अपने बेटे अनय को अच्छे से समझा दिया था। पापा नें उसे अपनी सम्पति से बेदखल कर दिया है सुनकर अनय तो एकदम ठगा ही रह गया था। कहाँ तो उसने … Read more

दहेज – एम. पी. सिंह 

अनु कि शादी अनिल से हुई तो वो दहेज में बहुत सारा सामान लेकर आई. दहेज के दम पर वो बहुत इतरा रही थी. वैसे जो भी सामान वो लाई थी, लगभग वो सब पहले से घर मैं मौजूद था, पर फर्क इतना था कि थोड़ा पुराना था पर कोई खराबी नहीं थी. दो चार … Read more

अधिकार – खुशी

नंदीश एक हैंडसम लड़का था।वो स्मार्टनेस और खूबसूरती का मिला जुला मिश्रण था।कॉलेज में तो जो उसे देख ले वो लड़की उस पर फिदा थी।इस बात को वो भी जानता था और कॉलेज में उसके बड़े अफेयर भी रहे।तभी उसके कॉलेज में ध्वनि आई जो उसकी जूनियर थी जिसे देख पहली बार नंदीश का दिल … Read more

बचपन को खिलने दो – कमलेश आहूजा

“ये तू क्या सारा दिन हँसी ठिठोली करती रहती है सबके साथ।थोड़ा सा तो गंभीर रहना सीख।भाई बहनों में सबसे बड़ी है।जैसा तू करेगी वैसा ही छोटे भाई बहन करेंगे।”घर के सभी लोग अक्सर नेहा को यही नसीहत देते रहते थे। नेहा तीन भाई बहनों में सबसे बड़ी थी।पढ़ाई लिखाई में होशियार थी।हर साल फर्स्ट … Read more

   बाबा तेरे आंगन की….- लतिका श्रीवास्तव

चलिए कन्यादान की रस्म होने वाली है पंडितजी बुला रहे हैं मेघा ने आकर कहा तो रामेश्वर जी के दिल में एक हलचल सी मच गई मानो प्राचीन रस्म रिवाज वर्जनाओं की बेड़ियां तोड़ने को बेताब हो गए हों। जब से निम्मी की शादी तय हुई अजीब सी आकुलता उनके मन को बेचैन करती रहती … Read more

अधिकार कैसा? – रेखा जैन

“अंकिता तुम्हारा भी अधिकार है। तुम भी अपनी इच्छा बोल सकती हो कि तुमको किसके साथ रहना है? ये तुम्हारा हक है!” “ये कैसा अधिकार जो ये चयन करने में काम आए की मुझे मम्मी के साथ रहना या पापा के? मुझे तो दोनों के साथ रहना है। और अगर उन दोनों को मेरी परवाह … Read more

error: Content is protected !!